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क्या हिंडनबर्ग के दावे में वाकई कोई सच्चाई है? आ गई Kotak Group की सफाई
अमेरिकी फर्म हिंडनबर्ग ने अडानी मामले में कोटक समूह का नाम घसीटा है. अब हिंडनबर्ग के दावे पर कोटक ने सफाई दी है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
पिछले साल अडानी समूह की परेशानी का सबब बनी अमेरिका की शॉर्ट सेलिंग फर्म हिंडनबर्ग रिसर्च ने सेबी निशाना साधते हुए कोटक समूह (Kotak Group) का जिक्र किया था. अब कोटक ने पूरे मामले पर सफाई दी है. बाजार नियामक सेबी के कारण बताओ नोटिस के जवाब में हिंडनबर्ग ने कहा था कि अडानी ग्रुप (Adani Group)के शेयरों को शॉर्ट करने के लिए उसने अपने एक इनवेस्टर पार्टनर के जरिए ऑफशोर फंड स्ट्रक्चर का इस्तेमाल किया था. इस ऑफशोर फंड स्ट्रक्चर को कोटक महिंद्रा बैंक (Kotak Mahindra Bank) ने बनाया था और इसकी देखरेख भी की थी. कोटक महिंद्रा इंटरनेशनल लिमिटेड (KMIL) ने अब इस मामले पर अपना पक्ष रखा है.
KYC का पालन किया
कोटक की तरफ से कहा गया है कि हिंडनबर्ग कभी भी उसका ग्राहक नहीं रहा और न ही वह कभी फंड में निवेशक रहा है. कंपनी ने एक बयान में कहा कि कोटक महिंद्रा इंटरनेशनल लिमिटेड यह साफ करना चाहती है कि हिंडनबर्ग कभी भी फर्म का ग्राहक नहीं रहा है और न ही वह कभी फंड में निवेशक रहा है. फंड को कभी भी यह नहीं पता था कि हिंडनबर्ग उसके किसी निवेशक का भागीदार था. कोटक ने दावा किया कि KMIL ग्राहकों को शामिल करते समय उचित केवाईसी प्रक्रियाओं का पालन करता है और प्रत्येक निवेश सभी लागू कानूनों के मुताबिक किए जाते हैं.
कोटक के शेयर लुढ़के
कोटक महिंद्रा ने आगे कहा कि के-इंडिया ऑपर्च्युनिटीज फंड लिमिटेड (KIOF) सेबी द्वारा पंजीकृत विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक है और मॉरीशस के वित्तीय सेवा आयोग से रेगुलेटेड है. इस फंड की स्थापना विदेशी ग्राहकों को भारत में निवेश करने में सक्षम बनाने के लिए 2013 में की गई थी. हमने अपने ऑपरेशन के संबंध में बाजार नियामक के साथ सहयोग किया है और भविष्य में भी ऐसा करना जारी रखेंगे. वहीं, अडानी-हिंडनबर्ग मामले में कोटक का नाम घसीटे जाने से कंपनी के शेयरों को नुकसान हुआ है. कोटक बैंक के शेयर आज करीब ढाई प्रतिशत की गिरावट के साथ 1,763.15 रुपए पर बंद हुए.
क्या कहा है हिंडनबर्ग ने?
हिंडनबर्ग ने कोटक महिंद्रा बैंक का नाम लेते हुए सेबी पर निशाना साधा औरकई गंभीर आरोप भी लगाए हैं. अमेरिकी फर्म ने यह सवाल भी पूछा है कि आखिर SEBI ने अपने नोटिस में कोटक महिंद्रा बैंक का पूरा नाम क्यों नहीं लिया? हिंडनबर्ग का कहना है कि SEBI ने हम पर अधिकार क्षेत्र का दावा करने के लिए काफी मशक्कत की है, लेकिन उसके नोटिस में स्पष्ट तौर पर उस पार्टी का नाम नहीं लिया गया, जिसका भारत से असल में संबंध है. यह पार्टी कोटक महिंद्रा बैंक है. हमारे इनवेस्टर पार्टनर के लिए इसी बैंक ने ऑफशोर फंड स्ट्रक्चर बनाया और उसकी देखरेख की है. हमने इसी का इस्तेमाल करके अडानी के शेयरों को शॉर्ट किया.
जानबूझकर छिपाया नाम?
हिंडनबर्ग ने आगे कहा है कि अपने नोटिस में सेबी ने कोटक के नाम को KMIL के संक्षिप्त नाम से छिपा दिया. KMIL का मतलब है कोटक महिंद्रा इनवेस्टमेंट्स लिमिटेड. अमेरिकी शॉर्टसेलर फर्म ने आरोप लगाया कि सेबी ने शायद बिजनेसमैन को जांच में दायरे से बचाने के लिए कोटक का नाम छिपाया है.हिंडनबर्ग ने कहा कि कोटक बैंक के फाउंडर उदय कोटक ने सेबी की 2017 की कॉरपोरेट गवर्नेंस कमिटी की अध्यक्षता की थी. लिहाजा हमें संदेह है कि सेबी ने कोटक या कोटक बोर्ड के किसी अन्य सदस्य का जिक्र इसलिए इसलिए नहीं किया, ताकि किसी अन्य शक्तिशाली भारतीय बिजनेसमैन को जांच के दायरे में आने से बचाया जा सके.
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