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Devyani की लगभग ₹420 करोड़ की बिरयानी डील ने कैसे निवेशकों को नाराज़ और संस्थापकों को किया खुश?
मुश्किल हालात में Devyani ने Biryani By Kilo पर ₹420 करोड़ की बड़ी बाज़ी लगाई है, जब कि QSR (क्विक सर्विस रेस्टोरेंट) इंडस्ट्री का माहौल भी बहुत चुनौतीपूर्ण है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
19 अप्रैल को, Devyani International (जो भारत में KFC, Pizza Hut और Costa Coffee जैसे इंटरनेशनल ब्रांड्स चलाती है) ने शेयर बाजार को बताया कि वह Sky Gate Hospitality में बड़ी हिस्सेदारी (controlling stake) खरीदने जा रही है. Sky Gate Hospitality भारत में Biryani by Kilo (BBK) ब्रांड के तहत रेस्टोरेंट्स चलाती है. इसके अलावा इसके पास Goila Butter Chicken, The Bhojan और Get-A-Way जैसे और ब्रांड्स भी हैं.
Devyani की बोर्ड मीटिंग 24 अप्रैल को होगी जिसमें यह डील तय की जाएगी. हालांकि, इस पर अंतिम फैसला तभी होगा जब कंपनी के सभी शेयरधारक इसे एक खास बैठक (extra-ordinary general meeting) में मंजूरी देंगे. डील की पूरी रकम तो अब तक सार्वजनिक नहीं की गई है, लेकिन BW Businessworld को अप्रैल के पहले हफ्ते में Sky Gate के संस्थापकों – Kaushik Roy और Vishal Jindal – द्वारा निवेशकों को भेजे गए एक नोट से पता चला कि यह डील करीब ₹420 करोड़ की हो सकती है.
लेकिन इस नोट में सिर्फ डील की रकम की बात नहीं थी, बल्कि यह भी बताया गया कि Sky Gate को किन आर्थिक दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. नोट में संस्थापकों ने बताया कि 2024 से वे फंड जुटाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन 2025 में अमेरिका में President Trump के दोबारा चुने जाने और कंज्यूमर डिमांड (खपत) में आई मंदी की वजह से भारत में स्टार्टअप्स को फंड मिलना बहुत मुश्किल हो गया है.
कमजोर होती कंज़्यूमर डिमांड
नोट में आगे बताया गया है कि भारत में QSR (Quick Service Restaurant) मार्केट की डिमांड अभी भी कमजोर बनी हुई है. Sky Gate के संस्थापकों ने कहा कि 2024 में सिर्फ एक ही लिस्टेड QSR कंपनी थी जिसने Same-Store Sales Growth (SSSG) दिखाया — यानी पुराने स्टोर्स की बिक्री में बढ़त. बाकी सभी QSR और रेस्टोरेंट कंपनियों का 3 साल का रिटर्न (लाभ) निगेटिव रहा है, सिर्फ Jubilant Foodworks को छोड़कर. नोट में यह भी बताया गया कि KFC (जिसे Devyani चलाती है) की भी बिक्री गिर रही है, KFC की SSSG करीब -5% रही है. FY25 के पहले 6 महीनों (H1FY25) में यह -7.1% रही, जबकि पिछले साल (H1FY24) में -2.1% थी.
हालांकि बाजार में मंदी के बावजूद, Devyani International की कमाई सालाना औसतन 15.6% की दर से बढ़ रही है, जो इसके विस्तार को दर्शाता है. सिर्फ Q3 FY25 (अक्टूबर-दिसंबर 2024) में ही Devyani की कमाई 53.5% बढ़ी। इस तिमाही में कंपनी की कुल कमाई ₹1,294 करोड़ रही, और पूरे नौ महीनों (अप्रैल से दिसंबर 2024) की ₹3,762 करोड़. FY24 (पूरा साल) की कमाई ₹3,558 करोड़ थी. नोट में कहा गया, "निवेशकों को इस बात की चिंता है कि फूड डिलीवरी में प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही है और बिरयानी ब्रांड्स का स्केल (फैलाव) नहीं हो पा रहा है."
कामकाज में दिक्कतें
Sky Gate के संस्थापकों ने नोट में लिखा है कि मौजूदा माहौल में फाइनेंशियल इन्वेस्टर्स (निवेशक) के लिए कंपनी में पैसा लगाना बहुत मुश्किल हो गया है. कंपनी का EBITDA (कमाई से खर्च घटाकर जो बचता है) -10% से -15% के बीच है, यानी कंपनी को घाटा हो रहा है. हालांकि इस मुश्किल समय में भी एक strategic investor (ऐसा निवेशक जो सिर्फ पैसे के लिए नहीं, बल्कि बिज़नेस में सक्रिय रूप से हिस्सा लेने के इरादे से आता है) ने कंपनी में दिलचस्पी दिखाई और बड़ी हिस्सेदारी खरीदने की इच्छा जताई.
