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ऑल टाइम हाई पर विदेशी मुद्रा भंडार, बनाया अब तक का सबसे बड़ा रिकॉर्ड
साल 2024 में भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में 68 बिलियन डॉलर से ज्यादा का इजाफा हुआ है और 700 बिलियन डॉलर के ऐतिहासिक हाई को छूने से केवल 8 बिलियन डॉलर दूर है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
देश की अर्थव्यवस्था के लिए एक और अच्छी खबर आई है. देश का विदेशी मुद्रा भंडार नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है. भारत के विदेशी मुद्रा भंडार ने एक नया रिकॉर्ड बना लिया है. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक भारत का विदेशी मुद्रा भंडार अब तक के सबसे ऊंचे स्तर 692.30 अरब डॉलर पर पहुंच गया है.
कितना बढ़ा भारत का विदेशी मुद्रा भंडार
भारतीय रिजर्व बैंक (Reserve Bank of India) से जारी आंकड़ों के मुताबिक 20 सितंबर 2024 को समाप्त सप्ताह के दौरान भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में 2.84 अरब डॉलर की बढ़ोतरी हुई है. इसी के साथ अपना विदेशी मुद्रा भंडार अब बढ़ कर 692.30 अरब डॉलर तक पहुंच गया है, जो कि अब तक का सर्वकालिक स्तर है. यह लगातार छठा सप्ताह है जबकि अपने विदेशी मुद्रा भंडार में बढ़ोतरी हुई है.
कहां से आया कितना पैसा?
जब विदेशी मुद्रा भंडार का कैलकुलेशन किया जाता है, तो उसमें सिर्फ विदेशी मुद्रा की वैल्यू नहीं देखी जाती. बल्कि देश के पास मौजूद गोल्ड रिजर्व, आईएमएफ के पास भुगतान के लिए पड़ा पैसा और एसडीआर को भी टोटल में शामिल किया जाता है.
इसके हिसाब से 20 सितंबर को खत्म हुए सप्ताह में मुद्रा भंडार का अहम हिस्सा मानी जाने वाली विदेशी मुद्राओं का मूल्य 2.06 अरब डॉलर बढ़कर 605.69 अरब डॉलर हो गया. इसमें सिर्फ डॉलर की वैल्यू शामिल नहीं है, बल्कि विदेशी मुद्रा भंडार में रखे गए यूरो, पाउंड और येन जैसी नॉन-अमेरिकी करेंसी की वैल्यू भी शामिल है. इन्हें सिर्फ दिखाया डॉलर के टर्म में जाता है और इनकी घट-बढ़ का असर फॉरेक्स रिजर्व पर दिखता है.
गोल्ड रिजर्व का भी बढ़िया हाल
रिजर्व बैंक के 20 सितंबर तक के डेटा के हिसाब से देश में मौजूद स्वर्ण भंडार का मूल्य 72.6 करोड़ डॉलर बढ़कर 63.61 अरब डॉलर हो गया है. वहीं भारत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिलने वाला विशेष आहरण अधिकार (एसडीआर) 12.1 करोड़ डॉलर बढ़कर 18.54 अरब डॉलर हो गया. जबकि अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के पास भारत का आरक्षित भंडार (इंडियन रिजर्व) 6.6 करोड़ डॉलर घटकर 4.46 अरब डॉलर रहा.
बीते कुछ समय में डॉलर की वैल्यू में काफी उतार-चढ़ाव देखा गया है. वहीं अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज दरें घटाने के बाद से सोने की कीमतों में इजाफा देखा जा रहा है. इस वजह से भी देश के विदेशी मुद्रा भंडार का मूल्य बढ़ा है.
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