होम / बिजनेस / ग्रैन्यूल्स इंडिया के प्रमोटर चिगुरुपति ने बेचे 1.72 करोड़ शेयर, हिस्सेदारी घटकर 24.06%
ग्रैन्यूल्स इंडिया के प्रमोटर चिगुरुपति ने बेचे 1.72 करोड़ शेयर, हिस्सेदारी घटकर 24.06%
चिगुरुपति ने ग्रैन्यूल्स इंडिया के शेयर 872.50 रुपये प्रति शेयर के फ्लोर प्राइस पर बेचे. इस आधार पर पूरी ब्लॉक डील का मूल्य करीब 1,160 करोड़ रुपये रहा.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 hour ago
फार्मा कंपनी ग्रैन्यूल्स इंडिया (Granules India) के प्रमोटर डॉ. कृष्ण प्रसाद चिगुरुपति ने 11 सितंबर 2026 को कंपनी के 1.72 करोड़ इक्विटी शेयरों की बिक्री की है. यह बिक्री ओपन मार्केट में बल्क और ब्लॉक डील के जरिए की गई. करीब 1,160 करोड़ रुपये की इस डील के बाद कंपनी में चिगुरुपति की व्यक्तिगत हिस्सेदारी 31 फीसदी से घटकर 24.06 फीसदी रह गई है.
872.50 रुपये के फ्लोर प्राइस पर हुई बिक्री
चिगुरुपति ने ग्रैन्यूल्स इंडिया के शेयर 872.50 रुपये प्रति शेयर के फ्लोर प्राइस पर बेचे. इस आधार पर पूरी ब्लॉक डील का मूल्य करीब 1,160 करोड़ रुपये रहा. उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, शेयर बिक्री का प्रमुख उद्देश्य कंपनी के जारी प्रेफरेंशियल इश्यू की दूसरी किस्त के लिए फंड जुटाना है.
विस्तार योजनाओं के लिए जुटाया जा रहा फंड
ग्रैन्यूल्स इंडिया अपनी विस्तार योजनाओं और कारोबार के अगले चरण की ग्रोथ के लिए पूंजी जुटाने की प्रक्रिया में है. चिगुरुपति द्वारा अपनी मौजूदा हिस्सेदारी के एक हिस्से की बिक्री को इसी फंडिंग प्रक्रिया से जोड़कर देखा जा रहा है. इस बिक्री से प्रमोटर ने अपनी हिस्सेदारी का कुछ हिस्सा मोनेटाइज किया है, ताकि कंपनी की पूंजी जुटाने की जरूरतों में योगदान दिया जा सके.
प्रमोटर ग्रुप की हिस्सेदारी भी घटी
शेयर बिक्री के बाद चिगुरुपति की व्यक्तिगत हिस्सेदारी 31 फीसदी से घटकर 24.06 फीसदी हो गई. वहीं, ग्रैन्यूल्स इंडिया में प्रमोटर ग्रुप की कुल हिस्सेदारी भी 38.02 फीसदी से घटकर 31.08 फीसदी रह गई है.
1.33 करोड़ शेयरों की ब्लॉक डील
चिगुरुपति द्वारा बेचे गए 1.72 करोड़ शेयरों में से करीब 1.33 करोड़ शेयर शुरुआती ब्लॉक डील में हाथ बदले. बाकी शेयरों की बिक्री भी ओपन मार्केट में बल्क और ब्लॉक ट्रांजैक्शन के जरिए की गई.
कंपनी से पूरी तरह बाहर नहीं हुए प्रमोटर
इस हिस्सेदारी बिक्री के बावजूद चिगुरुपति ग्रैन्यूल्स इंडिया से पूरी तरह बाहर नहीं हुए हैं. उनके पास अभी भी कंपनी की 24.06 फीसदी हिस्सेदारी है. ऐसे में यह सौदा प्रमोटर के एग्जिट के बजाय कंपनी की विस्तार योजनाओं के लिए पूंजी जुटाने की व्यापक प्रक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है.
टैग्स