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भारत चीन-वियतनाम से सोलर ग्लास आयात पर एंटी-डंपिंग शुल्क, इस कंपनी के शेयर में उछाल
भारत सरकार द्वारा चीन और वियतनाम से सोलर ग्लास के आयात पर लगाए गए एंटी-डंपिंग शुल्क का उद्देश्य घरेलू उद्योगों को सस्ते विदेशी आयात से बचाना है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
भारत सरकार की ओर से चीन और वियतनाम से सोलर ग्लास के आयात पर एंटी-डंपिंग शुल्क लगाया गया है, जोकि घरेलू सोलर ग्लास कंपनियों के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है. आने वाले दिनों में इसका सबसे बड़ा फायदा बोरोसिल रिन्यूएबल्स लिमिटेड (Borosil Renewables Ltd) के शेयर में देखने को मिल सकता है. दरअसल, सोमवार को खबर लिखे जाने तक बोरोसिल का शेयर 2.39 प्रतिशत की तेजी के साथ 545.30 पर कारोबार करता दिखा. आइए जानते हैं आखिर भारत ने इन दो देशों पर ये शुल्क क्यों लगाया है?
क्यों लगाया गया एंटी-डंपिंग शुल्क?
भारत सरकार ने चीन और वियतनाम से आने वाले 'टेक्सचर्ड टफन्ड (टेम्पर्ड), कोटेड और अनकोटेड सोलर ग्लास' पर 570 से 664 अमेरिकी डॉलर प्रति टन का एंटी-डंपिंग शुल्क लगाने का निर्णय लिया है. यह शुल्क पांच वर्षों के लिए प्रभावी रहेगा और इसका उद्देश्य सस्ते आयात से घरेलू निर्माताओं को सुरक्षा प्रदान करना है. यह ग्लास सोलर पैनलों में उपयोग होता है और इसे विभिन्न नामों से जाना जाता है, जैसे लो आयरन सोलर ग्लास, सोलर पीवी ग्लास, हाई ट्रांसमिशन फोटोवोल्टिक ग्लास आदि.
जांच और निर्णय का आधार
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार वाणिज्य मंत्रालय की जांच शाखा व्यापार उपचार महानिदेशालय (DGTR) ने घरेलू उद्योग, विशेष रूप से बोरोसिल रिन्यूएबल्स लिमिटेड की शिकायत पर इस मुद्दे की जांच की थी. जांच में पाया गया कि चीन और वियतनाम से कम कीमत पर होने वाला आयात भारतीय बाजार को नुकसान पहुँचा सकता है, जिसके बाद यह सिफारिश की गई.
बोरोसिल रिन्यूएबल्स की प्रतिक्रिया
बीएसई को दी गई फाइलिंग में बोरोसिल ने इस निर्णय की सराहना की और कहा कि इससे घरेलू स्तर पर सोलर ग्लास के निर्माण को बढ़ावा मिलेगा. कंपनी ने उम्मीद जताई कि इससे ‘मेक इन इंडिया’ पहल को बल मिलेगा और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक और कदम साबित होगा.
निष्पक्ष व्यापार और वैश्विक मानदंड
भारत का यह कदम वर्ल्ड ट्रेड ऑर्गनाइजेशन (WTO) के नियमों के अनुरूप है. WTO के सदस्य देश, जैसे भारत और चीन, एंटी-डंपिंग शुल्क जैसे उपायों के जरिये अपने घरेलू उद्योगों की रक्षा कर सकते हैं जब उन्हें सस्ते और हानिकारक आयात से खतरा महसूस होता है. यह शुल्क घरेलू और विदेशी उत्पादकों के बीच प्रतिस्पर्धा को संतुलित करने के लिए लगाया गया है.
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