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डेट सिक्योरिटीज में जोखिम पहचानना होगा आसान, सेबी ने पेश किया नया क्रेडिट रिस्क-ओ-मीटर

सेबी के नए फ्रेमवर्क में डेट सिक्योरिटीज के क्रेडिट जोखिम को छह श्रेणियों में बांटा जाएगा. इसमें हरे रंग से सबसे कम जोखिम और लाल रंग से सबसे ज्यादा जोखिम का संकेत मिलेगा.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 hour ago

डेट सिक्योरिटीज में निवेश करने वालों के लिए जोखिम को समझना आसान बनाने के उद्देश्य से भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने नया क्रेडिट रिस्क-ओ-मीटर पेश किया है. इसके तहत रंगों के जरिए बताया जाएगा कि किसी डेट सिक्योरिटी में क्रेडिट जोखिम कितना है. यह व्यवस्था निवेशकों को अलग-अलग रेटिंग वाली सिक्योरिटीज के जोखिम को आसानी से समझने में मदद करेगी.

सेबी ने 7 अक्टूबर को जारी सर्कुलर में कंपनियों और ऑनलाइन बॉन्ड प्लेटफॉर्म संचालकों को क्रेडिट रिस्क-ओ-मीटर की जानकारी निवेश से जुड़े दस्तावेजों, प्रॉस्पेक्टस, प्राइवेट प्लेसमेंट दस्तावेजों, मेमोरैंडम और विज्ञापनों में देने का निर्देश दिया है. इसे संबंधित संस्थाओं की वेबसाइट और मोबाइल प्लेटफॉर्म पर भी प्रदर्शित करना होगा. ये नियम सर्कुलर जारी होने के 45 दिन बाद लागू होंगे.

किन डेट सिक्योरिटीज पर लागू होंगे नए नियम?

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सेबी का नया फ्रेमवर्क उन सभी डेट सिक्योरिटीज पर लागू होगा, जो शेयर बाजार में सूचीबद्ध हैं या सूचीबद्ध होने वाली हैं. इनमें नॉन-कन्वर्टिबल सिक्योरिटीज (NCS), कमर्शियल पेपर (CP), सिक्योरिटाइज्ड डेट इंस्ट्रूमेंट्स (SDI), सिक्योरिटी रिसीट्स (SR) और स्ट्रक्चर्ड डेट या मार्केट-लिंक्ड डिबेंचर्स (MLD) शामिल हैं. यह व्यवस्था पब्लिक इश्यू और प्राइवेट प्लेसमेंट, दोनों तरह से जारी की जाने वाली संबंधित सिक्योरिटीज पर लागू होगी.

छह श्रेणियों में बंटेगा क्रेडिट जोखिम

नए क्रेडिट रिस्क-ओ-मीटर में मौजूदा क्रेडिट रेटिंग को छह जोखिम श्रेणियों में बांटा गया है. इसमें AAA से लेकर D तक की रेटिंग शामिल हैं. हर श्रेणी के लिए अलग रंग निर्धारित होगा, जिससे निवेशक जोखिम का स्तर आसानी से पहचान सकेंगे.

1. सबसे कम क्रेडिट जोखिम: AAA रेटिंग वाली सिक्योरिटीज को इस श्रेणी में रखा जाएगा. इसे हरे रंग से दर्शाया जाएगा.

2. बहुत कम क्रेडिट जोखिम: AA+, AA और AA- रेटिंग वाली सिक्योरिटीज इस श्रेणी में आएंगी.

3. कम क्रेडिट जोखिम: A+, A और A- रेटिंग वाली सिक्योरिटीज को इसमें रखा जाएगा.

4. मध्यम क्रेडिट जोखिम: BBB+, BBB और BBB- रेटिंग वाली सिक्योरिटीज इस श्रेणी में होंगी.

