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मिठाई के डिब्बे से पर्सनलाइज्ड तोहफों तक, बदल रही फेस्टिव गिफ्टिंग की तस्वीर

प्रीमियम चॉकलेट, स्वास्थ्यवर्धक उत्पाद, स्मार्ट उपकरण और अनुभव आधारित उपहारों की बढ़ती मांग; छोटे शहरों तक पहुंचा महंगे और व्यक्तिगत उपहारों का चलन

रितु राणा 50 minutes ago

फेस्टिव सीजन अब करीब है. नवरात्र, दुर्गा पूजा, दशहरा, करवा चौथ और दिवाली जैसे प्रमुख त्योहारों के साथ उपहारों की खरीदारी भी जोर पकड़ने लगी है. भारत में इन त्योहारों पर मिठाई, सूखे मेवे और गिफ्ट देने की परंपरा लंबे समय से रही है, लेकिन बदलती जीवनशैली और उपभोक्ताओं की पसंद ने गिफ्टिंग के बाजार का स्वरूप बदलना शुरू कर दिया है. अब मिठाई और सामान्य ड्राई फ्रूट पैक उपहार के एकमात्र विकल्प नहीं रह गए हैं. उपभोक्ता ऐसे तोहफों को प्राथमिकता दे रहे हैं, जिनमें उपयोगिता, गुणवत्ता, व्यक्तिगत पसंद और भावनात्मक जुड़ाव नजर आए. इसी बदलाव के चलते प्रीमियम चॉकलेट, कारीगरों द्वारा तैयार खाद्य उत्पाद, बेकरी आइटम, स्वास्थ्य एवं सौंदर्य उत्पाद, तकनीकी उपकरण, होम डेकोर और अनुभव आधारित उपहार जैसी श्रेणियां तेजी से लोकप्रिय हो रही हैं.

 

एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत का गिफ्टिंग बाजार 2024 में 75.16 अरब डॉलर का था और 2030 तक इसके 92.32 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है. इस दौरान बाजार की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर 3.55 फीसदी रहने का अनुमान है. बाजार के विस्तार के साथ बदलाव सिर्फ खर्च की मात्रा में नहीं, बल्कि उपहार चुनने के तरीके में भी दिखाई दे रहा है. अब ग्राहक गिफ्ट की कीमत के साथ-साथ उसकी प्रासंगिकता, प्रस्तुति, व्यक्तिगत स्पर्श और सामने वाले की पसंद को भी महत्व दे रहे हैं.

मिठाई से आगे बढ़कर व्यक्तिगत पसंद पर जोर

गिफ्टिंग उद्योग के मुताबिक, त्योहारों में मिठाई की पारंपरिक भूमिका अभी भी बनी हुई है, लेकिन उपहार देना अब ज्यादा व्यक्तिगत होता जा रहा है. अवसर और प्राप्तकर्ता के हिसाब से चुने गए उपहारों की मांग में 45 फीसदी की वृद्धि देखी गई है. स्वादिष्ट खाद्य उत्पाद, फूल, स्वास्थ्यवर्धक उत्पाद, जीवनशैली से जुड़े सामान और व्यक्तिगत पसंद के अनुसार तैयार उपहारों में रुचि बढ़ रही है.

Consortium Gifts के संस्थापक और प्रबंध निदेशक गौरव भगत के मुताबिक, इस साल गिफ्टिंग पर खर्च बढ़ रहा है, लेकिन यह केवल अधिक खर्च करने का मामला नहीं है, बल्कि ज्यादा सोच-समझकर खर्च करने का चलन है.

उनके मुताबिक, जिन उपहार बजट में पहले 500-1,500 रुपये के आसपास खर्च होता था, वे अब कई मौकों पर 1,500-4,000 रुपये और 4,500 रुपये तक पहुंच रहे हैं. उनके अनुसार, 1,500-4,000 रुपये का खंड इस साल खास तौर पर महत्वपूर्ण है, जहां ग्राहक बेहतर गुणवत्ता, व्यक्तिगत पसंद के अनुसार तैयार उपहार और उपयोगिता तीनों चाहते हैं. करीब 2,500 रुपये के आसपास तैयार किए गए उपहारों में भी अच्छी मांग दिखाई दे रही है.

