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ग्लोबल हीट एंड कूलिंग फोरम: जलवायु परिवर्तन के खिलाफ ठोस कदम उठाने का आह्वान

जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए सिर्फ केंद्र सरकार का प्रयास ही नहीं, बल्कि राज्य सरकार, स्थानीय समुदायों, व्यवसायों, और शोधकर्ताओं के सहयोग की भी जरूरत है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago

दिल्ली स्थित भारत मंडपम में सोमवार को नेचुरल रिसोर्सेज डिफेंस काउंसिल (NRDC) द्वारा आयोजित दो दिवसीय ग्लोबल हीट एंड कूलिंग फोरम (Global Heat & Cooling Forum: Solutions for a Warming World) का शुभारंभ हुआ. यह कार्यक्रम वर्ल्ड बैंक (World Bank Group) व विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय (Department of Science and Technology) और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है, जिसमें पॉलिसी मेकर्स, इंडस्ट्री लीडर्स, और जलवायु परिवर्तन से जुड़ी समस्याओं के विशेषज्ञों ने गर्मी से बचाव, सस्टेनेबल कूलिंग समाधानों, और जलवायु परिवर्तन पर विचार-विमर्श किया.  

डॉ. चंद्रशेखर पेम्मासानी ने बताई जलवायु परिवर्तन के खतरे पर चिंता
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि, ग्रामीण विकास और संचार केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. चंद्रशेखर पेम्मासानी ने अपने उद्घाटन भाषण में कहा कि यह फोरम जलवायु परिवर्तन से जुड़ी समस्याओं का समाधान ढूंढने के लिए समय की सबसे उपयुक्त आवश्यकता है. उन्होंने विशेष रूप से दिल्ली में बढ़ते तापमान की ओर इशारा किया, जहां 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर का तापमान पहुंचने की संभावना है. डॉ. पेम्मासानी ने कहा कि जलवायु परिवर्तन अब सिर्फ एक दूर का खतरा नहीं है, बल्कि यह आज हमारे सामने सबसे बड़ी चुनौती बन चुकी है.

उन्होंने आगे कहा कि गर्मी का प्रभाव सिर्फ पर्यावरण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हमारी अर्थव्यवस्था, स्वास्थ्य और सामाजिक ताने-बाने को भी प्रभावित कर रहा है. भारत में 2009 से अब तक 11,000 से अधिक लोग हीट वेव्स के कारण जान गंवा चुके हैं. उनका कहना था कि जलवायु परिवर्तन को हल करने के लिए हमें ठोस कदम उठाने होंगे, और इसलिए भारत सरकार ने पहले ही व्यापक कूलिंग एक्शन प्लान तैयार किया है.

प्रधानमंत्री मोदी का कूलिंग एक्शन प्लान

डॉ. पेम्मासानी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत द्वारा किए गए प्रयासों की सराहना की. उन्होंने बताया कि भारत कूलिंग के क्षेत्र में एक कदम और आगे बढ़ चुका है, जहां ऊर्जा-कुशल कूलिंग प्रणालियों को बढ़ावा दिया जा रहा है और हानिकारक रेफ्रिजरेंट्स का उपयोग खत्म किया जा रहा है. साथ ही, संवेदनशील समुदायों को प्राथमिकता देते हुए कूलिंग समाधानों को सुलभ और सस्ती बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं.

ग्रामीण भारत में जलवायु परिवर्तन का प्रभाव

गांवों में बढ़ती गर्मी, अनियमित वर्षा और सूखा जलवायु परिवर्तन के प्रमुख प्रभाव हैं. यह समस्या विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में गंभीर है, जहां कृषि, जल उपलब्धता, और सार्वजनिक स्वास्थ्य पर इसका असर साफ देखा जा सकता है. हालांकि, ग्रामीण भारत को सिर्फ संवेदनशील नहीं बल्कि समाधान का केंद्र भी माना जा सकता है. डॉ. पेम्मासानी ने कई सरकारी योजनाओं का जिक्र करते हुए बताया कि किस तरह ग्रामीण भारत में जलवायु-अनुकूल बुनियादी ढांचे के निर्माण पर काम किया जा रहा है. 

मनरेगा और जल जीवन मिशन

उन्होंने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (MNREGA) और प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना की तारीफ की, जिनके तहत जल-संरक्षण प्रणालियों और छांव के पौधों की स्थापना की जा रही है. इसके अतिरिक्त, जल जीवन मिशन के तहत हर घर को स्वच्छ पानी उपलब्ध कराया जा रहा है. उन्होंने यह भी बताया कि प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत जलाशयों के विकास के लिए काम किया जा रहा है ताकि मृदा स्वास्थ्य और जल उपलब्धता में सुधार हो.

