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IIM A और IIM B दीक्षांत समारोहों में ‘इंटीग्रेटिव इंटेलिजेंस’ और ‘सोच-समझकर फैसले’ पर जोर
प्रमुख बिजनेस लीडर और ग्रैमी पुरस्कार विजेता संगीतकार चंद्रिका टंडन और एचडीएफसी लाइफ (HDFC Life) की मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ विभा पडालकर ने हाल ही में IIM A और IIM B के दीक्षांत समारोहों को संबोधित किया.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 hours ago
प्रमुख बिजनेस लीडर और ग्रैमी पुरस्कार विजेता संगीतकार चंद्रिका टंडन और एचडीएफसी लाइफ (HDFC Life) की मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ विभा पडालकर ने हाल ही में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट अहमदाबाद (IIM A) और इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट अहमदाबाद (IIM B) द्वारा आयोजित दीक्षांत समारोहों को संबोधित किया. उन्होंने छात्रों से जीवन और करियर में “इंटीग्रेटिव इंटेलिजेंस” अपनाने और “सोच-समझकर फैसले लेने” की अपील की.
इंटीग्रेटिव इंटेलिजेंस से बनेगा असली नेतृत्व
IIM A की 1975 बैच की पूर्व छात्रा चंद्रिका टंडन ने कहा, ‘इंटीग्रेटिव इंटेलिजेंस’ का मतलब है, “अंतर्दृष्टि, इरादा, आंतरिक शांति और प्रभाव”. उन्होंने छात्रों से कहा कि वे अपने दायरे से बाहर निकलें, रणनीतिक रूप से नए क्षेत्रों को समझें और आलोचनात्मक सोच विकसित करें.
उन्होंने आगे कहा, “किसी एक रास्ते पर अटककर मत रहिए, क्योंकि बड़े बदलाव सीधे रास्तों पर नहीं, बल्कि उनके संगम पर होते हैं. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के दौर में ‘इंटीग्रेटिव इंटेलिजेंस’ का मतलब है पूरी तरह इंसान बने रहना, और यही असली नेतृत्व को परिभाषित करेगा.”
संकरी सोच से बाहर निकलने की जरूरत
टंडन ने कहा कि आज अकादमिक दुनिया में अलग-अलग क्षेत्रों का मेल हो रहा है और पुराने पारंपरिक रास्ते खत्म हो रहे हैं. अगर आप अपने सीमित दायरे में ही फंसे रहेंगे, तो नए अवसरों को समझ नहीं पाएंगे. इनोवेशन अब अलग-अलग क्षेत्रों के मेल पर ही होगा. उन्होंने ‘इरादे’ की व्याख्या करते हुए कहा कि जब आप किसी रास्ते को चुनते हैं और उसके प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध होते हैं, वही असली इरादा होता है. यह आपको बिना सोचे-समझे जीने से निकालकर उद्देश्यपूर्ण जीवन की ओर ले जाता है.
सोच-समझकर फैसले लेने की सलाह
वहीं, IIM B के दीक्षांत समारोह में विभा पडालकर ने छात्रों से कहा कि जीवन के अगले चरण में प्रवेश करते समय तीन बातों पर ध्यान दें, पहला, भविष्य का अनुमान लगाने की क्षमता; दूसरा, रुककर सोचने का अनुशासन; और तीसरा, समझदारी से चुनाव करने की बुद्धिमत्ता.
उन्होंने कहा, “हर ‘हां’ के साथ कहीं न कहीं ‘ना’ भी जुड़ी होती है. समय के साथ आपकी जिंदगी सिर्फ इस बात से नहीं तय होगी कि आपने क्या चुना, बल्कि इससे भी कि आपने क्या नहीं चुना.”
व्यक्तिगत जीवन में भी संतुलन जरूरी
पडालकर ने छात्रों को सलाह दी कि वे ऐसे लोगों को चुनें जो उन्हें आगे बढ़ने में मदद करें और जीवन को बेहतर बनाएं. उन्होंने कहा, “अगर सफलता उन लोगों की कीमत पर मिलती है जो आपके लिए महत्वपूर्ण हैं, तो वह सफलता शायद मायने नहीं रखती,” उन्होंने कहा कि जीवन में कोई एक सही रास्ता नहीं होता. इसमें ठहराव, मोड़ और संदेह के पल आते हैं, और यही जीवन का हिस्सा हैं, असफलता नहीं.
पडालकर ने कहा कि जीवन हजारों छोटे-छोटे फैसलों से बनता है, जहां महत्वाकांक्षा और धैर्य, गति और ठहराव के बीच संतुलन बनाना जरूरी होता है.
(यह शीर्ष बिजनेस और इंजीनियरिंग संस्थानों के दीक्षांत भाषणों पर आधारित श्रृंखला की पहली कड़ी है.)
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