5. डिफॉल्ट का मध्यम जोखिम: BB+, BB और BB- रेटिंग वाली सिक्योरिटीज को इस श्रेणी में रखा जाएगा.

6. डिफॉल्ट का उच्च से बहुत अधिक जोखिम: B+, B, B-, C+, C, C- और D रेटिंग वाली सिक्योरिटीज इस श्रेणी में आएंगी. सबसे अधिक जोखिम को लाल रंग से दिखाया जाएगा.

7. कम अवधि वाले डेट इंस्ट्रूमेंट्स के लिए भी इसी तरह की व्यवस्था होगी. इसमें A1+, A1 और A2 जैसी शॉर्ट-टर्म रेटिंग को संबंधित जोखिम श्रेणियों से जोड़ा जाएगा.

सबसे कम क्रेडिट रेटिंग के आधार पर तय होगा जोखिम

सेबी के निर्देशों के अनुसार, क्रेडिट रिस्क-ओ-मीटर के साथ क्रेडिट रेटिंग एजेंसी (CRA) का नाम और संबंधित डेट सिक्योरिटी की वास्तविक क्रेडिट रेटिंग भी लिखनी होगी. यदि किसी डेट सिक्योरिटी को एक से अधिक क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों ने रेटिंग दी है, तो क्रेडिट रिस्क-ओ-मीटर में सबसे कम रेटिंग के आधार पर जोखिम दिखाया जाएगा. हालांकि, अन्य एजेंसियों की रेटिंग की जानकारी भी दी जा सकती है.

बिना गारंटी वाले डेट इंस्ट्रूमेंट्स के लिए ‘अनसिक्योर्ड’ यानी बिना गारंटी वाला शब्द गहरे लाल रंग में मोटे अक्षरों में दिखाना अनिवार्य होगा. इसका उद्देश्य निवेशकों को यह स्पष्ट जानकारी देना है कि संबंधित निवेश के लिए कोई गारंटी उपलब्ध नहीं है.

ऑनलाइन बॉन्ड प्लेटफॉर्म को 24 घंटे में करना होगा अपडेट

सेबी ने ऑनलाइन बॉन्ड प्लेटफॉर्म ऑपरेटर्स (OBPPs) के लिए भी निर्देश जारी किए हैं. अब नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड (NSDL) या सेंट्रल डिपॉजिटरी सर्विसेज (इंडिया) लिमिटेड (CDSL) से रेटिंग में बदलाव की सूचना मिलने के 24 घंटे के भीतर प्लेटफॉर्म को क्रेडिट रिस्क-ओ-मीटर अपडेट करना होगा.

ऑनलाइन बॉन्ड प्लेटफॉर्म अपनी ओर से जोखिम की श्रेणी में बदलाव नहीं कर सकेंगे. उन्हें रेटिंग में हुए बदलाव और क्रेडिट रिस्क-ओ-मीटर को अपडेट करने का पूरा रिकॉर्ड भी रखना होगा.

क्या क्रेडिट रिस्क-ओ-मीटर निवेश की गारंटी है?

सेबी ने स्पष्ट किया है कि क्रेडिट रिस्क-ओ-मीटर केवल डेट सिक्योरिटी से जुड़े क्रेडिट जोखिम को दर्शाता है. इसे निवेश की सलाह या किसी सिक्योरिटी को खरीदने की सिफारिश नहीं माना जाना चाहिए. डेट सिक्योरिटीज में निवेश करते समय क्रेडिट जोखिम के अलावा बाजार में उतार-चढ़ाव और जरूरत पड़ने पर निवेश को आसानी से बेच पाने यानी लिक्विडिटी से जुड़े जोखिम भी हो सकते हैं. इसलिए केवल रंग या क्रेडिट रेटिंग देखकर निवेश का फैसला करना पर्याप्त नहीं है. निवेशकों को संबंधित सिक्योरिटी की शर्तों और अन्य जोखिमों को भी समझना चाहिए.
 


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