होम / बिजनेस / भारत और यूरोप के बीच FTA को लेकर बातचीत शुरू, इस पर बन सकती है सहमति!
भारत और यूरोप के बीच FTA को लेकर बातचीत शुरू, इस पर बन सकती है सहमति!
भारत और यूरोप एक बार फिर से मुक्त व्यापार समझौते या फ्री ट्रेड एग्रीमेंट को लेकर बातचीत कर रहे हैं. दिल्ली में यह बैठक आज से शुरू हो गई है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
भारत और यूरोप (EU) के बीच मुक्त व्यापार समझौते (Free Trade Agreement) पर आज यानी सोमवार से दिल्ली में 9वें दौर की बैठक शुरू हो गई है. इस बैठक में इंपोर्ट ड्यूटी कम करने और कार्बन टैक्स में राहत देने जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी. भारत और यूरोप पहले भी FTA को लेकर कई दौर की बातचीत कर चुके हैं.
ये हैं दोनों की मांगें
एक रिपोर्ट के अनुसार, यूरोप की मांग है कि भारत में व्हिस्की (Whiskey) पर इंपोर्ट ड्यूटी को कम किया जाए. माना जा रहा है कि भारत अगले 10 सालों में इम्पोर्ट ड्यूटी को 150 फीसदी से कम करके 50 प्रतिशत करने पर सहमत हो सकता है. दूसरी तरफ, भारत kee मांग है कि इंडियन व्हिस्की पर मैच्योरटी पीरियड को घटाया जाये. दरअसल, यूरोप में तीन साल पुरानी होने पर ही व्हीस्की की मान्यता मिलती है. जबकि ब्रांडी को 1 साल पुरानी होने पर मान्यता है. भारत चाहता है कि इसमें बदलाव किया जाए. इनके अलावा भी इस बैठक में व्यापार से जुड़े कई मुद्दों पर चर्चा होगी.
क्या है फ्री ट्रेड एग्रीमेंट?
फ्री ट्रेड एग्रीमेंट दो या फिर इससे ज्यादा देशों के बीच उत्पादों और सेवाओं के आयात-निर्यात में आने वालीं रुकावटों को कम करने के लिए किया जाना वाले समझौता होता है. फ्री ट्रेड एग्रीमेंट में कोटा, टैरिफ, सब्सिडी या फिर ऐसे प्रतिबंधों को कम किया जाता है, जो सीमा पार वस्तुओं-सेवाओं को लाने- ले जाने को सीमित कर सकते हैं. जैसा कि इसका नाम है, फ्री ट्रेड एग्रीमेंट दोनों देशों के बीच मुक्त व्यापार की अनुमति देता है. इस एग्रीमेंट में सेवाएं, निवेश, सामान, बौद्धिक संपदा, प्रतिस्पर्धा, सरकारी खरीद और अन्य क्षेत्रों को शामिल किया जा सकता है. सीधे शब्दों में कहें तो ये एग्रीमेंट दोनों देशों के बीच व्यवसाय को बढ़ावा देने की राह में आने वालीं सभी बाधाओं को हटा देगा.
इन देशों से भी है FTA
भारत ने भूटान, नेपाल, थाईलैंड, सिंगापुर, जापान और मलेशिया आदि देशों से फ्री ट्रेड एग्रीमेंट किए हुए हैं. ब्रिटेन के साथ FTA को लेकर कई दौर की बातचीत हो चुकी है. भारत और ब्रिटेन के बीच व्यापार अधिकतम सर्विस सेक्टर पर निर्भर करता है, जो कि कुल ट्रेड का 70% हिस्सा है. भारत यूके का 12वां सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है. जबकि UK भारत का 7वां सबसे बड़ा निर्यातक देश है. ऐसे में दोनों देश इस एग्रीमेंट के जरिए व्यापार में आने वालीं परेशानियों को दूर करके आर्थिक विकास में तेजी लाना चाहते हैं. हालांकि, कुछ मुद्दों को लेकर पेंच फंसा हुआ है.
टैग्स