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RBI का बड़ा फैसला: छोटी NBFCs को राहत, ₹1,000 करोड़ से कम एसेट पर पंजीकरण से सशर्त छूट

RBI ने मौजूदा पात्र NBFCs को 31 दिसंबर 2026 तक अपना पंजीकरण रद्द कराने के लिए आवेदन करने का अवसर दिया है. यह आवेदन RBI के ‘प्रवाह’ पोर्टल के माध्यम से करना होगा. नए नियम 1 जुलाई 2026 से प्रभावी होंगे.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 4 months ago

छोटी गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFCs) को राहत देते हुए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने नया नियामकीय ढांचा पेश किया है. इसके तहत सीमित आकार और सीमित गतिविधियों वाली कंपनियों को पंजीकरण से छूट दी जाएगी, हालांकि इसके साथ सख्त शर्तें और अनुपालन नियम भी लागू रहेंगे.

छोटी NBFCs के लिए नई राहत

RBI द्वारा जारी अंतिम दिशानिर्देशों के अनुसार, वे NBFCs जिनकी कुल परिसंपत्ति ₹1,000 करोड़ से कम है, जो सार्वजनिक जमा (public funds) का उपयोग नहीं करतीं और जिनका ग्राहकों से सीधा संपर्क (user interface) नहीं है, उन्हें पंजीकरण की अनिवार्यता से छूट मिलेगी. ऐसी कंपनियों को ‘गैर-पंजीकृत टाइप 1 NBFC’ की श्रेणी में रखा जाएगा.

शर्तों के साथ मिलेगी छूट

हालांकि यह छूट पूरी तरह बिना शर्त नहीं है. संबंधित कंपनियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि वे भविष्य में भी सार्वजनिक धन या ग्राहकों से सीधे संपर्क में नहीं आएंगी. इसके लिए कंपनी के बोर्ड को औपचारिक प्रस्ताव पारित करना होगा और वैधानिक ऑडिटर को भी इसकी पुष्टि करनी होगी.

31 दिसंबर 2026 तक आवेदन का मौका

RBI ने मौजूदा पात्र NBFCs को 31 दिसंबर 2026 तक अपना पंजीकरण रद्द कराने के लिए आवेदन करने का अवसर दिया है. यह आवेदन RBI के ‘प्रवाह’ पोर्टल के माध्यम से करना होगा. नए नियम 1 जुलाई 2026 से प्रभावी होंगे.

आवेदन के लिए जरूरी दस्तावेज

पंजीकरण रद्द कराने के लिए कंपनियों को पिछले तीन वर्षों के ऑडिटेड वित्तीय विवरण, सार्वजनिक निधि और ग्राहक संपर्क की अनुपस्थिति का प्रमाण पत्र तथा भविष्य में इन शर्तों का पालन करने का बोर्ड संकल्प प्रस्तुत करना होगा.

RBI के पास रहेगा अंतिम अधिकार

RBI ने स्पष्ट किया है कि वह किसी भी आवेदन को अस्वीकार करने का अधिकार रखता है, यदि उसे लगे कि कंपनी वास्तव में इस श्रेणी के मानकों पर खरी नहीं उतरती. साथ ही ₹1,000 करोड़ या उससे अधिक परिसंपत्ति वाली NBFCs को अनिवार्य रूप से पंजीकरण कराना होगा और वे नियामकीय दायरे में रहेंगी.

समूह कंपनियों पर भी सख्ती

अगर किसी समूह की कई NBFCs की कुल परिसंपत्ति ₹1,000 करोड़ से अधिक है, तो सभी संस्थाओं के लिए पंजीकरण अनिवार्य होगा. RBI ने यह कदम नियामकीय खामियों का फायदा उठाने से रोकने के लिए उठाया है.

नियमों को और किया सख्त

RBI ने यह भी स्पष्ट किया है कि सार्वजनिक निधियों तक परोक्ष पहुंच (जैसे समूह कंपनियों के जरिए) को भी सार्वजनिक निधि ही माना जाएगा. इसके अलावा ऑडिटरों को अधिक जिम्मेदारी दी गई है और किसी भी उल्लंघन की स्थिति में उन्हें सीधे RBI को रिपोर्ट करना होगा.

विदेशी निवेश पर भी शर्तें

गैर-पंजीकृत टाइप 1 NBFCs यदि विदेश में वित्तीय सेवाओं में निवेश करना चाहती हैं, तो उन्हें पहले RBI से पंजीकरण और पूर्व स्वीकृति लेनी होगी. इसके बाद ही वे मौजूदा विदेशी निवेश नियमों के तहत आगे बढ़ सकेंगी.

 


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