भगत कहते हैं कि अब गिफ्ट सिर्फ एक वस्तु नहीं रह गया है, बल्कि वह 'अर्थपूर्ण मूल्य' देने का माध्यम बन रहा है. स्वास्थ्य, तकनीक, जीवनशैली और अनुभव आधारित उपहार इसी बदलाव का हिस्सा हैं.

कंपनियों में सामान्य हैम्पर की जगह उपयोगी और व्यक्तिगत उपहार

त्योहारी मौसम में कॉरपोरेट गिफ्टिंग का स्वरूप भी बदल रहा है. कंपनियां कर्मचारियों और ग्राहकों को सिर्फ महंगे या बड़े हैम्पर देने के बजाय उनकी उपयोगिता, प्रासंगिकता और व्यक्तिगत पसंद पर ज्यादा ध्यान दे रही हैं. Consortium Gifts के संस्थापक और प्रबंध निदेशक गौरव भगत के मुताबिक, स्वास्थ्य एवं जीवनशैली, तकनीक, यात्रा, कार्यस्थल पर उपयोग होने वाले सामान और व्यक्तिगत पसंद के अनुसार तैयार उत्पादों की मांग बढ़ रही है. उनके अनुसार, गिफ्टिंग अब कर्मचारी जुड़ाव और कारोबारी संबंधों को मजबूत करने का माध्यम बनती जा रही है. आने वाले त्योहारी मौसम में 'एक जैसा हैम्पर सभी को देने' की जगह ऐसे चुने हुए उपहारों की भूमिका बढ़ सकती है, जिनमें प्राप्तकर्ता की जीवनशैली, भूमिका और पसंद को ध्यान में रखा जाए. 2025 में स्वास्थ्य केंद्रित छुट्टियां, कौशल सीखने की सदस्यता, यात्रा वाउचर और व्यक्तिगत रूप से तैयार हैम्पर जैसे विकल्पों की ओर भी यह बदलाव दिखाई दिया था.

Quice Marketing Pvt. Ltd. के संस्थापक राजीव चंद्रवंशी भी कॉरपोरेट गिफ्टिंग में इसी बदलाव को रेखांकित करते हैं. उनके मुताबिक, कंपनियां अब ऐसे उपहार चाहती हैं जो उपयोगी होने के साथ बेहतर और व्यक्तिगत भी लगें. कॉरपोरेट और कारोबार से कारोबार वाले खंड में व्यक्तिगत रूप से तैयार प्रचार सामग्री, प्रीमियम हैम्पर, चॉकलेट, स्वादिष्ट खाद्य उत्पाद, सूखे मेवे, स्वास्थ्यवर्धक उत्पाद, तकनीकी सहायक उपकरण और उपयोगी सामान की मांग बढ़ रही है. चंद्रवंशी कहते हैं कि पहले सवाल होता था कि 'इस बजट में क्या गिफ्ट दिया जा सकता है?', जबकि अब सवाल बदलकर यह हो गया है कि 'जिसे उपहार दे रहे हैं, उसके लिए क्या उपयोगी और प्रासंगिक होगा?' उनके मुताबिक, सोच-समझकर तैयार किया गया 500-1,000 रुपये का उपहार भी मजबूत कारोबारी छाप छोड़ सकता है. वह कहते हैं, 'मेरे लिए अच्छा कॉरपोरेट गिफ्ट वह है जो प्राप्त करने वाले के लिए उपयोगी हो और ब्रांड के लिए यादगार.'

महंगा नहीं, बेहतर और उपयोगी उपहार

गिफ्टिंग बाजार में प्रीमियम उत्पादों का चलन जरूर बढ़ रहा है, लेकिन विशेषज्ञों के मुताबिक इसका मतलब केवल महंगे गिफ्ट खरीदना नहीं है. ग्राहक अब 'महंगा' नहीं, बल्कि 'पैसे के अनुरूप बेहतर' उपहार तलाश रहा है.