SHIELD परियोजना और प्रधानमंत्री आवास योजना

डॉ. पेम्मासानी ने SHIELD परियोजना की भी चर्चा की, जिसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में घरों को ठंडा और ऊर्जा-कुशल बनाना है. इस परियोजना के तहत, नए घरों के निर्माण में जलवायु-अनुकूल डिजाइनों और ऊर्जा-कुशल प्रौद्योगिकियों को शामिल किया जा रहा है. इसके साथ ही, प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 30 मिलियन से अधिक घर बनाए गए हैं जो ग्रामीण परिवारों को सुरक्षित और लचीला आवास प्रदान कर रहे हैं. 

पारंपरिक निर्माण विधियों का इस्तेमाल

राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) के सलाहकार सफी अहसान रिजवी ने कहा कि 2023 और 2024 को पृथ्वी पर अब तक के सबसे गर्म वर्षों के रूप में दर्ज किया गया है. यह जलवायु परिवर्तन का स्पष्ट संकेत है, जिसे हर देश और नीति निर्माता गंभीरता से देख रहा है. उन्होंने भारत जैसे विशाल देश में शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में शीतलन उपायों को लागू करने की आवश्यकता को भी प्रमुखता से रखा. उन्होंने पारंपरिक निर्माण विधियों की ओर भी इशारा किया, जैसे कि कूलिंग और वेंटिलेशन के लिए बरामदों और छायादार क्षेत्रों का पुनः प्रयोग, जो ग्रामीण क्षेत्रों में ठंडक को बढ़ावा देने में मदद कर सकते हैं. साथ ही, शहरी क्षेत्रों में नई तकनीकों के प्रयोग की जरूरत पर भी जोर दिया.

नवाचार और तकनीकी समाधान

वहीं, विभाग विज्ञान और प्रौद्योगिकी (DST) की वैज्ञानिक डिवीजन प्रमुख अनीता गुप्ता ने बताया कि विज्ञान और तकनीक के माध्यम से ही हम जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने के लिए प्रभावी समाधान प्राप्त कर सकते हैं. उन्होंने भारत सरकार द्वारा चलाई जा रही जलवायु परिवर्तन से निपटने की राष्ट्रीय योजनाओं के बारे में बात की. इन योजनाओं का उद्देश्य गर्मी से निपटने के लिए नए तकनीकी समाधान विकसित करना है. अनीता गुप्ता ने यह भी बताया कि भारत स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में वैश्विक मंच "मिशन इनोवेशन" का हिस्सा है, जिसके तहत पिछले कुछ वर्षों में 13 मिलियन डॉलर का निवेश किया गया है. इस निवेश का अधिकांश हिस्सा ठंडक और हीटिंग के लिए नए समाधान विकसित करने में किया गया है.

वित्तीय समर्थन और सामूहिक प्रयास

इस अवसर पर एनआरडीसी के प्रेजिडेंट और सीईओ मनीष बापना ने भारत सरकार के प्रयासों की सराहना करते हुए, देश के सबसे कमजोर समुदायों के लिए जलवायु परिवर्तन से जुड़े खतरे कम करने के लिए निरंतर काम करने की आवश्यकता पर बल दिया. उन्होंने कहा कि संपन्न देशों और समुदायों को ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में कमी लाने के लिए अग्रणी भूमिका निभानी होगी. साथ ही, यह सुनिश्चित करना होगा कि समाज के कमजोर वर्गों पर इस संक्रमण का नकारात्मक प्रभाव न पड़े. शीतलन कार्य योजनाओं की सफलता स्थानीय सरकारों के सहयोग पर निर्भर करेगी, और यह सुनिश्चित करना होगा कि इन योजनाओं को सही ढंग से लागू किया जाए.

भारत सरकार ने अगले पांच वर्षों में आपदा शमन के लिए 30 बिलियन डॉलर का बजट तय किया है, जिसमें से शीतलन कार्य योजनाओं के लिए विशेष ध्यान दिया जाएगा. यह योजना गर्मी की तीव्रता को कम करने के लिए न केवल तकनीकी समाधान लाएगी, बल्कि समाज के हर स्तर तक पहुंचने के लिए सामूहिक सहयोग भी सुनिश्चित करेगी. अब वक्त आ गया है कि हम सभी मिलकर ठंडक और शीतलन के उपायों को लागू करने के लिए ठोस कदम उठाएं, ताकि भविष्य में जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से बेहतर तरीके से निपटा जा सके. इस कार्यक्रम में वर्ल्ड बैंक क्लाइमेट चेंज एंड डिजास्टर रिस्क मैनेजमेंट साउथ एशिया रीजन के प्रैक्टिस मैनेजर आभास झा, एनआरडीसी की कंट्री हेड दीपा बागई और एनआरडीसी के सीनियर डायरेक्टर समीर क्वात्रा भी मौजूद रहे. 

 


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