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RBI का बड़ा कदम: सितंबर में 1 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा के बॉन्ड बेचेगा, सिस्टम से घटाएगा अतिरिक्त नकदी
बैंकिंग सिस्टम में बढ़ी अतिरिक्त नकदी को नियंत्रित करने के लिए केंद्रीय बैंक तीन चरणों में करेगा OMO बिक्री, RBI गवर्नर ने कहा- नकदी प्रबंधन के लिए सभी विकल्प खुले
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 hour ago
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) बैंकिंग सिस्टम में बढ़ी अतिरिक्त नकदी को कम करने के लिए सितंबर में तीन चरणों में 1 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा के सरकारी बॉन्ड बेचने जा रहा है. केंद्रीय बैंक ने खुले बाजार परिचालन (OMO) के तहत बॉन्ड बिक्री का यह फैसला ऐसे समय में लिया है, जब बैंकिंग सिस्टम में नकदी अधिशेष काफी बढ़ गया है.
RBI के इस कदम का मकसद सिस्टम में लंबी अवधि की अतिरिक्त नकदी को बाहर निकालना है. इससे पहले अतिरिक्त नकदी को कम करने के लिए की गई लंबी अवधि की वेरिएबल रेट रिवर्स रेपो (VRRR) नीलामी को बैंकों की ओर से सीमित प्रतिक्रिया मिली थी.
बैंकिंग सिस्टम में 10.43 लाख करोड़ रुपये का नकदी अधिशेष
RBI के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, गुरुवार को बैंकिंग सिस्टम में शुद्ध अतिरिक्त नकदी 10.43 लाख करोड़ रुपये थी. वहीं, कोर लिक्विडिटी 13 लाख करोड़ से 14 लाख करोड़ रुपये के बीच रहने का अनुमान है.
केंद्रीय बैंक के मुताबिक, OMO बिक्री के जरिए लंबी अवधि की अतिरिक्त नकदी को कम किया जाएगा, जबकि VRRR नीलामी का इस्तेमाल मुख्य रूप से कम अवधि की नकदी को नियंत्रित करने के लिए किया जाता है.
RBI गवर्नर ने कहा- नकदी घटाने के कई विकल्प मौजूद
RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा है कि बैंकिंग सिस्टम में अतिरिक्त नकदी को कम करने के लिए केंद्रीय बैंक के पास कई विकल्प मौजूद हैं. CNBC-TV18 को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने OMO और स्वैप जैसे उपायों का जिक्र किया. उन्होंने संकेत दिया कि VRRR के जरिए नकदी कम करने से शायद ज्यादा मदद नहीं मिले.
मल्होत्रा ने यह भी कहा कि बैंकों के नकदी आरक्षी अनुपात (CRR) में बदलाव की संभावना को भी पूरी तरह खारिज नहीं किया जा सकता. हालांकि, उन्होंने यह भी ध्यान दिलाया कि रियायती स्वैप विंडो के तहत जुटाई गई FCNR(B) जमा को CRR से छूट दी गई थी.
FCNR(B) जमा से बढ़ी सिस्टम में नकदी
बैंकिंग सिस्टम में मौजूद अतिरिक्त नकदी का एक बड़ा कारण बैंकों की ओर से जुटाई गई 127 अरब डॉलर की FCNR(B) जमा है. इस अतिरिक्त नकदी को सिस्टम से निकालने के लिए RBI अब OMO बिक्री का सहारा ले रहा है.
VRRR नीलामी में बैंकों की सीमित दिलचस्पी
शुक्रवार को हुई 26 दिन की VRRR नीलामी में बैंकों ने 5 लाख करोड़ रुपये की अधिसूचित राशि के मुकाबले सिर्फ 60,449 करोड़ रुपये की बोलियां लगाईं. इसके मुकाबले चार दिन की VRRR नीलामी में 5 लाख करोड़ रुपये की अधिसूचित राशि के सामने 3.44 लाख करोड़ रुपये की बोलियां मिली थीं. मल्होत्रा के मुताबिक, RBI का मुख्य उद्देश्य मौद्रिक नीति के परिचालन लक्ष्य यानी वेटेड एवरेज कॉल रेट (WACR) को रेपो रेट के करीब बनाए रखना है.
WACR रेपो रेट से नीचे
ओवरनाइट WACR गुरुवार को 5.02 प्रतिशत पर बंद हुआ, जबकि इससे पिछले सत्र में यह 4.98 प्रतिशत था. यह दर स्थायी जमा सुविधा (SDF) दर के आसपास बनी हुई है. RBI गवर्नर के मुताबिक, सिस्टम में अतिरिक्त नकदी के कारण WACR पर दबाव बना हुआ है. अगर 5 से 7 अक्टूबर को होने वाली अगली मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक में ब्याज दरों में बढ़ोतरी की जाती है, तो केंद्रीय बैंक के लिए WACR को 5.25 प्रतिशत की मौजूदा रेपो दर के करीब लाना अहम होगा.
बॉन्ड यील्ड पर पड़ सकता है असर
बाजार के कारोबारियों का मानना है कि RBI की ओर से बड़े पैमाने पर OMO के तहत बॉन्ड बेचने से सरकारी बॉन्ड की यील्ड पर दबाव बढ़ सकता है. बॉन्ड की आपूर्ति बढ़ने से उनकी कीमतों पर असर पड़ सकता है, जिसका असर यील्ड में बढ़ोतरी के रूप में दिखाई दे सकता है.
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