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4 जून के बाद कितना बदल सकता है बाजार? ये पॉइंट्स दूर कर देंगे आपके मन में उठ रहे हर सवाल

चार जून को आने वाले लोकसभा चुनाव के नतीजे बाजार की चाल निर्धारित करेंगे. यदि नतीजे बाजार की उम्मीद के अनुरूप आते हैं, तो सबकुछ अच्छा रहेगा. अन्यथा मार्केट बड़ी गिरावट से गुजर सकता है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago

लोकसभा चुनाव के नतीजों (Lok Sabha Election Results 2024) की घड़ी नजदीक आ गई है. एक जून को आखिरी चरण का मतदान होना है और 4 जून को पता चल जाएगा कि जनता के मन में क्या है. वैसे तो यह लगभग तय मानकर चला जा रहा है कि मोदी सरकार की वापसी होगी. लेकिन चुनाव भी क्रिकेट की तरह है, जहां आखिरी वक्त पर भी पासा पलट सकता है. इसलिए निवेशक शेयर बाजार में पैसा लगाने के बजाए तस्वीर स्पष्ट होने इंतजार कर रहे हैं. दरअसल, तमाम ब्रोकरेज फर्म और एक्सपर्ट्स यह अनुमान जाता चुके हैं कि अगर चुनावी नतीजे भाजपा के पक्ष में नहीं आते, तो बाजार पूरी तरह बिखर सकता है. इस कारण से निवेशक कोई जोखिम मोल लेने के मूड में नहीं हैं.

लौट सकती है पुरानी स्थिति 
ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म यूबीएस (UBS) का कहना है कि अगर लोकसभा चुनाव के नतीजे में BJP की अगुवाई वाले NDA के पक्ष में नहीं रहते, तो इक्विटी बाजार का वैल्यूएशन 2014 से पहले के स्तर तक जा सकता है. राजनीतिक अस्थितरता और नीतियों से प्रभावित होने की आशंका के कारण निवेशकों का भरोसा डगमगा सकता है, जिससे बाजार NDA कल के पहले वाली स्थिति में जा सकता है. UBS का कहना है कि ऐतिहासिक रूप से जब भी चुनाव रिजल्ट के कारण स्टॉक मार्केट में गिरावट आई है, तो उसकी भरपाई के लिए मीडियम से लॉन्ग टर्म तक इंतजार करना पड़ा है. क्योंकि बाजार और कंपनियों को नई सरकार की नीतियों के अनुरूप ढलने में समय लगता है. 

पूरी होगी 400 पार की आशा? 
वहीं, कुछ अन्य ब्रोकरेज फर्म का मानना है कि यदि लोकसभा चुनाव में भाजपा 272 सीटों का आंकड़ा पार नहीं कर पाती, तो बाजार में बड़ी बिकवाली को बढ़ावा मिल सकता है. कहने का मतलब है कि रिकॉर्ड हाई पर पहुंच चुका बाजार धड़ाम से नीचे आ सकता है. बीजेपी ने इस बार 400 पार का नारा दिया है. PM मोदी से लेकर पार्टी के तमाम नेता यह विश्वास जाहिर कर चुके हैं कि उन्हें 400 से ज्यादा सीटें मिलेंगी. हालांकि, राजनीति के अधिकांश जानकारों का मत है कि मोदी के नेतृत्व वाली भाजपा को 300 से ज्यादा और राजग को 330-340 सीटें मिल सकती हैं.  

इन 3 पॉइंट में समझें क्या हो सकता है

1. यदि चुनाव परिणाम भाजपा की उम्मीद के अनुरूप रहता है और वो सिंगल-पार्टी मैज्योरिटी बरकरार रखती है, तो बाजार में उछाल देखने को मिलेगा. दरअसल, इससे निवेशकों को यह भरोसा रहेगा कि सरकार की सुधार संबंधी नीतियां जारी रहेंगी. खासकर विनिवेश, लैंड बिल और यूनिफॉर्म सिविल कोड जैसे मुद्दों पर बात आगे बढ़ सकती है. इससे फाइनेंशियल मार्केट का सेंटीमेंट पॉजिटिव बना रहेगा.


2. यदि भाजपा बहुमत हासिल नहीं कर पाती, लेकिन नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में NDA की सरकार बनती है, तो बाजार में अस्थिरता का माहौल निर्मित हो सकता है. ब्रोकरेज फर्म फिलिप कैपिटल का मानना है कि ऐसी स्थिति में इक्विटी मार्केट में बड़ी बिकवाली हो सकती है. वहीं, अगर एनडीए बहुमत के आंकड़े तक नहीं पहुंच पाता और किसी भी दल को बहुमत नहीं मिलता तो बाजार में अनिश्चितता काफी ज्यादा बढ़ सकती है. इस स्थिति में मार्केट लगातार बड़ा गोता लगा सकता है.


3. यदि INDIA गठबंधन की सरकार बनती है, तो इससे बाजार में अनिश्चितता की स्थिति उत्पन्न हो सकती है. क्योंकि ऐसा होने पर नीतियों में बदलाव की संभावना बनी रहेगी. निवेशकों को हमेशा यह डर लगा रहेगा कि नई सरकार पुरानी नीतियों को बदल सकती है. बाजार को नई सरकार के अनुरूप ढलने में समय लगता है, लिहाजा सत्ता परिवर्तन की स्थित में कुछ समय तक मार्केट में नरमी का रुख देखने को मिल सकता है. 

गठबंधन सरकार के फायदे और नुकसान

गठबंधन की सरकार बनने पर महंगाई जैसे मुद्दों पर आम जनता को कुछ राहत मिल सकती है. क्योंकि दाम बढ़ाने के लिए सभी सहयोगियों की सहमति आवश्यक हो जाती है. गठबंधन में शामिल पार्टियों को व्यक्तिगत तौर पर भी अपने वोट बैंक की चिंता होती है, ऐसे में महंगाई पर मूक सहमति देकर वह उसके दरकने के जोखिम नहीं उठा सकतीं. 2014 से पहले ऐसा अक्सर देखने को मिलता था. हालांकि, गठबंधन की सरकार का एक नुकसान भी है. सरकार को दबाव में काम करना पड़ता है. आर्थिक सुधारों पर कठोर निर्णय नहीं लेने के चलते राजकोषीय और राजस्व घाटा बढ़ता जाता है, जो लॉन्ग टर्म में बड़ी मुश्किल बन सकता है.
 


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