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देश की हेल्थ का मीटर हाई, पहली बार हमारा विदेशी मुद्रा भंडार बढ़कर हुआ इतना
हमारा विदेशी मुद्रा भंडार पिछले सप्ताह बढ़कर अपने अब तक के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया है. इस भंडार का भरा रहना देश के लिए ज़रूरी होता है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
विदेशी मुद्रा भंडार के मोर्चे पर भारत को फिर खिलखिलाने वाली खबर मिली है. बीते सप्ताह हमारे इस भंडार में भारी बढ़ोतरी हुई है. पहली बार देश का विदेशी मुद्रा भंडार 700 अरब डॉलर के पार चला गया है. हमारे के विदेशी मुद्रा भंडार में लगातार 7वें सप्ताह बढ़ोतरी की खबर सामने आई है. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के आंकड़े बताते हैं कि 27 सितंबर को समाप्त सप्ताह के दौरान देश के विदेशी मुद्रा भंडार में 12.588 अरब डॉलर की बढ़ोतरी हुई है और इसके साथ यह भंडार बढ़कर 704.885 अरब डॉलर तक पहुंच गया है. यह इसका अब तक का सर्वकालिक उच्च स्तर है.
FACs में भी बढ़ोत्तरी
RBI के अनुसार, आलोच्य सप्ताह के दौरान भारत की विदेशी मुद्रा आस्तियां (Foreign Currency Asset- FACs) भी बढ़ी हैं. 27 सितंबर को समाप्त सप्ताह के दौरान इसमें 10.468 अरब डॉलर की बढ़ोतरी हुई है. अब अपना FACs बढ़कर 616.154 अरब डॉलर हो गया है. बता दें कि कुल विदेशी मुद्रा भंडार में विदेशी मुद्रा आस्तियां एक महत्वपूर्ण हिस्सा होता है. इसी तरह, बीते सप्ताह देश का स्वर्ण भंडार (Gold Reserve) भी बढ़ा है. 2.184 अरब डॉलर की बढ़ोतरी के साथ यह 65.796 अरब डॉलर का हो गया है.
SDR में भी इजाफा
इतना ही नहीं, बीते सप्ताह देश के स्पेशल ड्रॉइंग राइट या विशेष आहरण अधिकार (SDR) में भी इजाफा देखने को मिला. समीक्षाधीन सप्ताह के दौरान SDR में 8 मिलियन डॉलर की बढ़ोत्तरी हुई और यह 18.547 अरब डॉलर हो गया. हालांकि, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के पास रखे हुए भारत के रिजर्व मुद्रा भंडार में कमी हुई है. यह घटकर 4.387 अरब डॉलर रह गया है. यह लगातार दूसरा सप्ताह है जब इसमें गिरावट दर्ज की गई है.
देश की हेल्थ का मीटर
अब चलिए यह भी जान लेते हैं कि विदेशी मुद्रा भंडार आखिर क्या होता है और इस भंडार का भरा रहना क्यों ज़रूरी है, विदेशी मुद्रा भंडार का पर्याप्त संख्या में होना हर देश के लिए महत्वपूर्ण है. इसे देश की हेल्थ का मीटर कहा जाए तो गलत नहीं होगा. इसमें विदेशी करेंसीज, गोल्ड रिजर्व, SDR, IMF के पास जमा राशि और ट्रेजरी बिल्स आदि आते हैं और इन्हें केंद्रीय बैंक या अन्य मौद्रिक संस्थाएं संभालती हैं. इन संस्थाओं का काम पेमेंट बैलेंस की निगरानी करना, मुद्रा की विदेशी विनिमय दर पर नज़र रखना और वित्तीय बाजार स्थिरता बनाए रखना है. विदेशी मुद्रा भंडार में दूसरे देशों के केंद्रीय बैंकों की ओर से जारी की जाने वाली मुद्राएं शामिल होती हैं. अधिकांश विदेशी मुद्रा भंडार में सबसे बड़ा भाग US डॉलर के रूप में होता है.
इसलिए है महत्वपूर्ण
किसी भी देश के लिए विदेशी मुद्रा भंडार काफी महत्वपूर्ण होता है और इसका इस्तेमाल देश की देनदारियों को पूरा करने के साथ ही कई कामों में किया जाता है. वैसे, दुनिया के अधिकतर देश अपना विदेशी मुद्रा भंडार डॉलर में रखना पसंद करते हैं, क्योंकि अधिकांश व्यापार डॉलर में ही होता है. लेकिन इसमें सीमित संख्या में ब्रिटिश पाउंड, यूरो और जापानी येन भी हो सकते हैं. विदेशी मुद्रा भंडार का सबसे पहला उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि यदि रुपया तेजी से नीचे गिरता है या पूरी तरह से दिवालिया हो जाता है तो RBI के पास बैकअप फंड मौजूद हो. इसके साथ ही गिरते रुपए को संभालने के लिए आरबीआई भारतीय मुद्रा बाजार में डॉलर को बेच सकता है. यदि किसी देश का विदेशी मुद्रा भंडार अच्छी स्थिति में है, तो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश की छवि भी निखरती है, क्योंकि उस स्थिति में व्यापारिक देश अपने भुगतान के बारे में सुनिश्चित हो सकते हैं.
कमी से कई नुकसान
विदेशी मुद्रा भंडार कम होने से कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है. इससे देश की अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल असर पड़ता है. इससे देश के लिए आयात बिल का भुगतान करना मुश्किल हो जाता है. इस भंडार के भरे रहने से संकट के समय भी देश एक आरामदायक स्थिति का अनुभव कर सकता है. सरकार और आरबीआई किसी भी बाहरी या अंदरुनी वित्तीय संकट से निपटने में सक्षम हो जाते हैं. RBI देश के विदेशी मुद्रा भंडार के कस्टोडियन या मैनेजर के रूप में कार्य करता है. उसे कार्य सरकार से साथ मिलकर तैयार किए गए पॉलिसी फ्रेमवर्क के अनुसार करना होता है. रिजव बैंक रुपए की स्थिति को मजबूत रखने के लिए विदेशी मुद्रा भंडार का इस्तेमाल करता है. एक रिपोर्ट के अनुसार, देश का 64% विदेशी मुद्रा भंडार विदेशों में ट्रेजरी बिल आदि के रूप में होता है और यह मुख्य रूप से अमेरिका में रखा होता है.
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