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कर्नाटक 100 स्टार्टअप्स को देगा 25 करोड़ रुपये की मदद, सरकारी विभागों में होगा टेक्नोलॉजी का पायलट
यह पहल कर्नाटक स्टार्टअप पॉलिसी 2025-30 के तहत विशेष पहल के रूप में तैयार की गई है. इसका उद्देश्य स्टार्टअप्स और सरकारी विभागों के बीच सीधे सहयोग का रास्ता तैयार करना है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 hour ago
कर्नाटक सरकार अगले तीन वर्षों में करीब 100 स्टार्टअप्स को समर्थन देने के लिए 25 करोड़ रुपये खर्च करेगी. सरकार ने 11 सितंबर को अपनी नई ‘Government First’ पहल की घोषणा की. इसके तहत ऐसे स्टार्टअप्स को सरकारी विभागों में अपनी तकनीक का पायलट प्रोजेक्ट चलाने के लिए 25 लाख रुपये तक के वर्क ऑर्डर दिए जा सकेंगे, जिनके समाधान वास्तविक इस्तेमाल के लिए तैयार हैं.
यह पहल कर्नाटक स्टार्टअप पॉलिसी 2025-30 के तहत विशेष पहल के रूप में तैयार की गई है. इसका उद्देश्य स्टार्टअप्स और सरकारी विभागों के बीच सीधे सहयोग का रास्ता तैयार करना है, ताकि नई तकनीकों को वास्तविक सरकारी परिस्थितियों में परखा जा सके. सफल रहने वाले पायलट प्रोजेक्ट्स को आगे सरकारी खरीद और बड़े स्तर पर लागू करने का मौका मिल सकेगा.
स्टार्टअप्स खुद भी दे सकेंगे समाधान
इस पहल की खास बात यह है कि स्टार्टअप्स को केवल सरकार की ओर से जारी चुनौतियों या समस्या के समाधान तक सीमित नहीं रखा जाएगा. वे खुद भी अपने ऐसे समाधान सरकारी विभागों के सामने पेश कर सकेंगे, जो सीधे इस्तेमाल के लिए तैयार हैं. यह ‘Startup-Initiated Route’ सरकारी विभागों की ओर से जारी किए जाने वाले औपचारिक चैलेंज के साथ समानांतर रूप से काम करेगा. इसके अलावा, स्टार्टअप्स के लिए पहले से सरकारी विभागों के साथ काम करने का अनुभव अनिवार्य नहीं होगा. इससे नए और छोटे स्टार्टअप्स के लिए सरकारी बाजार में प्रवेश आसान हो सकेगा.
पहल के तहत स्टार्टअप्स अपनी तकनीक से जुड़े बौद्धिक संपदा अधिकार यानी Intellectual Property Rights (IPR) भी अपने पास रख सकेंगे.
पायलट से सरकारी खरीद तक का रास्ता
इस योजना को केवल तकनीक के प्रदर्शन तक सीमित नहीं रखा गया है. इसमें ‘टेस्ट, वैलिडेट और प्रोक्योर’ मॉडल अपनाया जाएगा. तकनीकी मूल्यांकन और मंजूरी के बाद चुने गए समाधानों को सरकारी विभागों में पायलट के तौर पर लागू किया जाएगा.
पायलट प्रोजेक्ट के दौरान तय मानकों के आधार पर उसके नतीजों का आकलन किया जाएगा. सफल समाधान आगे परिणामों के मूल्यांकन, खरीद की सिफारिश, वर्क ऑर्डर जारी करने और उसे लागू करने की प्रक्रिया से गुजर सकेंगे. अगर किसी समाधान से एक सरकारी विभाग में अच्छे नतीजे मिलते हैं, तो उसे दूसरे विभागों में भी लागू करने पर विचार किया जा सकेगा.
AI, हेल्थकेयर और एग्रीकल्चर पर फोकस
इस पहल के तहत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डिजिटल गवर्नेंस, हेल्थकेयर, कृषि, शिक्षा और मोबिलिटी जैसे क्षेत्रों में तकनीकी समाधानों को बढ़ावा दिया जाएगा. सरकार का फोकस शुरुआती रिसर्च और डेवलपमेंट पर नहीं, बल्कि ऐसे समाधानों पर होगा जिन्हें वास्तविक परिस्थितियों में तुरंत इस्तेमाल किया जा सकता है. पायलट शुरू होने से पहले प्रस्तावित तकनीकों का तकनीकी मूल्यांकन किया जाएगा.
तीन स्तरीय व्यवस्था से होगी निगरानी
कार्यक्रम की निगरानी के लिए तीन स्तरों वाली व्यवस्था बनाई गई है. इसमें Selection Committee, Technical Committee और Review Committee शामिल होंगी. Selection Committee स्टार्टअप्स के चयन और पायलट की मंजूरी से जुड़े काम देखेगी. Technical Committee तकनीक के क्रियान्वयन और तय लक्ष्यों की प्रगति का मूल्यांकन करेगी, जबकि Review Committee वित्तीय निगरानी से जुड़े मामलों को देखेगी.
सरकारी बाजार में स्टार्टअप्स की पहुंच बढ़ाने की कोशिश
इस पहल के तहत सरकारी विभाग अपनी जरूरतों और समस्याओं की पहचान कर स्टार्टअप्स के लिए समस्या विवरण जारी कर सकेंगे. वहीं, स्टार्टअप्स बिना किसी औपचारिक चैलेंज के भी अपने तैयार समाधान सरकार के सामने रख सकेंगे. सरकार के मुताबिक, इस पहल का उद्देश्य सरकारी खरीद में स्टार्टअप्स की भागीदारी बढ़ाना, नई तकनीकों को तेजी से अपनाना और सरकारी सेवाओं की दक्षता और गुणवत्ता में सुधार करना है. साथ ही, सफल तकनीकी समाधानों को अलग-अलग विभागों में बड़े स्तर पर लागू करने का रास्ता तैयार किया जाएगा.
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