31 मार्च 2025 को, Sky Gate ने इसी strategic investor के साथ एक term sheet (डील के नियमों की शुरुआती सहमति) पर साइन किया. यह उस समय तक कंपनी को मिला एकमात्र ऑफर था. नोट में यह भी बताया गया कि कंपनी के पास सिर्फ 3-4 महीने तक ही खर्च चलाने के पैसे बचे हैं, जिससे साफ है कि उसकी आर्थिक स्थिति बहुत कमजोर है.
संस्थापकों ने लिखा,"Strategic Investor Sky Gate के सभी शेयर (Founders को छोड़कर) खरीदेगा, FY25 की कमाई का 2 गुना मूल्य (2.0x Revenue Multiple) देकर। यह डील कुल मिलाकर करीब ₹420 करोड़ की होगी (लायबिलिटी घटाने के बाद), और इसके बदले वो अपनी कंपनी के शेयर दे सकता है." इसका मतलब है कि दोनों संस्थापक (Kaushik Roy और Vishal Jindal) अपनी हिस्सेदारी इस डील में बचाए रखेंगे.
Strategic investor ने यह शर्त रखी है कि दोनों संस्थापक अगले कम से कम 4 साल तक कंपनी के साथ काम करें, ताकि बिज़नेस में स्थिरता बनी रहे और मौजूदा निवेशकों को ठीक से बाहर निकलने का मौका मिल सके. 11 दिसंबर 2024 तक Traxcn के आंकड़ों के मुताबिक, दोनों संस्थापकों की Sky Gate में 14.26% हिस्सेदारी थी, जिसकी वैल्यू करीब ₹126 करोड़ थी. बाकी शेयरहोल्डर्स (जैसे कि ESOP pool आदि) को इस डील में घाटा (haircut) हो सकता है, क्योंकि उनकी हिस्सेदारी की वैल्यू करीब ₹726 करोड़ बताई गई है, लेकिन उन्हें इससे कम मिल सकता है.
“किलो” कैसे बना “ग्राम”?
कंपनी में जिन बड़े निवेशकों ने पैसा लगाया था, वे इस डील से खुश नहीं हैं और उनकी नाराज़गी जायज़ भी है. वजह ये है कि उन्हें इस डील में घाटा (haircut) सहकर बाहर जाना पड़ रहा है और उन्हें असल में कोई फायदा (value creation) नहीं हो रहा. तो सवाल ये है — इस बिरयानी दिग्गज (Biryani by Kilo) के साथ आखिर ऐसा क्या गलत हुआ?
BW Businessworld ने इस पर कुछ निवेशकों से बात की, जिन्होंने नाम न छापने की शर्त पर कुछ अहम बातें साझा कीं. उन्होंने बताया कि को-फाउंडर Vishal Jindal का कंपनी में बढ़ता दबदबा कई लोगों को खटकने लगा था. धीरे-धीरे उन्होंने दूसरों की बात सुननी बंद कर दी थी. एक निवेशक ने कहा कि ग़लत मार्केटिंग पर पैसे खर्च किए गए, बिरयानी ब्रांड को कमजोर किया गया—जैसे कि लो-कैलोरी आइसक्रीम जैसी गैर-ज़रूरी चीज़ों में निवेश करके, और BBK को सही समय पर इंटरनेशनल ले जाने का मौका भी गंवा दिया गया.
निवेशकों को सबसे ज़्यादा आपत्ति जिस फैसले से हुई, वह था बैडमिंटन स्टार PV Sindhu को ब्रांड एंबेसडर बनाना. कई लोगों ने इसे “ग़लत समय पर लिया गया और महंगा फैसला” बताया. एक शुरुआती निवेशक ने कहा कि उन्होंने इस एंडोर्समेंट के खिलाफ साफ सलाह दी थी, लेकिन फिर भी ये किया गया. संस्थापकों और बड़े निवेशकों के बीच टकराव पिछले एक साल से चल रहा था. मामले से जुड़े लोगों के अनुसार, IvyCap Ventures (जो Sky Gate का बड़ा निवेशक है) ने तो एक समय पर एक को-फाउंडर को हटाने तक की सिफारिश की थी, क्योंकि उन्हें रोज़मर्रा के कामकाज के तरीकों पर गंभीर चिंता थी.
फ़ाउंडर्स की आख़िरी मुस्कान
ध्यान देने वाली बात यह है कि इस डील में संस्थापकों (Founders) की हिस्सेदारी शामिल नहीं है. यह बात कई शुरुआती निवेशकों को पसंद नहीं आई. एक निवेशक ने BW Businessworld को बताया, "संस्थापकों ने उस वैल्यूएशन पर निवेश नहीं किया था जिस पर बड़े इन्वेस्टर्स (institutional capital) ने पैसा लगाया था." अब जब Devyani International इस कंपनी को खरीदने जा रही है, तो उम्मीद है कि इससे कंपनी में अनुशासन आएगा और उसे बड़े स्तर पर काम करने का फायदा मिलेगा.
निवेशकों का मानना है कि इससे कंपनी का प्रदर्शन सुधर सकता है और उसका मूल्य (valuation) भी बढ़ सकता है. एक निवेशक ने कहा, "अगर बाजार में तेजी बनी रही और ब्रोकरेज की रिपोर्टें सही निकलीं, तो संस्थापक अपनी हिस्सेदारी की वैल्यू को डील के बाद दोगुना कर सकते हैं—वो भी बिना उतना वित्तीय जोखिम उठाए हुए, जितना दूसरे निवेशकों ने उठाया."