चंद्रवंशी के मुताबिक, प्रीमियम अनुभव सिर्फ उत्पाद की कीमत से नहीं बनता. उनके अनुसार, 'उत्पाद + व्यक्तिगत पसंद + पैकेजिंग + प्रस्तुति + ब्रांड की कहानी = प्रीमियम अनुभव'.

वहीं Bakingo के सह-संस्थापक हिमांशु चावला के मुताबिक, गिफ्टिंग में प्रीमियम उत्पादों का चलन दिखाई दे रहा है, लेकिन उपभोक्ता केवल महंगे उत्पादों की ओर नहीं जा रहे हैं. अब गिफ्ट की गुणवत्ता, पैकेजिंग, विविधता और व्यक्तिगत स्पर्श अधिक महत्वपूर्ण हो गया है.

Bakingo के लिए करीब 500-1,500 रुपये की कीमत वाली श्रेणी ऐसे ग्राहकों के लिए महत्वपूर्ण है, जो अपेक्षाकृत सुलभ कीमत में बेहतर और आकर्षक गिफ्टिंग अनुभव चाहते हैं. कंपनी की त्योहारी हैम्पर श्रेणी में 599, 899, 1,099 और 1,399 रुपये जैसे अलग-अलग मूल्य बिंदु शामिल हैं.

चावला के मुताबिक, इससे पता चलता है कि प्रीमियम गिफ्टिंग अब केवल महंगे उपहारों के खंड तक सीमित नहीं है. उपभोक्ता अपेक्षाकृत सुलभ कीमत पर बेहतर पैकेजिंग, अच्छी गुणवत्ता और सोच-समझकर तैयार किए गए गिफ्ट के लिए खर्च करने को तैयार हैं.

बेकरी और स्वादिष्ट खाद्य उत्पाद बने मिठाई के आधुनिक विकल्प

त्योहारी गिफ्टिंग में मिठाई की जगह पूरी तरह खत्म नहीं हुई है, लेकिन उसके विकल्पों की संख्या जरूर बढ़ गई है. Bakingo के हिमांशु चावला के मुताबिक, प्रीमियम चॉकलेट, बेकरी और स्वादिष्ट खाद्य उत्पाद, फ्यूजन केक, व्यक्तिगत पसंद के अनुसार तैयार हैम्पर और अनुभव आधारित उपहारों में रुचि बढ़ रही है.

उनके अनुसार, केक, कुकीज, ब्राउनी, चॉकलेट और चुने हुए उत्पादों वाले हैम्पर में उत्सव और उपहार देने, दोनों का अनुभव मिलता है. यही वजह है कि बेकरी आधारित गिफ्टिंग पारंपरिक मिठाई के आधुनिक विकल्प के तौर पर अपनी जगह बना रही है. इस बदलाव का असर उपहार की प्रस्तुति पर भी दिख रहा है. अब केवल उत्पाद नहीं, बल्कि पैकेजिंग, विषय, संदेश और प्रस्तुति भी पूरे उपहार अनुभव का हिस्सा बन गए हैं.

'शुद्धता और सेहत' भी बन रही है उपहार देने की नई भाषा

जहां एक ओर बेकरी, चॉकलेट और तकनीक जैसी श्रेणियां बढ़ रही हैं, वहीं दूसरी तरफ स्वास्थ्य और पोषण से जुड़े उत्पाद भी त्योहारी गिफ्टिंग का हिस्सा बन रहे हैं. FreshTerra के संस्थापक अरविंद मेदीरत्ता के मुताबिक, पारंपरिक मिठाइयों और अधिक चीनी वाली चॉकलेट से हटकर मांग स्वास्थ्य और पोषण से जुड़े उत्पादों की ओर बढ़ रही है. उनके अनुसार, उपभोक्ता अब ऐसा उपहार देना चाहते हैं जो शुद्धता और सेहत से जुड़ा हो. इसी वजह से विदेशी मेवे, सूखे मेवे, कोल्ड-प्रेस्ड तेल, ए2 दूध से बना गिर गाय का घी और एकल स्रोत वाले मसालों से तैयार स्वास्थ्यवर्धक हैम्पर जैसी श्रेणियों पर जोर बढ़ा है.

