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लगातार 5वें सप्ताह भी मिली खुशखबरी, फिर बढ़ गया हमारा विदेशी मुद्रा भंडार

विदेशी मुद्रा भंडार के मोर्चे पर भारत को लगातार खुशखबरी मिल रही है. पांचवें सप्ताह भी इस भंडार में बढ़ोत्तरी दर्ज हुई है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago

हमारा विदेशी मुद्रा भंडार फिर बढ़ गया है. यह लगातार पांचवां सप्ताह है, जब भारत के इस भंडार में इजाफा हुआ है.  13 सितंबर को समाप्त सप्ताह के दौरान भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में 223 मिलियन डॉलर की बढ़ोतरी हुई. अब यह भंडार बढ़कर 689.45 अरब डॉलर की नई ऊंचाई पर पहुंच गया है.

इसमें आई गिरावट
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के आंकड़ों के मुताबिक, 13 सितंबर को समाप्त सप्ताह के दौरान भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में उछाल आया और यह 689.458 अरब डॉलर पर पहुंच गया है, जो कि अब तक का सर्वकालिक स्तर है. इस दौरान, भारत की विदेशी मुद्रा आस्तियां (Foreign Currency Asset) में कमी देखने को मिली है. 223 मिलियन की कमी के साथ यह भंडार घटकर 603.629 अरब डॉलर रह गया है. जबकि एक सप्ताह पहले इसमें 5.107 अरब डॉलर की की बढ़ोतरी हुई थी. बता दें कि कुल विदेशी मुद्रा भंडार में विदेशी मुद्रा आस्तियां या फॉरेन करेंसी असेट एक महत्वपूर्ण हिस्सा होता है.  

गोल्ड रिजर्व में बढ़ोत्तरी
हमारे सोने के भंडार में बढ़ोत्तरी हुई है. भारत का गोल्ड रिज़र्व 13 सितंबर 2024 को समाप्त सप्ताह के दौरान 899 मिलियन डॉलर की बढ़ोतरी के साथ 62.887 अरब डॉलर हो गया है. इस दौरान, भारत के स्पेशल ड्रॉइंग राइट या विशेष आहरण अधिकार (SDR) में कमी आई है. हमारा एसडीआर 516 मिलियन डॉलर घटकर 18.419 अरब डॉलर रह गया है. इसी सप्ताह अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के पास रखे हुए भारत के रिजर्व मुद्रा भंडार में भी 108 मिलियन डॉलर की कमी दर्ज हुई है.

देश की हेल्थ का मीटर  
अब चलिए यह भी जान लेते हैं कि विदेशी मुद्रा भंडार आखिर क्या होता है और इस भंडार का भरा रहना क्यों ज़रूरी है, विदेशी मुद्रा भंडार का पर्याप्त संख्या में होना हर देश के लिए महत्वपूर्ण है. इसे देश की हेल्थ का मीटर कहा जाए तो गलत नहीं होगा. इसमें विदेशी करेंसीज, गोल्ड रिजर्व, SDR, IMF के पास जमा राशि और ट्रेजरी बिल्स आदि आते हैं और इन्हें केंद्रीय बैंक या अन्य मौद्रिक संस्थाएं संभालती हैं. इन संस्थाओं का काम पेमेंट बैलेंस की निगरानी करना, मुद्रा की विदेशी विनिमय दर पर नज़र रखना और वित्तीय बाजार स्थिरता बनाए रखना है. विदेशी मुद्रा भंडार में दूसरे देशों के केंद्रीय बैंकों की ओर से जारी की जाने वाली मुद्राएं शामिल होती हैं. अधिकांश विदेशी मुद्रा भंडार में सबसे बड़ा भाग US डॉलर के रूप में होता है.

इसलिए है महत्वपूर्ण
किसी भी देश के लिए विदेशी मुद्रा भंडार काफी महत्वपूर्ण होता है और इसका इस्तेमाल देश की देनदारियों को पूरा करने के साथ ही कई कामों में किया जाता है. वैसे, दुनिया के अधिकतर देश अपना विदेशी मुद्रा भंडार डॉलर में रखना पसंद करते हैं, क्योंकि अधिकांश व्यापार डॉलर में ही होता है. लेकिन इसमें सीमित संख्या में ब्रिटिश पाउंड, यूरो और जापानी येन भी हो सकते हैं. विदेशी मुद्रा भंडार का सबसे पहला उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि यदि रुपया तेजी से नीचे गिरता है या पूरी तरह से दिवालिया हो जाता है तो RBI के पास बैकअप फंड मौजूद हो. इसके साथ ही गिरते रुपए को संभालने के लिए आरबीआई भारतीय मुद्रा बाजार में डॉलर को बेच सकता है. यदि किसी देश का विदेशी मुद्रा भंडार अच्छी स्थिति में है, तो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश की छवि भी निखरती है, क्योंकि उस स्थिति में व्यापारिक देश अपने भुगतान के बारे में सुनिश्चित हो सकते हैं.

कमी से कई नुकसान
विदेशी मुद्रा भंडार कम होने से कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है. इससे देश की अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल असर पड़ता है. इससे देश के लिए आयात बिल का भुगतान करना मुश्किल हो जाता है. इस भंडार के भरे रहने से संकट के समय भी देश एक आरामदायक स्थिति का अनुभव कर सकता है. सरकार और आरबीआई किसी भी बाहरी या अंदरुनी वित्तीय संकट से निपटने में सक्षम हो जाते हैं. RBI देश के विदेशी मुद्रा भंडार के कस्टोडियन या मैनेजर के रूप में कार्य करता है. उसे कार्य सरकार से साथ मिलकर तैयार किए गए पॉलिसी फ्रेमवर्क के अनुसार करना होता है. रिजव बैंक रुपए की स्थिति को मजबूत रखने के लिए विदेशी मुद्रा भंडार का इस्तेमाल करता है. एक रिपोर्ट के अनुसार, देश का 64% विदेशी मुद्रा भंडार विदेशों में ट्रेजरी बिल आदि के रूप में होता है और यह मुख्य रूप से अमेरिका में रखा होता है.


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