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ग्रीन एनर्जी में भारत की बड़ी छलांग, पहली छमाही में 25% बढ़ी नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता
केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रल्हाद जोशी ने एक सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए बताया कि इस उपलब्धि में सबसे बड़ा योगदान सौर ऊर्जा क्षेत्र का रहा.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 hours ago
भारत ने स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है. वर्ष 2026 की पहली छमाही में देश की नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता में 25 फीसदी की रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की गई है. यह वृद्धि पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 30.6 गीगावाट अधिक है. इस वृद्धि में सबसे बड़ा योगदान सौर ऊर्जा का रहा, जिसकी क्षमता एक साल में 43 फीसदी बढ़ी है. इससे भारत का स्वच्छ ऊर्जा की ओर बढ़ता कदम और मजबूत हुआ है.
यह जानकारी केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रल्हाद जोशी ने एक सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए दी है. उन्होंने अपने एक्स हैंडल पर पोस्ट करके बताया है कि जनवरी से जून 2026 के बीच देश में 26.34 गीगावाट नई सौर ऊर्जा क्षमता जोड़ी गई, जिससे सौर ऊर्जा क्षमता में सालाना आधार पर 43 फीसदी की वृद्धि दर्ज हुई.
कुल बिजली क्षमता में 52% हिस्सेदारी
केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) के आंकड़ों के अनुसार, 30 जून 2026 तक देश की कुल अक्षय ऊर्जा क्षमता (बड़ी पनबिजली परियोजनाओं सहित) बढ़कर 288 गीगावाट पहुंच गई है. यह भारत की कुल स्थापित बिजली उत्पादन क्षमता का 52 फीसदी हिस्सा है.
इसमें सौर ऊर्जा की स्थापित क्षमता 162 गीगावाट और पवन ऊर्जा क्षमता 57 गीगावाट तक पहुंच चुकी है, जो देश के स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र की मजबूत प्रगति को दर्शाती है.
IEA ने भी की भारत की सराहना
अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) ने अपनी ताजा रिपोर्ट में भारत को दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते नवीकरणीय ऊर्जा बाजारों में शामिल किया है. रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2025 में भारत की नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता में करीब 60 फीसदी की सालाना वृद्धि दर्ज की गई, जो प्रमुख वैश्विक बाजारों में सबसे अधिक रही.
रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में भारत ने करीब 50 गीगावाट सौर पीवी (Solar PV) क्षमता स्थापित की, जो पिछले वर्ष की तुलना में दोगुनी है. इसी अवधि में पवन ऊर्जा क्षमता भी दोगुनी होकर 6 गीगावाट से अधिक हो गई.
अपतटीय पवन ऊर्जा अब भी चुनौती
हालांकि, IEA ने यह भी कहा कि भारत में अपतटीय (Offshore) पवन ऊर्जा परियोजनाओं की रफ्तार उम्मीद के मुताबिक नहीं बढ़ सकी. कई परियोजनाएं रद्द होने और उनमें देरी के कारण इस क्षेत्र में अपेक्षित प्रगति नहीं हो पाई है.
वैश्विक स्तर पर भी अपतटीय पवन ऊर्जा उद्योग कई चुनौतियों का सामना कर रहा है. IEA के अनुसार, अमेरिका सहित कई देशों में नीतिगत बदलाव, बढ़ती लागत, आपूर्ति श्रृंखला में बाधाओं और परियोजनाओं के रद्द होने के कारण डेवलपर्स अपने 2030 तक के उत्पादन लक्ष्यों में कटौती कर रहे हैं.
बिजली ग्रिड पर बढ़ रहा दबाव
नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता में तेज बढ़ोतरी के साथ भारत के बिजली ग्रिड पर दबाव भी बढ़ रहा है. हाल ही में प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (EAC-PM) के एक वर्किंग पेपर में कहा गया था कि तेजी से बढ़ती सौर ऊर्जा क्षमता के कारण ग्रिड प्रबंधन नई चुनौती बनता जा रहा है.
रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि ऊर्जा भंडारण (Energy Storage) क्षमता का तेजी से विस्तार किया जाए और बिजली की मांग व आपूर्ति के बेहतर संतुलन के लिए अतिरिक्त नीतिगत कदम उठाए जाएं, ताकि बढ़ती नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता का अधिकतम लाभ उठाया जा सके.
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