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Gensol Engineering के फाउंडर अनमोल सिंह जग्गी और पुनीत सिंह जग्गी ने दिया इस्तीफा
एक्सचेंज फाइलिंग में जेनसोल इंजीनियरिंग ने बताया कि प्रबंध निदेशक अनमोल सिंह जग्गी और पूर्णकालिक निदेशक पुनीत सिंह जग्गी ने अपना इस्तीफा दे दिया है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
विवादों से गुजर रही जेनसोल इंजीनियरिंग (Gensol Engineering Ltd.) के फाउंडर्स अनमोल सिंह जग्गी और पुनीत सिंह जग्गी ने कंपनी में अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है. अनमोल सिंह जग्गी कंपनी में मैनेजिंग डायरेक्टर के पद पर थे जबकि पुनीत जग्गी कंपनी में पूर्णकालिक डायरेक्टर थे. एक्सचेंज फाइलिंग के मुताबिक वो कंपनी में किसी भी कमिटी के सदस्य भी नहीं रहेंगे.
SEBI के ऑर्डर के बाद इस्तीफा
जग्गी भाईयों ने अपनी इस्तीफे में मार्केट रेगुलेटर की ओर से पिछले महीने भेजी गई चिट्ठी को वजह बताया है. 15 अप्रैल को जारी अपने अंतरिम आदेश में, SEBI ने दोनों को सिक्योरिटीज मार्केट में प्रवेश करने से रोक दिया और जेनसोल में किसी भी प्रमुख प्रबंधकीय पद पर रहने से बैन कर दिया था.
मार्केट रेगुलेटर SEBI ने अपनी जांच का हवाला देते हुए दावा किया कि कंपनी के पैसों को लग्जरी संपत्तियां खरीदने और प्रोमोटरों के निजी खर्चों के लिए डायवर्ट किया गया. जांच की सुई मुख्य रूप से 975 करोड़ रुपये के लोन के इर्द-गिर्द घूमी है, जो जेनसोल ने 6,400 इलेक्ट्रिक वाहनों की खरीद के लिए जुटाए गए थे, लेकिन केवल 4,704 इलेक्ट्रिक व्हीकल ही खरीदे गए, जिसकी कुल कीमत 567.73 करोड़ रुपये ही बैठती है. यानी करीब 200 करोड़ रुपये की रकम का कोई हिसाब नहीं मिला.
ऐसे हुआ पैसों का हेरफेर
आपको बता दें कि जेनसोल ने पावर फाइनेंस कॉर्प और इंडियन रिन्यूएबल एनर्जी डेवलपमेंट एजेंसी लिमिटेड (IREDA) से 977 करोड़ रुपये से ज्यादा का टर्म लोन हासिल किया था. हालांकि, केवल 4,707 इलेक्ट्रिक वाहन खरीदे गए. इन EVs को प्रोमोटर्स से जुड़े एक EV कैब ऑपरेटर ब्लूस्मार्ट को लीज पर दिया गया. SEBI के मुताबिक, एक वर्ष की अवधि में 262 करोड़ रुपये से अधिक की राशि का हिसाब नहीं मिला.
SEBI ने बताया था कैसे कंपनी के पैसों को घुमाया गया
SEBI ने कहा कि जेनसोल से गो ऑटो को EV खरीद के लिए पैसे को ट्रांसफर किया गया, लेकिन बाद में इसे वापस या जग्गी बंधुओं से जुड़ी अन्य संस्थाओं को डायवर्ट कर दिया गया और उन्होंने इसका इस्तेमाल अपनी निजी खर्चों में किया. SEBI ने बताया कि, IREDA लोन से 93.88 करोड़ रुपये गो ऑटो को ट्रांसफर किए गए. इसमें से 50 करोड़ रुपये कैपब्रिज वेंचर्स को ट्रांसफर किए गए और बाद में DLF कैमेलियास में एक लग्जरी अपार्टमेंट खरीदा गया जिसकी कीमत 42 करोड़ रुपये से ज्यादा थी. इतना ही नहीं, एक दूसरे मामले में गो ऑटो ने 40 करोड़ रुपये वेलरे सोलर इंडस्ट्रीज (Wellray Solar Industries Pvt Ltd) को भेजे, जिसने बाद में चार अन्य संस्थाओं को पैसे ट्रांसफर किए.
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