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2026 में वैश्विक व्यापार की वृद्धि दर 3.9% रहने का अनुमान, AI में निवेश से मिलेगी रफ्तार: WTO
एशिया निर्यात वृद्धि में सबसे आगे रह सकता है, जबकि भू-राजनीतिक तनावों के कारण दुनिया की प्रमुख व्यापारिक अर्थव्यवस्थाओं में कारोबार की संभावनाएं असमान रहने का अनुमान है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 hour ago
विश्व व्यापार संगठन (WTO) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2026 में वैश्विक वस्तु व्यापार की मात्रा में 3.9% की वृद्धि होने का अनुमान है. यह मार्च में लगाए गए 1.9% के अनुमान से दोगुने से भी अधिक है. अनुमान में इस बढ़ोतरी की वजह साल की पहली छमाही में उम्मीद से बेहतर व्यापारिक गतिविधियां रही हैं.
WTO की रिपोर्ट में कहा गया है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़े बुनियादी ढांचे में निवेश ने भी AI को सक्षम बनाने वाले उत्पादों की मांग बढ़ाई है. इससे वैश्विक वस्तु व्यापार को मजबूती मिली है. हालांकि, रिपोर्ट ने चेतावनी दी है कि मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के कारण ऊर्जा की कीमतें बढ़ सकती हैं और परिवहन मार्गों में बाधा आ सकती है, जिससे वैश्विक व्यापार प्रभावित होने का जोखिम है.
रिपोर्ट के अनुसार, 2026 में AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर वैश्विक खर्च में कम से कम 30% की वृद्धि होने का अनुमान है. WTO का मानना है कि 2027 तक AI से जुड़ा निवेश वस्तु व्यापार को गति देने वाला प्रमुख कारक बना रहेगा. खास तौर पर AI की आपूर्ति श्रृंखला में इस्तेमाल होने वाले उत्पादों की मांग को इससे समर्थन मिलेगा.
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं ने ऊर्जा और उर्वरक बाजारों में आई बाधाओं के अनुरूप खुद को ढाल लिया है. इस बदलाव और AI इंफ्रास्ट्रक्चर में मजबूत निवेश ने वैश्विक वस्तु व्यापार के प्रदर्शन को पहले के अनुमानों से बेहतर बनाने में मदद की है.
निर्यात वृद्धि में एशिया सबसे आगे
WTO की रिपोर्ट के मुताबिक, 2026 में एशिया में वस्तुओं के निर्यात में सबसे तेज वृद्धि होने का अनुमान है. इस क्षेत्र का निर्यात 9.9% बढ़ सकता है. वहीं, उत्तरी अमेरिका के निर्यात में 5.7%, अफ्रीका में 5.6% और दक्षिण अमेरिका में 3.4% की वृद्धि का अनुमान है.
इसके विपरीत, यूरोप के लिए तस्वीर कमजोर रहने की आशंका है. यहां वस्तुओं का निर्यात 0.1% घट सकता है. स्वतंत्र राज्यों के राष्ट्रमंडल (CIS) से निर्यात में 3.9% की गिरावट का अनुमान है, जबकि मध्य पूर्व में निर्यात में 17.2% की बड़ी कमी आ सकती है.
WTO ने मध्य पूर्व में जारी संघर्ष को 2026 में वैश्विक व्यापार के लिए एक प्रमुख नकारात्मक जोखिम बताया है. ऊर्जा की ऊंची कीमतें और परिवहन मार्गों में रुकावट कारोबार की लागत बढ़ा सकती हैं और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में वस्तुओं की आवाजाही को प्रभावित कर सकती हैं.
इसका असर सेवा व्यापार पर भी पड़ने की आशंका है, खासकर परिवहन और अंतरराष्ट्रीय यात्रा के क्षेत्र में. WTO के अनुमान के मुताबिक, 2026 में मध्य पूर्व के वस्तु आयात में 15.4% और निर्यात में 17.2% की गिरावट हो सकती है.
भारत के निर्यात को मिल सकता है समर्थन
वैश्विक वस्तु व्यापार के बेहतर परिदृश्य से भारत को वित्त वर्ष 2026-27 में वस्तुओं और सेवाओं के निर्यात को 1,000 अरब डॉलर तक पहुंचाने के लक्ष्य में मदद मिल सकती है. वैश्विक मांग में मजबूती और टेक्नोलॉजी से जुड़े बुनियादी ढांचे में लगातार निवेश से भारतीय निर्यातकों के लिए नए अवसर पैदा हो सकते हैं.
हालांकि, WTO की रिपोर्ट में बताए गए जोखिम भारत को भी प्रभावित कर सकते हैं. ऊर्जा और माल ढुलाई की लागत बढ़ने से भारतीय कारोबारियों पर दबाव पड़ सकता है. इसका वास्तविक असर काफी हद तक मध्य पूर्व में संघर्ष की अवधि और वैश्विक शिपिंग मार्गों तथा कमोडिटी की कीमतों पर उसके प्रभाव पर निर्भर करेगा.
सेवा व्यापार की वृद्धि दर धीमी रहने का अनुमान
WTO के मुताबिक, 2026 में वैश्विक सेवा व्यापार की मात्रा में 3.3% की वृद्धि होने का अनुमान है. यह मार्च में लगाए गए 4.8% के अनुमान से कम है. हालांकि, संगठन का अनुमान है कि मौजूदा दबाव कम होने के साथ 2027 में सेवा व्यापार की वृद्धि दर बढ़कर 6.4% हो सकती है.
रिपोर्ट में 2027 के लिए वैश्विक वस्तु व्यापार में 4.1% की वृद्धि का अनुमान लगाया गया है. वहीं, वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में 2026 में 2.6% और 2027 में 2.9% की वृद्धि होने की संभावना है.
वैश्विक व्यापार का परिदृश्य पहले के अनुमानों से बेहतर हुआ है, लेकिन भू-राजनीतिक तनाव, ऊर्जा की कीमतों में उतार-चढ़ाव और परिवहन मार्गों में संभावित बाधाएं अब भी इसके लिए प्रमुख जोखिम बने हुए हैं.
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