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सरकार का नेट डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन 15.6% बढ़ा, वित्त वर्ष-25 में अब तक ₹27 लाख करोड़ रहा
कॉरपोरेट टैक्स से होने वाली कमाई काफी बढ़ी है, जो वित्त वर्ष 2023-24 में ₹11.31 लाख करोड़ थी और अब बढ़कर ₹12.72 लाख करोड़ हो गई है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
केंद्र सरकार के डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन में जबरदस्त बढ़ोतरी देखी गई है. केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2024-25 में सरकार को कुल 27.02 लाख करोड़ रुपये का डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन जमा हुआ है. पिछले साल यानी वित्त वर्ष 2023-24 के 23.38 लाख करोड़ रुपये की तुलना में यह 15.59% ज्यादा है.
टैक्स से होने वाली कमाई में इस जबरदस्त बढ़ोतरी की मुख्य वजह कॉरपोरेट और नॉन-कॉरपोरेट टैक्स से हुई आमदनी में इजाफा और सिक्योरिटी ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) से होने वाली कमाई में भारी उछाल है. इस साल कॉरपोरेट टैक्स कलेक्शन बढ़कर 12.72 लाख करोड़ रुपये हो गया है, जबकि पिछले वित्त वर्ष में यह 11.31 लाख करोड़ रुपये था. वहीं, नॉन-कॉरपोरेट टैक्स कलेक्शन भी बढ़कर 13.73 लाख करोड़ हो गया है, जबकि पिछले साल 11.68 लाख करोड़ रुपये ही था.
STT कलेक्शन में भी बंपर बढ़ोतरी
इसके अलावा STT कलेक्शन में भी बंपर बढ़ोतरी देखी गई है. पिछले वर्ष के 34,192 करोड़ रुपये की तुलना में इस साल STT से 53,296 करोड़ रुपये का टैक्स कलेक्शन हुआ है. डायरेक्ट टैक्स वे टैक्स होते हैं जो व्यक्ति और बिजनेस सीधे सरकार को टैक्स देते हैं. इनमें कॉरपोरेट टैक्स और STT टैक्स भी शामिल हैं.
हालांकि, वेल्थ और अन्य टैक्स कलेक्शन में गिरावट देखी गई है. संपत्ति टैक्स सहित अन्य टैक्स से इस बार 3,366 करोड़ रुपये का कलेक्शन हुआ है जबकि पिछले वित्त वर्ष में 4,068 करोड़ रुपये का कलेक्शन हुआ था.
रिफंड में भी बढ़ोतरी
CBDT के मुताबिक, इस दौरान रिफंड में भी 26.04% की बढ़ोतरी के साथ 4.76 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है. अगर रिफंड को हटा दिया जाये तो यानी नेट डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन 22.26 लाख करोड़ रुपये रहा, जो पिछले साल के 19.60 लाख करोड़ रुपये की तुलना में 13.57% ज्यादा है.
टैक्स कलेक्शन में इस तरह जबरदस्त बढ़ोतरी भारत के लिए आर्थिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है. सरकार की आमदनी बढ़ने से ऊधारी पर निर्भरता घटती है. साथ ही यह भी दिखाता है कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था रफ्तार पकड़ी हुई है. सरकार यह पैसा इंफ्रास्ट्रक्चर और सोशल वेलफेयर जैसी जरूरतों पर खर्च करती है.
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