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IIT Bombay को मिला कॉरपोरेट वर्ल्ड का सबसे बड़ा दान, मोतीलाल ओसवाल ने दिए इतने करोड़
दान की गई रकम से मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विस मोतीलाल नॉलेज सेंटर की स्थापना आईआईटी बॉम्बे में करेगा. इसका एरिया 1 से 1.2 लाख वर्ग फुट में होगा.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
मोतीलाल ओसवाल फाउंडेशन अपने परोपकारी कार्यों के लिए अक्सर सुर्खियों में रहता है. हाल ही में फाउडेंशन ने कॉरपोरेट वर्ल्ड के सबसे बड़े दान का ऐलान किया है. फाइनेंशियल सेक्टर से जुड़ी जानकारियों को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाने और देश की प्रगति में अपना हाथ बटाने के लिए मोतीलाल ओसवाल फाउंडेशन और आईआईटी बॉम्बे ने हाथ मिलाया है. आईआईटी बॉम्बे के साथ मिलकर मोतीलाल ओसवाल को एक शानदार वर्ल्ड क्लास फाइनेंशियल इंफ्रास्ट्रक्चर स्थापित करने का मौका मिलेगा, जो आईआईटी जैसे संस्थान को और मजबूत बनाने में मदद करेगा. संस्थान में फाइनेंशियल इंफ्रास्ट्रक्चर को स्थापित करने के लिए फाउंडेशन ने 130 करोड़ रुपये दान देने का ऐलान किया है.
करीब 4000 करोड़ रुपये के दान का किया था ऐलान
इससे पहले कंपनी के दोनों प्रमोटर मोतीलाल ओसवाल और रामदेव अग्रवाल ने अपनी 5-5 फीसदी इक्विटी शेयर दान देने का ऐलान किया था. ऐसे में दोनों को मिलाकर यह 10 फीसदी शेयर बनते हैं. इन दोनों के कुल इक्विटी शेयरों की वैल्यू 4,000 करोड़ रुपये के आसपास है, जिसे अगले 10 सालों में दान दिया जाएगा. खास बात ये हैं कि फाउंडेशन द्वारा दान किए जाने वाला 130 करोड़ रुपये अब तक का कॉरपोरेट इतिहास के सबसे बड़े दानों में से एक है, जिसे किसी एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन को दिया जा रहा है.
मोतीलाल ओसवाल नॉलेज सेंटर की होगी स्थापना
गौरतलब है कि इन दान की गई रकम से मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विस मोतीलाल नॉलेज सेंटर की स्थापना आईआईटी बॉम्बे में करेगा. इसका एरिया 1 से 1.2 लाख वर्ग फुट में होगा. इसमें कई तरह के रिसर्च के कार्यों को पूरा किया जाएगा. इस नॉलेज सेंटर में वर्ल्ड क्लास सुविधाएं मिलेंगी और इसमें ग्लोबल टैलेंट को आगे आने का मौका मिलेगा.
IIT बॉम्बे के डायरेक्टर ने दी यह जानकारी
आईआईटी बॉम्बे के डायरेक्टर प्रोफेसर शिरीष बी केदारे ने इस दान के लिए मोतीलाल ओसवाल फाउंडेशन का आभार व्यक्त किया है. उन्होंने कहा कि इस रकम से हमें फाइनेंशियल समझ को बढ़ाने के लिए नॉलेज सेंटर खोलने में मदद मिलेगी. इससे हम अपने अगली पीढ़ी को वित्तीय ज्ञान देकर सशक्त बना सकेंगे. इसके साथ ही इसे सरकार के 'विकसित भारत' के विजन के प्रति एक मजबूत कदम के रूप में भी देखा जा रहा है.
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