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आशावाद में भारत टॉप 4 में कायम, महंगाई बनी सबसे बड़ी चिंता: रिपोर्ट

रिपोर्ट में भारत के प्रति 62 प्रतिशत आशावादी रुख; विशेषज्ञों ने मुद्रास्फीति, भू-राजनीतिक अशांति और नीतिगत बदलावों से भविष्य की चुनौतियों की ओर संकेत किया.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago

इप्सोस (Ipsos Global) द्वारा अप्रैल 2025 में किए गए 'व्हाट वरीज द वर्ल्ड' सर्वे में भारत ने एक बार फिर आशावाद (Optimism) के मामले में वैश्विक स्तर पर चौथा स्थान बरकरार रखा है. सर्वे के अनुसार, 62% भारतीय नागरिक मानते हैं कि देश सही दिशा में आगे बढ़ रहा है. यह आंकड़ा पिछले सर्वे की तरह ही बना हुआ है.

सर्वे में पाया गया कि वैश्विक दक्षिण (Global South) के देश, विशेषकर एशिया-पैसिफिक क्षेत्र जैसे सिंगापुर (85%), मलेशिया (70%), इंडोनेशिया (67%), भारत (62%) और थाईलैंड (55%) सबसे आशावादी बाजारों में शामिल रहे. वहीं, पेरू, दक्षिण कोरिया और जापान जैसे देशों में भविष्य को लेकर निराशा ज्यादा देखी गई.

महंगाई बनी प्रमुख चिंता

महंगाई ने इस बार भी वैश्विक और स्थानीय दोनों स्तरों पर सबसे बड़ी चिंता के रूप में स्थान बनाए रखा है. इप्सोस इंडिया के सीईओ अमित अडारकर ने कहा, “हमारी भौगोलिक स्थिति हमें यूक्रेन और गाजा जैसे युद्ध क्षेत्रों से दूर रखती है, जिससे भारत और अन्य वैश्विक दक्षिण के देश घरेलू खपत और अर्थव्यवस्था के दम पर आगे बढ़ रहे हैं. साथ ही, भारत की जनसांख्यिकीय लाभकारी स्थिति आर्थिक विकास में मददगार रही है.”

अडारकर ने यह भी स्पष्ट किया कि यह सर्वे ट्रंप प्रशासन द्वारा प्रस्तावित टैरिफ और पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले से पहले किया गया था. “इन घटनाओं के कारण नागरिकों में चिंता और भय की भावना बढ़ी है, जो इस सर्वे में परिलक्षित नहीं हो पाई है. अगर ये घटनाएं लंबे समय तक बनी रहती हैं, तो भारत की अर्थव्यवस्था पर इसका गहरा असर पड़ सकता है.”

भारतीयों और वैश्विक नागरिकों की शीर्ष चिंताएं

सर्वे के अनुसार भारत में प्रमुख चिंताएं: महंगाई, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार है. वहीं, वैश्विक नागरिकों की चिंताएं महंगाई, गरीबी और सामाजिक असमानता, अपराध और हिंसा है.  अडारकर ने कहा, “सरकारों को चाहिए कि वे स्थानीय समस्याओं पर ध्यान केंद्रित करें, ताकि नागरिकों को राहत मिल सके.”

सर्वे की पद्धति

इस सर्वेक्षण में 29 देशों के 25,219 वयस्कों को शामिल किया गया. भारत में करीब 2,200 नागरिकों से बातचीत की गई, जिनमें से 1,800 से आमने-सामने और 400 से ऑनलाइन बातचीत की गई. भारत में यह सैंपल शहरी क्षेत्रों के सामाजिक-आर्थिक वर्ग A, B और C के लोगों का प्रतिनिधित्व करता है. यह सर्वेक्षण मार्च 21 से अप्रैल 4, 2025 के बीच किया गया और इसमें शामिल अधिकांश देशों में 1,000 से अधिक उत्तरदाता थे. परिणामों को स्थानीय नियमों और विनियमों के अनुरूप प्रकाशित किया गया है.


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