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ideaForge और Resonia ने मिलाया हाथ, ऊर्जा क्षेत्र में ड्रोन और रोबोटिक्स तकनीक से आएगी क्रांति

यह साझेदारी भारत के ऊर्जा क्षेत्र में तकनीकी नवाचार और आत्मनिर्भरता की ओर एक ठोस कदम है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago

भारत की अग्रणी अनमैन्ड एरियल व्हीकल(UAV) तकनीकी कंपनी आइडिया फोर्ज टेक्नोलॉजी लिमिटेड (ideaForge) ने रेसोनिया लिमिटेड (Resonia -पूर्व में स्टरलाइट ग्रिड 32 लिमिटेड) के साथ एक रणनीतिक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं. यह साझेदारी भारत भर में विद्युत पारेषण अवसंरचना परियोजनाओं में उन्नत ड्रोन और रोबोटिक्स तकनीक के उपयोग को सक्षम बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है.

इस सहयोग के माध्यम से ट्रांसमिशन टावरों और सबस्टेशनों के सर्वेक्षण, निर्माण और अनुरक्षण की पारंपरिक विधियों को आधुनिक तकनीक के साथ बदला जाएगा. आइडिया फोर्ज की उन्नत यूएवी क्षमताएं और रेसोनिया की जटिल परियोजनाओं को समय पर निष्पादित करने की विशेषज्ञता मिलकर परियोजनाओं की समयसीमा घटाने, कार्यबल की सुरक्षा बढ़ाने और कठिन भू-भागों में भी परिचालन की विश्वसनीयता सुनिश्चित करने में मदद करेंगी.

इस समझौते के तहत आइडिया फोर्ज रेसोनिया के कर्मचारियों को ड्रोन संचालन में व्यावहारिक प्रशिक्षण, प्रमाणन कार्यक्रम और ज्ञान-साझा कार्यशालाएं प्रदान करेगा ताकि सुरक्षित और प्रभावी उपयोग सुनिश्चित किया जा सके. सभी ड्रोन तैनातियाँ नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) और अन्य नियामकीय दिशा-निर्देशों का पूर्ण पालन करेंगी.

आइडिया फोर्ज के सीईओ अंकित मेहता ने कहा, “हम मिशन-क्लिटिकल उपयोगों के लिए यूएवी तैनाती में अग्रणी रहे हैं. यह साझेदारी ऊर्जा क्षेत्र में हमारे तकनीकी समाधान लाने की दिशा में एक निर्णायक कदम है. कठिन परिस्थितियों में भी हम निर्माण और अनुरक्षण की प्रक्रियाओं को अधिक कुशल, सुरक्षित और विश्वसनीय बना रहे हैं.”

रेसोनिया लिमिटेड के चेयरमैन प्रतीक अग्रवाल ने कहा, “ड्रोन और रोबोटिक्स को परियोजनाओं के हर चरण में शामिल कर हम न केवल सुरक्षा और दक्षता बढ़ा रहे हैं, बल्कि निर्माण क्षेत्र में श्रमिकों की कमी जैसी समस्याओं को भी दूर कर रहे हैं. यह साझेदारी ऊर्जा अवसंरचना को गति देने की हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाती है.”

इस साझेदारी के तहत आइडिया फोर्ज पावर सेक्टर की विशेष आवश्यकताओं के लिए ड्रोन-आधारित समाधान प्रदान करेगा जैसे जीआईएस सर्वे, मार्ग नियोजन, निर्माण प्रगति की निगरानी और वास्तविक समय में परिसंपत्तियों का निरीक्षण. इनके ड्रोन LiDAR, मल्टीस्पेक्ट्रल और हाइपरस्पेक्ट्रल सेंसर जैसे उच्च-सटीकता वाले उपकरणों से लैस होंगे, जो कुशल योजना और निष्पादन के लिए डेटा उपलब्ध कराएंगे.

एक विशेष नवाचार के रूप में हैवी-लिफ्ट ड्रोन का उपयोग सामग्री परिवहन और वायर स्ट्रिंगिंग जैसे कार्यों में किया जाएगा, जो पहले हेलीकॉप्टर या भारी मानव श्रम पर निर्भर रहते थे. यह कदम न केवल लागत घटाएगा, बल्कि सुरक्षा में भी वृद्धि करेगा. साझेदारी के तहत एक संयुक्त अनुसंधान एवं विकास (R\&D) रोडमैप भी तैयार किया गया है जिससे भविष्य की जरूरतों के अनुसार समाधान विकसित किए जा सकें.

आइडिया फोर्ज का यह कदम दर्शाता है कि भारत में निर्मित उन्नत तकनीक किस तरह ऊर्जा क्षेत्र को आधुनिक और आत्मनिर्भर बना सकती है. वहीं रेसोनिया की परियोजनाएं यह साबित करती हैं कि नवाचार और तकनीकी प्रगति के ज़रिए समय से पहले परियोजना निष्पादन और न्यूनतम पर्यावरणीय प्रभाव संभव है.

रेसोनिया की नेतृत्व क्षमता केवल तकनीकी क्षेत्र तक सीमित नहीं रही है—2018 में देश की पहली निजी विद्युत पारेषण कंपनी द्वारा बॉन्ड जारी करना और पावर सेक्टर का पहला इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (InvIT) लॉन्च करना इसकी अग्रणी सोच का प्रमाण है.

 


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