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प्याज, तेल और चावल की महंगाई से बिगड़ा रसोई का बजट, वेज थाली 10% महंगी: रिपोर्ट
क्रिसिल की रिपोर्ट के मुताबिक, सितंबर में शाकाहारी थाली की लागत सालाना आधार पर 10% बढ़कर ₹30.8 हो गई, जबकि मांसाहारी थाली 6% महंगी होकर ₹59.5 पर पहुंच गई.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 hour ago
त्योहारी सीजन के बीच आम लोगों की रसोई का खर्च बढ़ गया है. सितंबर में घर पर खाना बनाना पिछले साल के मुकाबले महंगा रहा. रेटिंग एजेंसी क्रिसिल की ताजा ‘रोटी राइस रेट’ रिपोर्ट के अनुसार, सितंबर में शाकाहारी थाली की लागत सालाना आधार पर 10% बढ़ी, जबकि मांसाहारी थाली तैयार करने का खर्च 6% बढ़ गया. सब्जियों और जरूरी खाद्य पदार्थों की कीमतों में तेजी का असर घरेलू बजट पर दिखाई दे रहा है.
पिछले साल सितंबर में एक शाकाहारी थाली तैयार करने की लागत ₹28.1 थी, जो इस साल बढ़कर ₹30.8 हो गई. इसी तरह मांसाहारी थाली की लागत ₹56 से बढ़कर ₹59.5 पहुंच गई. मासिक आधार पर भी महंगाई का दबाव बढ़ा है. अगस्त के मुकाबले सितंबर में शाकाहारी थाली 4% और मांसाहारी थाली 3% महंगी हुई.
प्याज की कीमतों में 89% का उछाल
रसोई का खर्च बढ़ने की सबसे बड़ी वजह प्याज की कीमतों में आई तेजी है. क्रिसिल की रिपोर्ट के मुताबिक, सितंबर में प्याज के दाम सालाना आधार पर 89% बढ़ गए. पिछले साल सितंबर में प्याज करीब ₹28 प्रति किलो मिल रहा था, जबकि इस साल इसकी कीमत बढ़कर ₹53 प्रति किलो हो गई.
इस तेजी के पीछे उत्पादन और आपूर्ति से जुड़ी कई वजहें हैं. रबी सीजन में प्याज का उत्पादन 5-6% घटने से पुराने स्टॉक में कमी आई. इसके अलावा, इस साल जून में सामान्य से 40% कम बारिश हुई. कम बारिश के कारण खरीफ प्याज की बुआई में देरी हुई और मंडियों में नई फसल की आवक प्रभावित हुई. रिपोर्ट के मुताबिक, केवल एक महीने में प्याज की कीमतों में 34% की बढ़ोतरी दर्ज की गई.
खाद्य तेल, चावल और एलपीजी ने भी बढ़ाया खर्च
रसोई के बजट पर दबाव केवल प्याज तक सीमित नहीं है. खाद्य तेल, चावल और घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी ने भी लोगों का खर्च बढ़ाया है. रिपोर्ट के अनुसार, खाद्य तेल की कीमतें सालाना आधार पर 12% बढ़ीं. केंद्र सरकार की ओर से पाम ऑयल पर बेसिक कस्टम ड्यूटी घटाए जाने के बावजूद कीमतों में राहत नहीं मिली. वैश्विक तनाव और अल नीनो के प्रभाव से अंतरराष्ट्रीय बाजार में उत्पादन प्रभावित होने के कारण घरेलू कीमतों पर दबाव बना रहा.
वहीं, घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में सालाना आधार पर 10% की बढ़ोतरी हुई. वैश्विक आपूर्ति में आई बाधाओं का असर भी इसकी कीमतों पर पड़ा. चावल के दाम भी एक साल में 8% बढ़ गए. रिपोर्ट के मुताबिक, धान की बुआई के रकबे में कमी और पैदावार कमजोर रहने की आशंका के कारण चावल उत्पादन में 5-6% गिरावट का अनुमान है. इससे कीमतों में तेजी बनी हुई है.
नॉन-वेज थाली की महंगाई कम क्यों रही?
शाकाहारी थाली के मुकाबले मांसाहारी थाली की लागत में कम बढ़ोतरी हुई. इसकी प्रमुख वजह ब्रॉयलर चिकन की कीमतों में सीमित वृद्धि है. मांसाहारी थाली की कुल लागत में ब्रॉयलर चिकन की हिस्सेदारी करीब 50% होती है.
क्रिसिल की रिपोर्ट के अनुसार, सितंबर में ब्रॉयलर चिकन की कीमतें सालाना और मासिक, दोनों आधार पर 2% बढ़ीं. हालांकि, चूजों की कम उपलब्धता, बारिश के कारण आपूर्ति में रुकावट और चारे के लिए मक्के की ऊंची कीमतों ने पोल्ट्री कारोबार की लागत बढ़ाई. इसके बावजूद चिकन की कीमतों में सीमित तेजी रहने से मांसाहारी थाली की महंगाई 6% तक रही, जबकि शाकाहारी थाली की लागत 10% बढ़ गई.
अक्टूबर में प्याज की कीमतों से कब मिलेगी राहत?
त्योहारों के दौरान प्याज की मांग बढ़ने से कीमतों पर दबाव बने रहने की आशंका है. क्रिसिल की रिपोर्ट के मुताबिक, अक्टूबर के पहले 15 दिनों में प्याज के दाम सालाना आधार पर और तेजी से बढ़ सकते हैं. त्योहारों के दौरान मांग बढ़ने और आपूर्ति सीमित रहने से कीमतें ऊंची रह सकती हैं.
हालांकि, अक्टूबर के अंत तक खरीफ प्याज की नई फसल की आवक बढ़ने की उम्मीद है. इससे बाजार में आपूर्ति बेहतर हो सकती है और प्याज की कीमतों में धीरे-धीरे राहत मिलने की संभावना है. तब तक आम परिवारों को रसोई के बढ़ते खर्च का सामना करना पड़ सकता है.
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