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भारतीय MSMEs में तेजी, रोजगार और नवाचार में उछाल: CPA ऑस्ट्रेलिया

CPA ऑस्ट्रेलिया सर्वे ते अनुसार भारत का लघु व्यवसाय क्षेत्र न केवल तेजी से पुनरुत्थान कर रहा है, बल्कि नवाचार, निर्यात और डिजिटल तकनीकों को अपनाने में भी अग्रणी भूमिका निभा रहा है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago

भारत का लघु व्यवसाय क्षेत्र एशिया-प्रशांत क्षेत्र में सबसे सक्रिय और आशावादी क्षेत्रों में से एक बनकर उभरा है. यह खुलासा दुनिया की प्रमुख लेखा संस्थाओं में से एक CPA ऑस्ट्रेलिया द्वारा किए गए 16वें एशिया-प्रशांत लघु व्यवसाय सर्वेक्षण में हुआ है. सर्वेक्षण के अनुसार, भारत के 78 प्रतिशत लघु व्यवसायों ने 2024 में विकास दर्ज किया, जो कोविड महामारी के बाद भारत की मजबूत आर्थिक रिकवरी को दर्शाता है.

डिजिटल बदलाव और नवाचार ने बढ़ाया आत्मविश्वास

CPA ऑस्ट्रेलिया के सर्टिफाइड प्रैक्टिसिंग अकाउंटेंट प्रफुल्ल छाजेड़ ने बताया, “यह सकारात्मक गति जीवंत व्यापार वातावरण, नवाचार पर जोर और तेजी से हो रहे डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन का परिणाम है” सर्वेक्षण के अनुसार, 86 प्रतिशत लघु व्यवसाय इस वर्ष वृद्धि की उम्मीद कर रहे हैं, जबकि 64 प्रतिशत व्यवसायों को उम्मीद है कि उनके निर्यात में इजाफा होगा, जो अन्य एशिया-प्रशांत देशों की तुलना में अधिक है.

MSMEs बने भारत की अर्थव्यवस्था का इंजन

छाजेड़ ने कहा, “भारत के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSMEs) बदलते आर्थिक माहौल में बेहतरीन प्रदर्शन कर रहे हैं. इनका तकनीक और नवाचार को अपनाने का उत्साह तथा नए बाज़ारों की खोज, इन्हें भारत की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था का अहम स्तंभ बनाता है”

उन्होंने बताया कि सकारात्मक माहौल के पीछे घरेलू और वैश्विक दोनों ही कारण हैं. देश में बेहतर इंटरनेट कनेक्टिविटी, तकनीकी प्रगति और सरकार की MSME-हितैषी नीतियों ने लघु व्यवसायों के लिए अनुकूल माहौल बनाया है.

वैश्विक मांग और सरकारी योजनाओं ने बढ़ाया निर्यात

वैश्विक स्तर पर भारतीय उत्पादों और सेवाओं की मांग में तेजी से MSMEs को निर्यात बढ़ाने के लिए प्रोत्साहन मिला है. साथ ही, सरकार की वित्तीय सहायता योजनाएं और निर्यात को बढ़ावा देने वाली नीतियां भी इस विस्तार में मददगार रही हैं.

बढ़ती लागत बनी चुनौती

हालांकि, बढ़ती लागत MSMEs के लिए एक बड़ी चुनौती रही. 2024 में 40 प्रतिशत लघु व्यवसायों ने इसे अपनी सबसे बड़ी परेशानी बताया. 72 प्रतिशत व्यवसायों ने बाहरी फंडिंग की मांग की, जिनमें से 34 प्रतिशत ने इसका कारण लागत में बढ़ोतरी को बताया. इसके बावजूद, 43 प्रतिशत व्यवसायों ने कहा कि उन्हें फाइनेंस प्राप्त करना “आसान” या “बहुत आसान” रहा. यह प्रवृत्ति 2025 में भी जारी रहने की उम्मीद है, जिसमें 39 प्रतिशत को फंडिंग में कोई बाधा नहीं दिख रही.

सरकार ने 1 अप्रैल 2025 से MSME वर्गीकरण मानदंडों में बदलाव किए हैं. इसमें टर्नओवर और निवेश की सीमा बढ़ाई गई है, जिससे और अधिक उद्यमों को ब्याज सब्सिडी, बिना गारंटी ऋण और राज्य सरकार की योजनाओं का लाभ मिल सकेगा.

रोजगार के अवसरों में भारत सबसे आगे

भारत के लघु व्यवसायों ने 2024 में 46 प्रतिशत तक कर्मचारियों की संख्या बढ़ाई, जिससे वे एशिया-प्रशांत क्षेत्र के शीर्ष जॉब क्रिएटर्स बन गए. 2025 में यह आंकड़ा 64 प्रतिशत तक जाने की संभावना है, जो कि सर्वे औसत (45 प्रतिशत) से कहीं अधिक है. भारत में अधिकांश लघु व्यवसायों के स्वामी या नेता 40 वर्ष से कम आयु के हैं. युवा उद्यमी तेजी से बढ़ते व्यवसाय चला रहे हैं और नए रोजगार भी सृजित कर रहे हैं.

नवाचार और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर जोर

2025 में 78 प्रतिशत भारतीय लघु व्यवसाय किसी नई प्रक्रिया, उत्पाद या सेवा के माध्यम से नवाचार करने की योजना बना रहे हैं. 2024 में, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को मुख्य तकनीकी निवेश क्षेत्र के रूप में पहचानने वाले व्यवसायों की संख्या में तेज़ वृद्धि देखी गई. छाजेड़ ने कहा, “लघु व्यवसाय न सिर्फ नौकरियां पैदा करते हैं, बल्कि भावी उद्यमियों को भी तैयार करते हैं. आज के तकनीक-प्रेमी युवा डिजिटल युग में भारत की आर्थिक गति को बनाए रखने में अहम भूमिका निभा रहे हैं”

उन्होंने यह भी कहा कि व्यवसाय के शुरुआती चरणों में अनियमित आय और नकदी प्रवाह बड़ी समस्याएं होती हैं. ऐसे में लघु व्यवसायों को पेशेवर लेखाकारों और वित्तीय सलाहकारों की मदद लेनी चाहिए, ताकि वे आर्थिक जोखिमों का बेहतर प्रबंधन कर सकें.

सर्वे की पृष्ठभूमि

CPA ऑस्ट्रेलिया द्वारा किया गया यह वार्षिक सर्वेक्षण नवंबर और दिसंबर 2024 में किया गया, जिसमें 11 एशिया-प्रशांत देशों के 20 से कम कर्मचारियों वाले 4,236 लघु व्यवसायों से प्रतिक्रियाएं ली गईं. इनमें से 507 प्रतिक्रियाएं भारत से थीं.


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