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अब 9 कैरेट गोल्ड पर भी अनिवार्य हुई हॉलमार्किंग, BIS ने बदले मानक
9 कैरेट सोने की हॉलमार्किंग अनिवार्य होने से उपभोक्ताओं को बेहतर पारदर्शिता मिलेगी और कम लागत में विश्वसनीय गहनों तक पहुंच आसान होगी.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 11 months ago
भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) ने एक अहम फैसला लेते हुए 9 कैरेट सोने को भी अनिवार्य हॉलमार्किंग की श्रेणी में शामिल कर लिया है. यह नया नियम इसी जुलाई से लागू कर दिया गया है. अब तक केवल 14 कैरेट या उससे ऊपर के गहनों पर ही हॉलमार्क अनिवार्य था, लेकिन अब कम शुद्धता वाले, सस्ते गहनों की खरीद भी पारदर्शी और सुरक्षित हो सकेगी.
क्या है हॉलमार्किंग और क्यों जरूरी है?
हॉलमार्किंग सोने की शुद्धता की आधिकारिक पुष्टि होती है, जिसे BIS अधिनियम 2016 के तहत किया जाता है. यह सुनिश्चित करता है कि गहनों में कीमती धातु की वास्तविक मात्रा क्या है. नए नियम के तहत अब 9 कैरेट यानी 375 PPT (पार्ट्स पर थाउजेंड) वाले गहनों पर भी हॉलमार्क होना अनिवार्य होगा.
नए नियमों का पालन जरूरी
ऑल इंडिया जेम एंड ज्वैलरी डोमेस्टिक काउंसिल ने एक्स पर पोस्ट के जरिए इसकी जानकारी दी है. पोस्ट के अनुसार, देशभर के सभी ज्वैलर्स और हॉलमार्किंग केंद्रों को अब इस नए नियम का पालन करना होगा. पहले 9 कैरेट सोने के गहनों पर हॉलमार्किंग जरूरी नहीं थी, जिससे ग्राहकों को उसकी शुद्धता की गारंटी नहीं मिलती थी. लेकिन अब ऐसा नहीं होगा.
ग्राहकों के लिए क्यों है ये फायदेमंद?
विशेषज्ञों के अनुसार यह फैसला ग्राहकों के लिए बेहद लाभकारी है. 9 कैरेट सोने से बने गहने न सिर्फ किफायती होते हैं, बल्कि इनमें स्टाइल और डिजाइन की व्यापक संभावनाएं भी होती हैं. खासकर तब जब सोने की कीमतें ऊंचाई पर हों, यह विकल्प लोगों को बेहतर डिज़ाइन में सस्ते गहने उपलब्ध कराता है. इसके साथ ही इस कदम से निर्यात बढ़ने की भी संभावना जताई गई है.
कहां लागू नहीं होगा यह नियम?
यह नियम सोने की घड़ियों और पेनों पर लागू नहीं होगा. साथ ही, BIS ने यह भी स्पष्ट किया है कि 24 कैरेट सोने से बने सिक्के, जो सरकारी टकसाल या अधिकृत रिफाइनरी द्वारा बनाए गए हों और जिनका चलन में कोई मुद्रा मूल्य न हो, उन्हें भी विशेष श्रेणी में रखा गया है.
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