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टोल प्लाजा पर नहीं लगेगा ब्रेक! बैरियर-फ्री टोलिंग से 10,000 करोड़ रुपये बढ़ सकता है राजमार्ग संग्रह: गडकरी
गडकरी ने शुक्रवार को ग्लोबल फिनटेक फेस्ट (GFF) 2026 में कहा कि उनका मंत्रालय फरवरी-मार्च 2027 तक MLFF टोलिंग सिस्टम के जरिए राष्ट्रीय राजमार्गों को बैरियर-फ्री बनाने का लक्ष्य लेकर चल रहा है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 hour ago
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा है कि सरकार देश में टोलिंग व्यवस्था को पूरी तरह बैरियर-फ्री बनाने की दिशा में तेजी से काम कर रही है. मल्टी-लेन फ्री फ्लो (MLFF) टोलिंग सिस्टम के विस्तार से न सिर्फ वाहन चालकों को टोल प्लाजा पर रुकने से राहत मिलेगी, बल्कि राजमार्गों से होने वाले टोल संग्रह में भी करीब 10,000 करोड़ रुपये तक की बढ़ोतरी हो सकती है.
फरवरी-मार्च 2027 तक बैरियर-फ्री टोलिंग का लक्ष्य
गडकरी ने शुक्रवार को ग्लोबल फिनटेक फेस्ट (GFF) 2026 में कहा कि उनका मंत्रालय फरवरी-मार्च 2027 तक MLFF टोलिंग सिस्टम के जरिए राष्ट्रीय राजमार्गों को बैरियर-फ्री बनाने का लक्ष्य लेकर चल रहा है. उन्होंने बताया कि दिसंबर 2026 तक देश के 60-70 फीसदी टोल प्लाजा पर MLFF व्यवस्था लागू किए जाने की उम्मीद है.
82,589 करोड़ रुपये पहुंचा टोल संग्रह
देश में डिजिटल टोल संग्रह का दायरा तेजी से बढ़ा है. 2,000 से अधिक टोल प्लाजा पर डिजिटल माध्यम से होने वाला टोल संग्रह वित्त वर्ष 2017 में 660.67 करोड़ रुपये था, जो वित्त वर्ष 2025 में बढ़कर 64,603.12 करोड़ रुपये और वित्त वर्ष 2026 में 82,589.9 करोड़ रुपये हो गया.
टोल संचालन की लागत में भी आएगी कमी
गडकरी के मुताबिक, MLFF लागू होने से टोल प्लाजा के संचालन और रखरखाव की लागत मौजूदा 12-15 फीसदी से घटकर सिर्फ 2-3 फीसदी रह सकती है. इससे सरकार को करीब 6,000-7,000 करोड़ रुपये की बचत होने का अनुमान है.
10 सेकंड या उससे कम होगा इंतजार
गडकरी ने कहा कि पहले टोल प्लाजा पर वाहनों को 12 से 30 मिनट तक इंतजार करना पड़ता था. तकनीक के इस्तेमाल से इसमें 80-90 फीसदी तक सुधार हुआ है और अब सरकार इसे घटाकर 10 सेकंड या उससे भी कम करने की कोशिश कर रही है. इससे वाहन चालकों के समय और ईंधन दोनों की बचत होगी और प्रदूषण कम करने में भी मदद मिलेगी.
हर साल 71 करोड़ घंटे और 56 करोड़ लीटर ईंधन बचने का अनुमान
मंत्री के अनुसार, टोलिंग तकनीक को तेजी से अपनाने से हर साल करीब 71 करोड़ घंटे का समय और 56 करोड़ लीटर ईंधन बचाया जा सकता है. ईंधन की बचत का अनुमानित मूल्य करीब 5,250 करोड़ रुपये है, जबकि बचाए गए समय की आर्थिक कीमत करीब 68,500 करोड़ रुपये आंकी गई है.
सरकार को हर साल 20,000-25,000 करोड़ रुपये का फायदा
गडकरी ने कहा कि NETC FASTag और मौजूदा टोलिंग व्यवस्था को देखें तो केंद्र सरकार को अकेले सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय से हर साल 20,000-25,000 करोड़ रुपये तक का फायदा हो सकता है. उन्होंने इसे तकनीकी नवाचार का परिणाम बताया.
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