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भारत का पहला ऑफशोर डी-कमिशनिंग प्रोजेक्ट सफल, Shell-RIL-ONGC ने रचा इतिहास

पन्ना-मुक्ता और ताप्ती (PMT) प्रोजेक्ट की सफलता यह दर्शाती है कि जब कई हितधारक मिलकर काम करते हैं, तो पर्यावरण, सुरक्षा और दक्षता जैसे क्षेत्रों में उत्कृष्टता हासिल की जा सकती है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago

भारत के ऊर्जा क्षेत्र में एक नई उपलब्धि हासिल करते हुए, शेल (BGEPIL के माध्यम से), रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) और ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉरपोरेशन लिमिटेड (ONGC) की साझेदारी वाले पन्ना-मुक्त और ताप्ती (PMT) संयुक्त उद्यम ने देश का पहला ऑफशोर सुविधाओं को हटाने (डी-कमिशनिंग) वाला प्रोजेक्ट सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है. इस प्रोजेक्ट के तहत ताप्ती गैस फील्ड के मध्य और दक्षिण क्षेत्र की सभी सुविधाओं को सुरक्षित तरीके से हटाया गया.

38 कुओं का बंदीकरण और 5 प्लेटफॉर्म हटाए गए

इस प्रोजेक्ट में पांच वेलहेड प्लेटफॉर्म, संबंधित पाइपलाइनों को हटाना, किनारे पर डिस्मैंटलिंग यार्ड तक उनका लोड-इन और 38 कुओं का सुरक्षित बंदीकरण शामिल था. यह पूरी प्रक्रिया सरकार द्वारा अनुमोदित डी-कमिशनिंग योजना के अनुसार की गई. ताप्ती गैस क्षेत्रों में उत्पादन मार्च 2016 में बंद हो गया था. इस प्रोजेक्ट ने सुरक्षा और पर्यावरण मानकों के उच्चतम स्तर को बनाए रखते हुए नियामकीय ढांचे का सख्ती से पालन कर मिसाल पेश की. बता दें, दुनियाभर में ऑफशोर डी-कमिशनिंग एक जटिल प्रक्रिया होती है, जिसमें बदलते नियम, ठेकेदारों का विकासशील नेटवर्क और बाजार की अनिश्चितता जैसे कई पहलू होते हैं.

‘मेक इन इंडिया’ को मिला बढ़ावा

सरकार के ‘मेक इन इंडिया’ दृष्टिकोण के अनुरूप, PMT ज्वाइंट वेंचर ने प्रमुख ठेके भारतीय कंपनियों को सौंपे, ऑफशोर निष्पादन के लिए लार्सन एंड टुब्रो (L\&T) और ऑनशोर डिस्मैंटलिंग के लिए चौगुले शिपयार्ड (CLSPL) को जिम्मेदारी दी गई. रत्नागिरी में स्थित CLSPL के यार्ड में अब ऑनशोर डिस्मैंटलिंग जारी है, जिससे भारत की घरेलू क्षमताओं को और मजबूती मिली है.

भारत में ऑफशोर डी-कमिशनिंग का बना नया ढांचा

यह प्रोजेक्ट भारत के लिए केवल एक तकनीकी उपलब्धि नहीं है, बल्कि इसने देश के ऑफशोर डी-कमिशनिंग नियामकीय और संचालन ढांचे को भी आकार देने में अग्रणी भूमिका निभाई है. यह ढांचा पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय (MoPNG), डायरेक्टरेट जनरल ऑफ हाइड्रोकार्बन (DGH) और ऑयल इंडस्ट्री सेफ्टी डायरेक्टरेट (OISD) जैसे प्रमुख हितधारकों के सहयोग से विकसित किया गया है.

भागीदारों की प्रतिक्रियाएं

शेल अपस्ट्रीम इंडिया के महाप्रबंधक और BGEPIL के एमडी निपुण प्रधान ने कहा, “तप्ती ऑफशोर प्रोजेक्ट की सुरक्षित और सफल समाप्ति भारत के ऊर्जा क्षेत्र में एक ऐतिहासिक क्षण है. यह प्रोजेक्ट जिम्मेदार डी-कमिशनिंग का नया मानक स्थापित करता है, जिसे वैश्विक विशेषज्ञता, साझेदारी और सुरक्षा के प्रति अटूट प्रतिबद्धता से संभव बनाया गया है.”

रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड के ईएंडपी प्रेसिडेंट संजय बर्मन रॉय ने कहा, “PMT JV के माध्यम से किया गया यह ऑफशोर डी-कमिशनिंग भारत के ऊर्जा क्षेत्र के लिए एक बड़ा कदम है. इस प्रोजेक्ट ने ‘मेक एंड ब्रेक इन इंडिया’ की सोच को हकीकत में बदल दिया है.”

ONGC के प्रोडक्शन डायरेक्टर पंकज कुमार ने कहा, “इस तरह का पहला बड़ा ऑफशोर डी-कमिशनिंग प्रोजेक्ट ONGC की जिम्मेदार ऊर्जा नीतियों के प्रति प्रतिबद्धता दर्शाता है. इस जटिल प्रोजेक्ट के सफल निष्पादन में सटीक योजना और सुरक्षा पर विशेष ध्यान देना आवश्यक था.”

 


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