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केमिकल सेक्टर में FY27 के दौरान तेज उतार-चढ़ाव की आशंका, कीमतों में भारी अस्थिरता बनी रहेगी: Ind-Ra

केमिकल सेक्टर में FY27 के दौरान स्थिर लेकिन अस्थिर (volatile) ग्रोथ देखने को मिल सकती है. कंपनियों के लिए मजबूत लिक्विडिटी और बेहतर वर्किंग कैपिटल मैनेजमेंट ही सबसे बड़ा सुरक्षा कवच साबित होगा.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 4 months ago

इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च (Ind-Ra) ने वित्त वर्ष 2027 के लिए केमिकल सेक्टर को लेकर सतर्क रुख बनाए रखा है. एजेंसी के मुताबिक भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे माल की ऊंची कीमतें और सप्लाई चेन में बदलाव के चलते इस सेक्टर में तेज उतार-चढ़ाव (volatility) देखने को मिल सकता है, हालांकि धीरे-धीरे मुनाफे में सुधार की उम्मीद भी बनी हुई है.

केमिकल सेक्टर पर ‘न्यूट्रल आउटलुक’ बरकरार

Ind-Ra ने पूरे केमिकल सेक्टर पर न्यूट्रल आउटलुक और FY27 के लिए स्थिर क्रेडिट रेटिंग दृष्टिकोण बनाए रखा है. एजेंसी का कहना है कि सेक्टर में रिकवरी जारी रहेगी, लेकिन इसकी गति पिछली रिकवरी साइकल की तुलना में धीमी होगी.

कीमतों में तेजी के बाद अब अस्थिरता

मध्य-पूर्व में भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने के बाद केमिकल कीमतों में 40% से 50% तक की तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई थी. हालांकि अप्रैल 2026 तक इनमें 5% से 10% की गिरावट आई, लेकिन कीमतें अब भी ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं.

मुनाफे पर दबाव, मार्जिन स्थिर लेकिन सीमित

एजेंसी के अनुसार सेक्टर के मार्जिन 13% से 15% के बीच रह सकते हैं, जो ऐतिहासिक औसत से कम है. अलग-अलग उत्पादों में प्रदर्शन भी काफी अलग रहेगा, जिससे कंपनियों के नतीजों में असमानता देखने को मिलेगी.

ग्लोबल सप्लाई और ओवरकैपेसिटी का असर

Ind-Ra ने चेतावनी दी है कि चीन में लगातार ओवरकैपेसिटी और बढ़ती प्रतिस्पर्धा भारतीय केमिकल सेक्टर के लिए संरचनात्मक जोखिम बनी रहेगी. हालांकि अमेरिका द्वारा टैरिफ में राहत से भारतीय एक्सपोर्टर्स की प्रतिस्पर्धा बढ़ी है.

घरेलू मांग मजबूत बनी हुई

भारत में केमिकल्स की घरेलू मांग अभी भी मजबूत बनी हुई है, खासकर कंजम्पशन-ड्रिवन सेक्टर्स से सपोर्ट मिल रहा है. हालांकि FY27 की शुरुआत में कुछ क्षेत्रों में डिमांड टेम्पररी तौर पर कमजोर रह सकती है.

अमेरिका के बाजार में भारतीय केमिकल्स की स्थिति बेहतर हुई है, जहां देश का करीब 15% निर्यात जाता है. टैरिफ में बदलाव के बाद भारतीय कंपनियों को कॉस्ट एडवांटेज मिला है, जिससे एक्सपोर्ट मार्जिन में सुधार हुआ है.

वर्किंग कैपिटल और लिक्विडिटी सबसे बड़ा रिस्क

Ind-Ra ने कहा है कि FY27 में लिक्विडिटी मैनेजमेंट सबसे अहम फैक्टर होगा.

- कच्चे माल की ऊंची कीमतें
- बढ़ता इन्वेंटरी स्तर
- लंबा सप्लाई साइकल

इन सभी कारणों से वर्किंग कैपिटल की जरूरत बढ़ सकती है.

कंपनियों की बैलेंस शीट स्थिति

लगभग 60% बड़ी केमिकल कंपनियों का नेट लेवरेज 2.5 गुना से नीचे है, जो स्थिर स्थिति को दर्शाता है. हालांकि करीब 20% कंपनियां एक्सपोर्ट एक्सपोजर और कैश फ्लो दबाव के कारण जोखिम में बनी हुई हैं.

Ind-Ra के मुताबिक FY27 में केमिकल सेक्टर की दिशा मुख्य रूप से भू-राजनीतिक स्थिरता, कच्चे तेल और फीडस्टॉक की कीमतें, चीन की सप्लाई स्ट्रेटजी और ग्लोबल डिमांड रिकवरी जैसे फैक्टर्स पर निर्भर करेगी.


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