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विदेशी निवेशकों ने सितंबर में बरसाए खूब पैसे, तोड़ डाले सारे रिकॉर्ड
अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व द्वारा प्रमुख ब्याज दरों में 0.50 प्रतिशत की कटौती के बाद FPI का भारतीय बाजार में निवेश लगातार बढ़ रहा है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
घरेलू बाजार में जारी ऐतिहासिक उड़ान के बीच विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) का रुख भी बदला नजर आने लगा है. अमेरिका में ब्याज दर कटौती के बाद तो भारतीय बाजार में विदेशी निवेशकों की खरीदारी को पंख लगे हुए हैं. इस महीने उन्होंने अभी तक 57 हजार करोड़ से ज्यादा के भारतीय शेयरों की खरीदारी कर ली है, इस निवेश के साथ ही 2024 में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) का इक्विटी में कुल निवेश 1 लाख करोड़ रुपये के आंकड़े को पार कर गया है.
सितंबर बना सबसे शानदार महीना
नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड (एनएसडीएल) के आंकड़ों के अनुसार, एफपीआई भारतीय शेयरों में 57,359 करोड़ रुपये डाल चुके हैं. यह सिर्फ इस साल किसी एक महीने में एफपीआई से इंडियन इक्विटीज में आए निवेश का सबसे बड़ा आंकड़ा ही नहीं है, बल्कि यह अब तक के सबसे शानदार महीनों में एक बन गया है. यह दिसंबर 2023 के बाद से सबसे अधिक निवेश है, जब FPI ने इक्विटी में 66,135 करोड़ रुपये का निवेश किया था.
1 लाख करोड़ के पार निकला निवेश
एफपीआई के द्वारा सितंबर महीने में भारतीय शेयरों की हुई जमकर खरीदारी में और भी रिकॉर्ड बने-बिगड़े हैं. महीने में 57 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा के शेयरों की खरीदारी से इंडियन इक्विटीज में एफपीआई के निवेश का आंकड़ा इस साल में पहली बार 1 लाख करोड़ रुपये के पार निकल गया है. महीने के दौरान 20 सितंबर को विदेशी निवेशकों ने एक ही दिन में 14,064 करोड़ रुपये के शेयरों की खरीदारी की थी, जो करीब 3 साल का नया रिकॉर्ड है. उससे पहले एक दिन में सबसे बड़ी खरीदारी का रिकॉर्ड 6 मई 2020 को बना था. तब विदेशी निवेशकों ने एक दिन में 17,123 करोड़ रुपये के भारतीय शेयरों की खरीदारी की थी.
इस कारण बढ़ गई FPI की रफ्तार
अमेरिका में सेंट्रल बैंक फेडरल रिजर्व ने लंबे इंतजार के बाद इसी महीने से ब्याज दरों में कटौती की शुरुआत की है. फेडरल रिजर्व ने 18 सितंबर को ब्याज में कटौती का ऐलान किया. उसने बाजार के अनुमानों से बढ़कर 0.50 फीसदी की कटौती एक झटके में कर दी. बाजार 0.25 फीसदी तक की कटौती की उम्मीद कर रहा था. यूएस फेड के इस फैसले से बड़े विदेशी निवेशक यूएस बॉन्ड से पैसे निकालने लगे. यह फंड मुख्य रूप से उभरते बाजारों की ओर जा रहा है, जिसका सबसे ज्यादा फायदा भारतीय शेयर बाजार को हो रहा है.
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