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BW Disrupt: एंजल इन्वेस्टिंग में क्या है महिलाओं की स्थिति? जानिये एक्सपर्ट्स की राय!

2021 में बहुत से स्टार्टअप और यूनिकॉर्न सामने आ रहे थे लेकिन, इस साल के दौरान 1% से कम महिलाओं को ही फंडिंग प्रदान की गई थी.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago

आज देश की राजधानी दिल्ली में BW बिजनेसवर्ल्ड (BusinessWorld) द्वारा WESA (Women Entrepreneurship Summit & Awards) के 5वें एडिशन का शुभारंभ किया गया है. इस मौके पर एंजल इन्वेस्टिंग के क्षेत्र में महिलाओं की स्थिति और नए उद्यमियों के लिए सही रास्ते के निर्माण के बारे में एक पैनल डिस्कशन का आयोजन किया गया. आइए जानते हैं एंजल इन्वेस्टिंग के क्षेत्र में महिलाओं की स्थिति क्या है? और पिछले कुछ सालों के दौरान उसमें क्या परिवर्तन हुआ है?

महिलाओं को नहीं मिलती फंडिंग?
साल 2021 में बहुत से स्टार्टअप्स और यूनिकॉर्न बिजनेस उभरकर सामने आ रहे थे लेकिन, इस साल के दौरान 1% से कम महिलाओं को ही फंडिंग प्रदान की गई थी. इतना ही नहीं, आज भी एंजल इन्वेस्टमेंट के क्षेत्र में महिलाओं की संख्या 1% से भी कम है. BW बिजनेसवर्ल्ड द्वारा आयोजित किए गए कार्यक्रम के इस पैनल में शामिल लोगों में सबसे पहला नाम डॉक्टर ललिता का है. डॉक्टर ललिता, हेल्थकेयर क्षेत्र के जाने माने स्टार्टअप Formen की फाउंडर और डायरेक्टर हैं. डॉक्टर ललिता के साथ ही इस पैनल में TidyUp की को-फाउंडर परिधि सेखरी, iThink लॉजिस्टिक्स की को-फाउंडर जैबा नारंग और C-Xcel की फाउंडर, एंजल इन्वेस्टर और मेंटर अंजलि मल्होत्रा भी शामिल थे.

बेहतर हुआ है एंजल इन्वेस्टिंग का क्षेत्र?
अभी भी 60% से ज्यादा महिलाओं को भेदभाव का सामना करना पड़ता है. एंजल इन्वेस्टिंग के क्षेत्र में महिलाओं की स्थिति पहले से काफी बेहतर हुई है. एंजल इन्वेस्टिंग के क्षेत्र में 30 सालों का अनुभव रखने वाली अंजलि मल्होत्रा की मानें तो पहले ज्यादातर महिलाएं अपने सपनों को दरकिनार कर अपने परिवारों और परिवार के सदस्यों का ख्याल रखने में ही व्यस्त रहती थीं लेकिन, अब ऐसा नहीं है. अब महिलाएं अपने सपनों को प्राथमिकता दे रही हैं और एंजल इन्वेस्टिंग के क्षेत्र में भी महिलाओं की संख्या पिछले एक दशक के दौरान बढ़ी है.

इन्वेस्टर्स से क्यों नहीं मिलती मदद? 
कहीं न कहीं यह बात तो माननी ही पड़ेगी कि महिलाओं को लेकर समाज में एक तरह की सामाजिक धारणा बनी हुई है. लेकिन एक बहुत बड़ा सवाल ये है कि क्या इसी सामाजिक धारणा की वजह से महिलाएं इन्वेस्टर्स की मदद नहीं ले पाती हैं? इस विषय पर अपने विचार रखते हुए परिधि ने बताया कि वैसे तो उनकी कंपनी एक ‘बूटस्ट्रैप’ कंपनी है और उन्हें किसी इन्वेस्टर से मदद मांगनी ही नहीं पड़ी लेकिन फिर भी उनका मानना है कि एक सामाजिक धारणा बनी हुई है जिसकी वजह से महिलाएं, इन्वेस्टर्स तक अपनी पहुंच नहीं बना पातीं और महिलाओं को पुरुषों के जितने मौके भी नहीं मिलते. दूसरी तरफ जैबा का मानना है कि बहुत से मुफ्त कोर्स और अन्य माध्यम उपलब्ध हैं, जिनकी बदौलत एक महिला बिजनेस के बारे में सीख सकती है और यह मौका पुरुषों के पास नहीं होता.

अपने लिए बढाएं कदम
आज के समय में भी 60% महिलाओं को भेदभाव का सामना करना पड़ता है और यह एक बहुत ही चौंका देने वाली बात है. इसके साथ ही एक बहुत बड़ा सवाल ये भी है कि महिलाएं अपने साथ होने वाले भेदभावों को पीछे छोड़कर आगे कैसे बढें और अपने बिजनेस के लिए एक मजबूत रास्ता कैसे सुनिश्चित करें? इस विषय पर अपनी राय रखते हुए डॉक्टर ललिता ने कहा कि वह मेडिकल बैकग्राउंड से हैं. उनके पास न ही तो टेक्निकल साधन उपलब्ध थे और न ही उन्हें बिजनेस चलाने के बारे में पता था लेकिन, वह किसी पर निर्भर नहीं रहीं और उन्होंने अपने लिए खुद रास्ता बनाया. इसके साथ ही डॉक्टर ललिता ने यह भी बताया कि अब बहुत से ISBs और IIMs द्वारा महिलाओं के लिए विशेष प्रोग्राम चलाए जाते हैं और इनका इस्तेमाल करके आप अपने भेदभावों से काफी आगे निकल सकती हैं. 
 

यह भी पढ़ें: BW Disrupt: लॉन्च हुआ WESA का 5वां एडिशन, इस बार क्या है खास?

 


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