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Adani के लिए सब अच्छा ही अच्छा, दौलत बढ़ रही और विदेशी निवेशकों का भरोसा भी!

विदेशी निवेशकों ने अडानी समूह की कई लिस्टेड कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago

गौतम अडानी (Gautam Adani) के हर लिहाज से अच्छे दिन लौट आए हैं. उनकी लिस्टेड कंपनियां स्टॉक मार्केट में अच्छा प्रदर्शन का रही हैं. उनकी पर्सनल वेल्थ में भी इजाफा हुआ है. इस साल अब तक अडानी अपनी संपत्ति में 15.2 अरब डॉलर जोड़ चुके हैं. इसके अलावा, उनकी विस्तार की योजनाएं फिर आकार ले रही हैं. पिछले साल की शुरुआत में आई हिंडनबर्ग की रिपोर्ट का असर समाप्त होने के बाद अडानी अपनी पुरानी फॉर्म में वापस आ गए हैं और इस वजह से विदेशी निवेशकों का उनकी कंपनियों पर भरोसा बढ़ा है.   

छह कंपनियों में बढ़ाई हिस्सेदारी
एक रिपोर्ट के अनुसार, अडानी समूह की लिस्टेड कंपनियों में विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) ने अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई है. मार्च तिमाही में FIIs ने अडानी ग्रुप की शेयर बाजार में सूचीबद्ध 10 में से छह कंपनियों में स्टेक बढ़ाया है. आज यानी मंगलवार के गिरावट वाले बाजार में भी करीब 3 प्रतिशत की बढ़त हासिल करने वाले Adani Power में विदेशी निवेशकों की हिस्सेदारी दिसंबर तिमाही में 15.86% थी, जो मार्च तिमाही में बढ़कर 15.19% हो गई. इस शेयर ने बीते 1 साल में अपने निवेशकों को 219.87% का शानदार रिटर्न दिया है.

म्यूचुअल फंड्स ने भी लगाया दांव
इसी तरह, Adani Ports में विदेशी निवेशकों की हिस्सेदारी 14.98% हो गई है, जो दिसंबर तिमाही में 14.72 प्रतिशत थी. FIIs ने अडानी विल्मर, अडानी टोटल गैस और NDTV में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई है. इसके साथ ही म्यूचुअल फंड्स ने भी मार्च तिमाही में समूह की कुछ कंपनियों में अपना स्टेक बढ़ाया है. जबकि अडानी ग्रीन एनर्जी में उनकी हिस्सेदारी पहले जितनी ही है. यानी इसमें न इजाफा हुआ है, न ही कोई कमी आई है. जिस कंपनी को गौतम अडानी बेचने का मन बना रहे हैं उस अडानी विल्मर में विदेशी निवेशकों की हिस्सेदारी बढ़कर 0.77 प्रतिशत हो गई है.

इनमें कुछ कम की हिस्सेदारी
वहीं, कुछ कंपनियों में FIIs ने अपनी हिस्सेदारी कम भी की है. जैसे, अडानी समूह की सीमेंट कंपनी ACC में मार्च तिमाही में विदेशी निवेशकों की हिस्सेदारी 6.17% रही, जो दिसंबर के 6.24% से कम है. इसी तरह, Ambuja Cements में विदेशी निवेशकों के पास पहले 11.88% हिस्सेदारी थी, जो मार्च तिमाही में घटकर 11.11% रह गई. अडानी एंटरप्राइजेज में विदेशी निवेशकों की हिस्सेदारी जहां दिसंबर तिमाही में 14.65% थी, वो मार्च में 14.41% रह गई. हालांकि, इन तीनों कंपनियों में म्यूचुअल फंड्स ने अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई है. उधर, देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी एलआईसी ने अडानी ग्रुप की दो सीमेंट कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी मार्च तिमाही में कम कर दी है. LIC की अडानी ग्रुप की कुल 7 कंपनियों में हिस्सेदारी है.

क्या विल्मर का साथ छोड़ देंगे Adani?
विदेशी निवेशकों ने जिस अडानी विल्मर पर भरोसा बढ़ाया है, गौतम अडानी उसका साथ छोड़ना चाहते हैं. हालांकि, उन्हें इसके लिए अब तक सही खरीदार नहीं मिल पाया है. साल की शुरुआत में खबर आई कि प्राइसिंग को लेकर बात नहीं बन पा रही है, इसलिए अडानी समूह सही डील मिलने तक इंतजार करेगा. अडानी समूह और सिंगापुर के विल्मर ग्रुप की पार्टनरशिप में अडानी विल्मर (Adani Wilmar) अस्तित्व में आई थी. कंपनी फॉर्च्यून ब्रैंड (Fortune Brand) नाम से खाद्य तेल और पैकेज्ड ग्रोसरी बेचती है. Adani Wilmar में हिस्सेदारी की बात करें, तो अडानी ग्रुप की 43.97% और विल्मर इंटरनेशनल की इसमें 43.97 प्रतिशत हिस्सेदारी है. जबकि कंपनी में पब्लिक शेयरहोल्डिंग 12.06 प्रतिशत है.  

क्यों बेच रहे हैं हिस्सेदारी?
अडानी समूह (Adani Group) की तरफ से इस बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई है, लेकिन माना जा रहा है कि समूह इंफ्रास्ट्रक्चर पर फोकस बढ़ाना चाहता है. इसके अलावा, विल्मर का घाटा भी समूह को इसका साथ छोड़ने के लिए मजबूर कर रहा है. कंपनी को पिछले वित्त वर्ष की जून तिमाही में 79 करोड़ रुपए का घाटा हुआ था. खाने के तेल की कीमत में आई कमी और हाई-कॉस्ट इंवेंट्री के कारण उसे नुकसान का सामना करना पड़ा. इसके अलावा, वित्त वर्ष 2023-24 के दूसरे क्वार्टर (Q2FY24) के नतीजे भी अच्छे नहीं रहे थे. जुलाई-सितंबर तिमाही में कंपनी को 131 करोड़ रुपए का लॉस हुआ. जबकि इससे पहले के पिछले वित्त वर्ष के समान अवधि के दौरान कंपनी ने 48.76 करोड़ का मुनाफा कमाया था. हालांकि, छह अप्रैल जो जारी बिजनेस अपडेट में कंपनी ने मजबूती की बात कही है.

क्या-क्या बेचती है कंपनी?
अडानी विल्मर ने IPO के जरिए 3600 करोड़ रुपए जुटाए थे. मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि Adani Wilmar पर फोकस करने के बजाए अडानी अपने कोर बिजनेस पर ध्यान देना चाहते हैं, जहां ग्रोथ की संभावना काफी ज्यादा है. लिहाजा, इस जॉइंट वेंचर से अलग होने से अडानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड को अपने कोर बिजनस के लिए पैसा मिल जाएगा. विल्मर सिंगापुर की कंपनी है, जिसकी स्थापना Martua Sitorus और Kuok Khoon Hong ने सन 1991 में की थी. जबकि अडानी एंटरप्राइजेज और विल्मर के बीच साझेदारी 1999 में हुई थी और इससे Adani Wilmar अस्तित्व में आई थी. Adani Wilmar खाने के तेल से लेकर आटा, चावल, दाल-चीनी तक बेचती है. भारत में इसका मुकाबला ITC और हिंदुस्तान यूनिलीवर से है.


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