दिलचस्प बात ये है कि Sky Gate की दो और ब्रांड्स—Krazy Kebab Company और Get-Away Desserts—जो निवेशकों के अनुसार गलत रणनीतिक फैसले थे, इस डील में शामिल नहीं हैं. हालांकि संस्थापकों ने ये भी कहा है कि वे आने वाले महीनों में इन ब्रांड्स को भी बेचने का इरादा रखते हैं, ताकि शेयरधारकों को ज़्यादा रिटर्न मिल सके.
Devyani को क्या फ़ायदा होगा?
Devyani की यह खरीदारी पूरी तरह से रणनीतिक (strategic) है, क्योंकि इससे उसके मौजूदा बिज़नेस में कई तरह की जोड़तोड़ (synergies) हो सकती हैं. अभी Devyani का फोकस ज़्यादातर अंतरराष्ट्रीय फास्ट फूड ब्रांड्स जैसे KFC, Pizza Hut और Costa Coffee पर है. लेकिन अब BBK (Biryani by Kilo) को खरीदकर Devyani को भारतीय खाने के सेगमेंट में भी पैर जमाने का मौका मिलेगा — खासकर बिरयानी और उससे जुड़ी डिशेज़ में, जो भारत में बेहद पॉपुलर हैं. Sky Gate को खरीदकर Devyani अब अपने क्लाउड किचन और फूड कोर्ट्स में BBK, Goila Butter Chicken और The Bhojan जैसे आउटलेट्स खोल सकेगी.
भारत में बिरयानी का मार्केट बहुत बड़ा है लेकिन बिखरा हुआ (fragmented) है. Devyani अगर BBK को खरीद लेती है, तो इस सेगमेंट में वह मजबूत पकड़ बना सकती है और बड़ा मार्केट शेयर हासिल कर सकती है. उद्योग के अनुमान के मुताबिक, भारत में बिरयानी का बाजार संगठित (organised) क्षेत्र में करीब ₹1,500 करोड़ और असंगठित (unorganised) क्षेत्र में ₹15,000 करोड़ का है. कुछ बिरयानी ब्रांड्स, जैसे Behrouz Biryani, BBK, Charcoal Biryani, और Biryani Blues अच्छी तरह से बढ़े हैं. Rebel Foods का Behrouz Biryani सबसे सफल ब्रांड है, जो दुनिया भर में 380 से अधिक किचन चला रहा है.
BBK ने FY16 में दिल्ली NCR से शुरुआत की थी और अब यह करीब 100 स्टोर्स, 45 शहरों में फैला हुआ है. FY19 से FY24 के बीच इसकी रेवेन्यू ग्रोथ रेट (CAGR) 55% रही और FY24 में इसकी कमाई ₹300 करोड़ रही. Emkay Global की रिपोर्ट कहती है कि BBK अभी नुकसान में चल रहा है क्योंकि उसने बहुत तेजी से नए स्टोर्स खोले हैं. लेकिन अच्छी बात ये है कि ये नुकसान अब धीरे-धीरे कम हो रहा है.
रिपोर्ट में लिखा गया है कि “हम मानते हैं कि मुनाफे की तरफ वापसी मुमकिन है, क्योंकि BBK की ग्रॉस मार्जिन (55-57%) थोड़ी कम है (KFC की 70% है), और मार्केटिंग व कस्टमर ऐक्विजिशन कॉस्ट (CAC) ज्यादा है. लेकिन Devyani के सप्लाई चेन, फाइनेंस और HR जैसी चीजों में मेल होने से इसे बड़ा फायदा मिल सकता है.” BBK भारत का इकलौता ब्रांड है जो पूरी तरह से ताज़ा खाना (cook-to-order) बनाता है और पूरे भारत में डायरेक्ट-टू-कस्टमर (D2C) मॉडल पर काम करता है. Devyani की सबसे बड़ी प्रतियोगी Jubilant Foodworks ने भी एक समय बिरयानी ब्रांड ‘EkDum!’ शुरू किया था, लेकिन 2023 में उसे बंद कर दिया क्योंकि वह मुनाफे में नहीं था.
आज के समय में जब ग्राहकों की डिमांड कमजोर हो रही है, मुनाफे के मार्जिन कम हैं, और फूड डिलीवरी का मुकाबला तेज है. ऐसे में एक नुकसान में चल रहे भारतीय खाने के ब्रांड को मुनाफे में लाना आसान नहीं होगा, भले ही Devyani जैसी बड़ी कंपनी उसे संभाल रही हो. लेकिन अगर BBK इस चुनौती को पार कर गया और Devyani की व्यवस्था में ढल गया — तो ये भारत के QSR (Quick Service Restaurant) इतिहास की सबसे चौंकाने वाली वापसी बन सकती है.
(लेखक- अर्जुन यादव, BW Businessworld में संवाददाता (Correspondent) हैं.)
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