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भारत का बड़ा समुद्री दांव: ₹51,383 करोड़ निवेश से शिपिंग सेक्टर को नई ताकत
सरकार का लक्ष्य 2030 तक भारत की वैश्विक सीफेरर हिस्सेदारी को 20% तक पहुंचाना है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 hours ago
भारत ने समुद्री क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए ₹51,383 करोड़ के निवेश की योजना घोषित की है. इस योजना के तहत वित्त वर्ष 2026–27 में 62 नए जहाज शामिल किए जाएंगे, जिससे देश की शिपिंग क्षमता में बड़ा विस्तार होगा. यह घोषणा केंद्रीय बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्री सरबनंदा सोनोवल ने नई दिल्ली में एक उच्च स्तरीय बैठक के दौरान की.
आत्मनिर्भर शिपिंग कार्यक्रम को गति
सरकार का यह कदम “आत्मनिर्भर शिपिंग कार्यक्रम” के तहत उठाया गया है, जिसका उद्देश्य भारत की समुद्री निर्भरता को कम करना और घरेलू शिपिंग क्षमता को मजबूत करना है. इस योजना से लगभग 2.85 मिलियन ग्रॉस टन (GT) अतिरिक्त क्षमता जुड़ने की उम्मीद है, जिससे भारत का शिपिंग इकोसिस्टम और मजबूत होगा.
किन जहाजों पर होगा निवेश
इस विस्तार योजना में कई प्रकार के जहाज जैसे कंटेनर शिप, एलपीजी कैरियर, कच्चे तेल के टैंकर, ग्रीन टग्स और ड्रेजिंग वेसल्स शामिल हैं. सरकार का फोकस ऊर्जा परिवहन और वैश्विक व्यापार के लिए जरूरी जहाजों की क्षमता बढ़ाने पर है.
भारतीय शिपिंग कॉर्पोरेशन की बड़ी भूमिका
शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (SCI) इस योजना में अहम भूमिका निभा रही है. तेल सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों के साथ मिलकर SCI 59 जहाजों की खरीद की योजना पर काम कर रही है. इसके अलावा, कंपनी को विशेष रूप से अमोनिया परिवहन के लिए जहाज बनाने की दिशा में भी तैयार किया जा रहा है.
भारत की शिपिंग क्षमता में रिकॉर्ड वृद्धि
वित्त वर्ष 2026 में भारत की कुल शिपिंग क्षमता बढ़कर 142 मिलियन ग्रॉस टन तक पहुंच गई है. इस वर्ष 92 नए जहाज जोड़े गए, जो हाल के वर्षों में सबसे बड़ी वार्षिक वृद्धि में से एक है.
बंदरगाहों और ढांचे में तेज निवेश
वित्त वर्ष 2025–26 में भारत के प्रमुख बंदरगाहों ने 915.17 मिलियन टन कार्गो हैंडल किया, जो लक्ष्य से अधिक है. कार्गो में 7.06% की वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई, जो समुद्री व्यापार की मजबूत रिकवरी को दर्शाती है. पूंजीगत व्यय भी बढ़कर ₹14,953 करोड़ पहुंच गया, जबकि पिछले वर्ष यह ₹9,708 करोड़ था.
सरकार का नीति फोकस
सरकार ने सभी संबंधित विभागों को एक विस्तृत व्हाइट पेपर तैयार करने का निर्देश दिया है, जिसमें मौजूदा कमियां, लक्ष्य और समयबद्ध रोडमैप शामिल होगा. इस प्रक्रिया में कई मंत्रालय शामिल होंगे, जिनमें वाणिज्य, पेट्रोलियम, रसायन और शिपिंग विभाग प्रमुख हैं.
वैश्विक समुद्री जोखिम और रणनीति
बैठक में वैश्विक व्यापार मार्गों में बढ़ते जोखिमों, खासकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे क्षेत्रों की स्थिति पर भी चर्चा हुई. सरकार ने ऊर्जा आपूर्ति और व्यापारिक कार्गो की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए क्षमता विस्तार को जरूरी बताया.
भारत की समुद्री ताकत
भारत के पास 11,098 किलोमीटर लंबी तटरेखा, 111 राष्ट्रीय जलमार्ग और 12 प्रमुख बंदरगाह हैं. इसके अलावा, भारत वैश्विक स्तर पर शीर्ष तीन समुद्री श्रमिक आपूर्तिकर्ता देशों में शामिल है, जहां लगभग 12% वैश्विक सीफेरर्स भारतीय हैं.
सरकार का लक्ष्य 2030 तक भारत की वैश्विक सीफेरर हिस्सेदारी को 20% तक पहुंचाना है. बढ़ते निवेश, नए जहाजों और नीति समन्वय के साथ भारत अपने समुद्री क्षेत्र को अधिक आत्मनिर्भर और वैश्विक प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है.
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