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‘BRICS किसी के खिलाफ नहीं’, PM मोदी बोले- अब नियम मानने वाला नहीं, नियम बनाने वाला बने ग्लोबल साउथ

18वें BRICS शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक व्यवस्था में ग्लोबल साउथ की भूमिका बढ़ाने पर जोर दिया, कहा- BRICS का मकसद किसी के खिलाफ खड़ा होना नहीं, बल्कि सभी को साथ लेकर चलना है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 month ago

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 18वें BRICS शिखर सम्मेलन में ग्लोबल साउथ की बढ़ती भूमिका को लेकर बड़ा संदेश दिया है. उन्होंने कहा कि ग्लोबल साउथ के देशों को अब केवल वैश्विक नियमों का पालन करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उन्हें नियम बनाने की प्रक्रिया में भी सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए. प्रधानमंत्री ने कहा कि वैश्विक व्यवस्था में विकासशील देशों की आवाज और भागीदारी को और मजबूत करने की जरूरत है.

नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित BRICS शिखर सम्मेलन में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन समेत सदस्य देशों के नेता शामिल हुए. BRICS चेयर के तौर पर उद्घाटन भाषण देते हुए मोदी ने कहा कि दुनिया की कई बड़ी चुनौतियों का असर ग्लोबल साउथ पर पड़ता है, लेकिन वैश्विक फैसले लेने की प्रक्रिया में इन देशों की भूमिका अभी भी सीमित है.

ग्लोबल साउथ को नियम बनाने में मिले बड़ी भूमिका

प्रधानमंत्री मोदी ने मौजूदा वैश्विक शासन व्यवस्था की तुलना एक पिरामिड से करते हुए कहा कि इसमें ताकत और निर्णय लेने की प्रक्रिया ऊपर के स्तर पर केंद्रित है. वहीं, नीचे के स्तर पर मौजूद देशों पर इन फैसलों का असर तो पड़ता है, लेकिन उन्हें फैसलों को आकार देने का पर्याप्त अवसर नहीं मिलता. उन्होंने कहा कि अब इस व्यवस्था में बदलाव की जरूरत है. ग्लोबल साउथ के देशों को वैश्विक संस्थानों और निर्णय लेने की प्रक्रियाओं में अधिक प्रभावी प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए.

‘BRICS किसी के खिलाफ नहीं’

मोदी ने BRICS को लेकर भी स्पष्ट संदेश दिया. उन्होंने कहा कि BRICS किसी देश या समूह के खिलाफ खड़ा होने वाला मंच नहीं है. इसका उद्देश्य सहयोग, संवाद और सभी देशों को साथ लेकर आगे बढ़ना है. प्रधानमंत्री ने कहा कि BRICS को मजबूत करने के साथ वैश्विक व्यवस्था में सुधार की दिशा में भी काम करना होगा. उन्होंने सदस्य देशों से संगठन की एकता और आपसी सहमति को ठोस नतीजों में बदलने का आह्वान किया.

अगले 20 वर्षों के लिए नया एजेंडा बनाने पर जोर

प्रधानमंत्री ने BRICS के लिए अगले 20 वर्षों का महत्वाकांक्षी एजेंडा तैयार करने की जरूरत पर भी जोर दिया. उन्होंने कहा कि बदलती वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए संगठन को अपनी भूमिका और प्राथमिकताओं को और व्यापक बनाना होगा. मोदी के मुताबिक, BRICS देशों की सामूहिक ताकत का इस्तेमाल वैश्विक विकास, आर्थिक सहयोग और वैश्विक संस्थानों में सुधार के लिए किया जाना चाहिए.

मतभेदों के बावजूद संयुक्त बयान पर सहमति

18वें BRICS शिखर सम्मेलन में सदस्य देशों के बीच संयुक्त बयान जारी करने पर भी सहमति बनी. यह सहमति ऐसे समय में बनी है, जब पश्चिम एशिया में तनाव जारी है और ईरान, सऊदी अरब और UAE जैसे सदस्य देशों के कई मुद्दों पर अलग-अलग रुख हैं.

इन मतभेदों के बावजूद भारत ने सदस्य देशों के बीच संवाद और आम सहमति बनाने पर जोर दिया. भारत की कोशिश BRICS की एकता बनाए रखने और अलग-अलग मुद्दों पर सदस्य देशों के बीच सहमति का रास्ता तैयार करने की रही.

प्रधानमंत्री मोदी का संदेश साफ था कि BRICS को केवल आर्थिक सहयोग के मंच तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि ग्लोबल साउथ की आवाज को वैश्विक निर्णय प्रक्रिया में मजबूत करने के लिए भी प्रभावी भूमिका निभानी चाहिए.


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