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विवादों में घिरा कर्नाटक सरकार का फैसला, Infosys के पूर्व CEO ने ही उठा दिए सवाल…

मोहनदास पाई ऐसे पहले उद्योगपति हैं जिन्‍होंने राज्‍य सरकार के फैसले पर सवाल उठाया है. मोहनदास को पद्म श्री भी दिया गया है और वो इंफोसिस से भी जुड़े रहे हैं. 

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago

कर्नाटक सरकार के एक फैसले को लेकर सवाल उठना शुरू हो गया है. Infosys के पूर्व सीईओ मोहनदास पाई ने कहा है कि सरकार के इस फैसले को लेकर फिर से विचार करने की अपील करते हुए कहा है कि इसका बड़ा असर ये हो सकता है कि भविष्‍य में कंपनियां यहां आना ही बंद कर देंगी. ये फैसला उन्‍हें आने वाले भविष्‍य को लेकर डरा सकता है. गौरतलब है कि कर्नाटक सरकार ने बुधवार को फैसला लिया था कि सभी एमएनसी (Multi National Company) को बोर्ड लगाकर ये जानकारी देनी होगी कि उनके वहां कितने कन्‍नड़ लोग काम कर रहे हैं. 

क्‍या बोले मोहनदास पाई? 
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इंफोसिस के पूर्व सीईओ मोहनदास पाई ने इस पूरे मामले को सरकार से इसे लेकर फिर से विचार करने को कहा है. उन्‍होंने कहा कि सरकार का ये फैसला एमएनसी को राज्‍य से दूर कर देगा और वो यहां आकर काम करने से डरने लगेंगी. उन्‍होंने कहा कि मल्‍टीनेशनल कंपनियां लोकल लोगों को रोजगार देना चाहती हैं लेकिन पर्याप्‍त संख्‍या में स्किल ना होने के कारण वो सभी लोकल लोगों को नहीं रखा जा सकता है. उन्‍होंने ये भी कहा कि इससे कन्‍नड़ लोगों की किसी भी तरह से मदद नहीं होगी. अगर सरकार वास्‍तव में उनकी मदद करना चाहती है तो उसे उन्‍हें और ज्‍यादा स्किल्‍ड बनाना चाहिए. 

कर्नाटक सरकार ने लिया था क्‍या फैसला? 
कर्नाटक में इन दिनों विधानसभा का सत्र चल रहा है. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इसमें कर्नाटक संपूर्ण भाषा विकास बिल के अमेंडमेंड को लेकर अपनी बात कहते हुए कल्‍चरल मंत्री शिवराज तंगाडागी ने कल कहा था कि सरकार पूरे राज्‍य में कन्‍नड़ भाषा के विकास को लेकर काम कर रही है. उन्‍होंने कहा कि वो जल्‍द ही सभी कंपनियों के लिए निर्देश जारी करने वाले हैं कि उनके वहां कितने कन्‍नड़ लोग काम कर रहे हैं. इसकी जानकारी को उन्‍हें बाकायदा बोर्ड पर देनी होगी. सबसे खास बात ये है कि ये नियम टेक कंपनियों पर लागू नहीं होता है. उन्‍होंने कहा कि ऐसा ना करने पर कंपनी का लाइसेंस रद्द कर दिया जाएगा. 

सरकार ने इसे लेकर बनाई गई थी कमिटी 
कर्नाटक सरकार के मंत्री ने कहा था कि इस मामले को लेकर एक समिति बनाई गई थी, जिसकी अध्‍यक्षता मैं खुद कर रहा था. इस मामले में सभी विशेषज्ञों की राय है कि एमएनसी के लिए नियम तय किए जा सकते हैं. इस समिति में सभी विभागों के सचिव शामिल थे, जिसमें इस मामले को लेकर सुझाव दिया है.  

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