मेदीरत्ता के मुताबिक, शहरी उपभोक्ता 1,500-3,500 रुपये की कीमत वाली श्रेणी में साफ-सुथरे और प्रीमियम खाद्य हैम्पर पर खर्च करने को तैयार हैं. उनके अनुसार, खरीदार अब दिखावे से ज्यादा इस बात पर ध्यान दे रहे हैं कि उपहार में दिया जा रहा उत्पाद रोजमर्रा की जिंदगी में कितना उपयोगी और स्वास्थ्यवर्धक है.

मेदीरत्ता 2026 के त्योहारी गिफ्टिंग चलन को 'शुद्धता और स्वस्थ जीवनशैली का उपहार' के रूप में देखते हैं. उनके मुताबिक, साफ-सुथरे उत्पाद, पारदर्शिता और उत्पाद कहां से आया है, इसकी जानकारी जैसे पहलू गिफ्टिंग के फैसले में ज्यादा महत्वपूर्ण होते जा रहे हैं.

छोटे शहरों में भी बढ़ रही प्रीमियम गिफ्टिंग

प्रीमियम गिफ्टिंग का विस्तार अब दिल्ली-मुंबई जैसे महानगरों तक सीमित नहीं है. डिजिटल कारोबार और घर तक डिलीवरी ने छोटे शहरों के ग्राहकों के लिए भी पहले सीमित रहे गिफ्टिंग विकल्पों को सुलभ बनाया है. गौरव भगत के मुताबिक, दूसरे और तीसरे स्तर के शहरों में प्रीमियम उत्पादों का चलन तेजी से आम हो रहा है. उनके अनुसार, ग्राहक अब केवल ब्रांडेड गिफ्ट नहीं, बल्कि व्यक्तिगत, उपयोगी और आकांक्षी उत्पाद चाहते हैं.

हिमांशु चावला भी इस बदलाव को महत्वपूर्ण मानते हैं. उनके मुताबिक, लखनऊ, इंदौर, जयपुर, चंडीगढ़, कोयंबटूर, कोच्चि और भुवनेश्वर जैसे शहरों में प्रीमियम और बेहतर तरीके से चुने गए गिफ्टिंग विकल्पों की मांग बढ़ रही है. उनके अनुसार, ऑनलाइन गिफ्टिंग ने इस बदलाव को गति दी है. अब उपभोक्ता स्थानीय बाजार में उपलब्ध विकल्पों तक सीमित नहीं हैं और अलग-अलग शहरों में परिवार, दोस्तों और सहयोगियों के लिए गिफ्ट भेज सकते हैं.

ई-कॉमर्स ने बढ़ाई आखिरी समय की गिफ्टिंग

त्योहारी गिफ्टिंग में सुविधा अब उत्पाद चुनने जितनी ही महत्वपूर्ण होती जा रही है. ई-कॉमर्स ने आखिरी समय की गिफ्टिंग को आसान बनाया है, जहां ग्राहक त्योहार के दिन या कुछ घंटे पहले भी गिफ्ट भेज सकते हैं. हिमांशु चावला के मुताबिक, उपलब्धता और तेज डिलीवरी अब गिफ्टिंग अनुभव का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गई हैं. हालांकि, उनके अनुसार सुविधा केवल ई-कॉमर्स तक सीमित नहीं है. उसी दिन और तय समय पर डिलीवरी भी ग्राहकों को अपनी जरूरत के मुताबिक गिफ्ट भेजने का विकल्प देती है.

राजीव चंद्रवंशी के मुताबिक, ई-कॉमर्स की ताकत गति, सुविधा और उपलब्धता है, जबकि व्यक्तिगत कॉरपोरेट गिफ्टिंग की ताकत ब्रांड पहचान, व्यक्तिगत पसंद, बड़ी संख्या में आपूर्ति और कारोबारी संबंध मजबूत करना है. उनके अनुसार, 'गति गिफ्टिंग की जरूरत को पूरा कर सकती है, लेकिन व्यक्तिगत स्पर्श गिफ्टिंग को अर्थपूर्ण बनाता है.'

