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शेयर मार्केट से गायब होने वाली है ये कंपनी, कहीं आपने तो नहीं लगाया पैसा?

कर्ज में डूबी रिलायंस कैपिटल को शेयर मार्केट से डीलिस्ट करने पर विचार चल रहा है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago

अनिल अंबानी (Anil Ambani) की कर्ज में डूबी रिलायंस कैपिटल (Reliance Capital) अब हिंदुजा समूह की हो गई है. नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) ने मंगलवार को हिंदुजा ग्रुप की कंपनी इंडसइंड इंटरनेशनल होल्डिंग्स लिमिटेड (IIHL) के 9650 करोड़ रुपए के रिजॉल्यूशन प्लान को मंजूरी दे दी है. अब रिलायंस कैपिटल को शेयर मार्केट से हटाने यानी डीलिस्ट करने की तैयारी चल रही है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, एक्सचेंज फाइलिंग में बताया गया है कि रिजॉल्यूशन प्लान को मंजूरी मिलने के बाद कंपनी को NSE और BSE से डीलिस्ट करने पर विचार चल रहा है.  

90 दिनों का मिला है समय
NCLT से इंडसइंड इंटरनेशनल होल्डिंग्स लिमिटेड (IIHL) के 9650 करोड़ रुपए के रिजॉल्यूशन प्लान को मंजूरी मिलने के साथ ही रिलायंस कैपिटल को नया मालिक मिल गया है. हालांकि, IIHL को रिजॉल्यूशन प्लान लागू करने के लिए 90 दिन का समय दिया गया है. इस फाइलिंग में कहा गया है कि आने वाले नए निवेशक के लिए मिनिमम पब्लिक शेयरहोल्डिंग को बनाए रखने के लिए डीलिस्टिंग जैसा कदम उठाया जा सकता है. चूंकि Reliance Capital के इक्विटी शेयरहोल्डर्स के लिए लिक्विडेशन वैल्यू कुछ भी नहीं होगी, इसलिए डीलिस्टिंग के बाद इक्विटी शेयरहोल्डर्स को कोई भी पेमेंट नहीं मिलेगा. 

RBI की मंजूरी का है इंतजार
रिपोर्ट्स के अनुसार, NCLT के आदेश और मार्केट रेगुलेटर सेबी के डीलिस्टिंग नियम के तहत शेयर बाजार से रिलायंस कैपिटल के शेयर डीलिस्ट किए जाएंगे. इस अधिग्रहण को अभी आरबीआई, आईआरडीएआई, सीसीआई और बाजार नियामक SEBI से मंजूरी मिलनी बाकी है. अगले हफ्ते तक आरबीआई और सेबी दोनों ही इस पर मुहर लगा सकते हैं. बता दें कि नवंबर 2021 में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अनिल अंबानी ग्रुप की इस कंपनी के बोर्ड को गवर्नेंस और पेमेंट डिफॉल्ट के चलते  भंग कर दिया था. इसके बाद 2 दिसंबर को NCLT के समक्ष कॉरपोरेट इन्सॉल्वेंसी रिजॉल्यूशन प्रोसेस (CIRP) की याचिका दायर की थी. फरवरी 2022 से इस कंपनी के अधिग्रहण के लिए बोली मंगाई थीं.

काफी लंबी खिंच गई प्रक्रिया
दिवाला प्रक्रिया की वैधानिक समय सीमा 330 दिन होती है, जबकि इसमें इससे काफी ज्यादा समय लग चुका है. इस कंपनी को अपना बनाने वालों की दौड़ में गुजरात की टोरेंट पावर और हिंदुजा समूह मुख्य रूप से शामिल थे. टोरेंट ने पहली नीलामी के दौरान 8,640 करोड़ रुपए की बोली लगाई थी. नीलामी प्रक्रिया के बाद हिंदुजा समूह ने 9000 करोड़ की बोली लगाकर कर्जदाताओं को सोचने पर मजबूर कर दिया. हालांकि, टोरेंट का कहना था कि चूंकि हिंदुजा ने नीलामी प्रक्रिया के बाद बोली लगाई, लिहाजा उसे स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए. इसके बाद मामला लगातार लटकता चला गया और अब जाकर NCLT ने हिंदुजा समूह की समाधान योजना को मंजूरी दी है. खबर लिखे जाने तक रिलायंस कैपिटल के शेयर करीब ढाई प्रतिशत के नुकसान के साथ 11.90 रुपए पर कारोबार कर रहे थे. 


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