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फिर घट गया हमारा विदेशी मुद्रा भंडार, लगातार दूसरे सप्ताह लगा बड़ा झटका

किसी भी देश के लिए विदेशी मुद्रा भंडार काफी महत्वपूर्ण होता है और इसका इस्तेमाल देश की देनदारियों को पूरा करने के साथ ही कई कामों में किया जाता है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago

हमारे विदेशी मुद्रा भण्डार में इस बार भी गिरावट देखने को मिली है. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक 11 अक्टूबर को समाप्त सप्ताह के दौरान भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में 10.75 अरब डॉलर की भारी गिरावट हुई है, जो एक अप्रैल 2022 के बाद की सबसे बड़ी गिरावट है. इसी के साथ हमारा विदेशी मुद्रा भंडार घटकर 690.43 अरब डॉलर रह गया है. बता दें कि इससे एक सप्ताह पहले भी इस भंडार में 4.709 अरब डॉलर की कमी देखने को मिली थी. जबकि 27 सितंबर को समाप्त सप्ताह के दौरान यह 704.885 अरब डॉलर के सर्वकालिक उच्चतम स्तर था.

FCAs में भी आई कमी
RBI के अनुसार, आलोच्य सप्ताह के दौरान भारत की विदेशी मुद्रा आस्तियां (FCAs) भी घटी हैं. 11 अक्टूबर को समाप्त सप्ताह के दौरान अपने FCAs में 10.542 अरब डॉलर की कमी हुई है. अब एफसीए भंडार घटकर 602.101 अरब डॉलर रह गया है. गौरतलब है कि कुल विदेशी मुद्रा भंडार में विदेशी मुद्रा आस्तियां या फॉरेन करेंसी असेट (FCA) एक महत्वपूर्ण हिस्सा होती है. इसी तरह, देश का गोल्ड रिजर्व या स्वर्ण भंडार भी कम हुआ है. 11 अक्टूबर को समाप्त सप्ताह के दौरान भारत के स्वर्ण भंडार में 228 करोड़ डॉलर की कमी हुई है. अब हमारा सोने का भंडार 65.658 अरब डॉलर रह गया है.

SDR में भी गिरावट
वहीं, भारत के स्पेशल ड्रॉइंग राइट या विशेष आहरण अधिकार (SDR) भी कमी आई है. समीक्षाधीन सप्ताह के दौरान एसडीआर में 558 करोड़ डॉलर की गिरावट दर्ज की गई. अब यह घटकर 18.339 अरब डॉलर रह गया है. इसी सप्ताह अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के पास रखे हुए देश के रिजर्व मुद्रा भंडार में भी कमी देखने को मिली है. अब यह घटकर 4.333 अरब डॉलर रह गया है.  

देश की हेल्थ का मीटर  
अब चलिए यह भी जान लेते हैं कि विदेशी मुद्रा भंडार आखिर क्या होता है और इस भंडार का भरा रहना क्यों ज़रूरी है, विदेशी मुद्रा भंडार का पर्याप्त संख्या में होना हर देश के लिए महत्वपूर्ण है. इसे देश की हेल्थ का मीटर कहा जाए तो गलत नहीं होगा. इसमें विदेशी करेंसीज, गोल्ड रिजर्व, SDR, IMF के पास जमा राशि और ट्रेजरी बिल्स आदि आते हैं और इन्हें केंद्रीय बैंक या अन्य मौद्रिक संस्थाएं संभालती हैं. इन संस्थाओं का काम पेमेंट बैलेंस की निगरानी करना, मुद्रा की विदेशी विनिमय दर पर नज़र रखना और वित्तीय बाजार स्थिरता बनाए रखना है. विदेशी मुद्रा भंडार में दूसरे देशों के केंद्रीय बैंकों की ओर से जारी की जाने वाली मुद्राएं शामिल होती हैं. अधिकांश विदेशी मुद्रा भंडार में सबसे बड़ा भाग US डॉलर के रूप में होता है.

इसलिए है महत्वपूर्ण
किसी भी देश के लिए विदेशी मुद्रा भंडार काफी महत्वपूर्ण होता है और इसका इस्तेमाल देश की देनदारियों को पूरा करने के साथ ही कई कामों में किया जाता है. वैसे, दुनिया के अधिकतर देश अपना विदेशी मुद्रा भंडार डॉलर में रखना पसंद करते हैं, क्योंकि अधिकांश व्यापार डॉलर में ही होता है. लेकिन इसमें सीमित संख्या में ब्रिटिश पाउंड, यूरो और जापानी येन भी हो सकते हैं. विदेशी मुद्रा भंडार का सबसे पहला उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि यदि रुपया तेजी से नीचे गिरता है या पूरी तरह से दिवालिया हो जाता है तो RBI के पास बैकअप फंड मौजूद हो. इसके साथ ही गिरते रुपए को संभालने के लिए आरबीआई भारतीय मुद्रा बाजार में डॉलर को बेच सकता है. यदि किसी देश का विदेशी मुद्रा भंडार अच्छी स्थिति में है, तो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश की छवि भी निखरती है, क्योंकि उस स्थिति में व्यापारिक देश अपने भुगतान के बारे में सुनिश्चित हो सकते हैं.

कमी से कई नुकसान
विदेशी मुद्रा भंडार कम होने से कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है. इससे देश की अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल असर पड़ता है. इससे देश के लिए आयात बिल का भुगतान करना मुश्किल हो जाता है. इस भंडार के भरे रहने से संकट के समय भी देश एक आरामदायक स्थिति का अनुभव कर सकता है. सरकार और आरबीआई किसी भी बाहरी या अंदरुनी वित्तीय संकट से निपटने में सक्षम हो जाते हैं. RBI देश के विदेशी मुद्रा भंडार के कस्टोडियन या मैनेजर के रूप में कार्य करता है. उसे कार्य सरकार से साथ मिलकर तैयार किए गए पॉलिसी फ्रेमवर्क के अनुसार करना होता है. रिजव बैंक रुपए की स्थिति को मजबूत रखने के लिए विदेशी मुद्रा भंडार का इस्तेमाल करता है. एक रिपोर्ट के अनुसार, देश का 64% विदेशी मुद्रा भंडार विदेशों में ट्रेजरी बिल आदि के रूप में होता है और यह मुख्य रूप से अमेरिका में रखा होता है.


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