FreshTerra के अरविंद मेदीरत्ता के मुताबिक, ई-कॉमर्स ने आखिरी समय की खरीदारी में सुविधा जरूर बढ़ाई है, लेकिन जब ग्राहक किसी खास व्यक्ति को गिफ्ट देना चाहता है तो उत्पाद कहां से आया, उसकी ताजगी और प्रस्तुति जैसे पहलू भी महत्वपूर्ण होते हैं.

गिफ्टिंग अब त्योहार के खर्च से ब्रांड अनुभव तक

कॉरपोरेट गिफ्टिंग में आ रहे बदलाव का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि कंपनियां इसे अब सिर्फ त्योहार के दौरान होने वाला खर्च नहीं मान रही हैं. गिफ्ट के जरिए कर्मचारी जुड़ाव, ग्राहक संबंध और ब्रांड पहचान को मजबूत करने की कोशिश भी दिखाई दे रही है.

राजीव चंद्रवंशी के मुताबिक, कॉरपोरेट गिफ्टिंग धीरे-धीरे कारोबारी संबंध बनाने और ब्रांड के बारे में बताने का माध्यम बन रही है. उनके अनुसार, व्यक्तिगत रूप से तैयार करने का मतलब केवल किसी उत्पाद पर लोगो लगा देना नहीं है. 'व्यक्तिगत रूप से तैयार करने का असली मतलब है, उत्पाद को ब्रांड अनुभव में बदलना.'

उनका कहना है कि कंपनियां अब यह सोच रही हैं कि कर्मचारी को क्या पसंद आएगा, ग्राहक के कारोबार के साथ कौन-सा उत्पाद प्रासंगिक है और गिफ्ट ब्रांड की पहचान को किस तरह पेश करेगा. इसी वजह से उपयोगिता, बेहतर प्रस्तुति, पर्यावरण अनुकूलता, तकनीक और अनुभव अब कॉरपोरेट गिफ्टिंग रणनीति का हिस्सा बन रहे हैं.

आगे की तस्वीर: कम, लेकिन बेहतर और अर्थपूर्ण गिफ्ट

गिफ्टिंग बाजार में हो रहे बदलावों को देखें तो एक बात स्पष्ट है कि उपभोक्ता अब केवल मात्रा या कीमत पर निर्णय नहीं ले रहा. वह गिफ्ट की प्रासंगिकता, गुणवत्ता, प्रस्तुति और व्यक्तिगत पसंद को भी महत्व दे रहा है.

गौरव भगत इसे 'कम, लेकिन बेहतर और अधिक अर्थपूर्ण' देने की बदलती सोच से जोड़ते हैं. उनके मुताबिक, प्रीमियम उत्पादों का अगला चरण सिर्फ महंगा गिफ्ट नहीं, बल्कि ऐसा गिफ्ट है जो प्राप्तकर्ता की जीवनशैली और पसंद के अनुरूप हो.

वहीं, राजीव चंद्रवंशी के अनुसार, आने वाले समय में कॉरपोरेट गिफ्टिंग की प्रतिस्पर्धा सिर्फ इस बात पर नहीं होगी कि किस कंपनी ने सबसे महंगा गिफ्ट दिया, बल्कि इस बात पर होगी कि 'किस ब्रांड ने गिफ्ट के जरिए अर्थपूर्ण छाप छोड़ी.'

इस तरह भारत का त्योहारी गिफ्टिंग बाजार अब सिर्फ मिठाई और हैम्पर का बाजार नहीं रह गया है. यह प्रीमियम उत्पादों, व्यक्तिगत पसंद, स्वास्थ्य, तकनीक, सुविधा और अनुभव के मेल से बन रहा एक बड़ा उपभोक्ता और कॉरपोरेट बाजार बनता जा रहा है.


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