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देश में पहली बार पहली बार SC जजों की संपत्ति घोषित, जानिए कितने अमीर हैं CJI संजीव खन्ना?

सुप्रीम कोर्ट द्वारा न्यायाधीशों की संपत्ति सार्वजनिक करना भारतीय न्यायपालिका के इतिहास में पारदर्शिता की दिशा में एक बड़ा और प्रशंसनीय कदम है. 

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago

सुप्रीम कोर्ट (SC) ने पारदर्शिता की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए देश में पहली बार न्यायाधीशों की संपत्ति और देनदारियों की जानकारी आधिकारिक वेबसाइट पर सार्वजनिक कर दी है. इस पहल के तहत मुख्य न्यायाधीश (CJI) संजीव खन्ना और उनके परिवार की संपत्ति का ब्योरा भी सामने आया है.

न्यायपालिका में पारदर्शिता की ओर बड़ा कदम

सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर अब जजों की संपत्ति से जुड़ी जानकारी देखी जा सकती है. यह निर्णय हाल ही में उस वक्त लिया गया जब जस्टिस यशवंत वर्मा के परिसरों से बड़ी मात्रा में नकदी बरामद होने के बाद न्यायपालिका की पारदर्शिता को लेकर सवाल उठने लगे थे. इसी के चलते फुल कोर्ट मीटिंग में प्रस्ताव पारित किया गया कि भविष्य में भी सभी न्यायाधीश अपनी संपत्ति सार्वजनिक करेंगे.

CJI संजीव खन्ना के नाम कितनी प्रॉपर्टी?

वेबसाइट से मिली जानकारी के अनुसार मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना के पास दक्षिण दिल्ली में दो बेडरूम का एक डीडीए फ्लैट और कॉमनवेल्थ गेम्स विलेज में चार बेडरूम का फ्लैट है. इसके अलावा गुरुग्राम में एक चार बेडरूम वाले फ्लैट में उनकी 56 प्रतिशत हिस्सेदारी है, जबकि बाकी 44 प्रतिशत हिस्सेदारी उनकी बेटी के नाम है. हिमाचल प्रदेश में उनके नाम एक पुश्तैनी घर भी है, जो परिवार के विभाजन से पहले की संपत्ति है. इन सभी संपत्तियों की कीमत करोड़ों में है. 

CJI की पत्नी के पास कितनी संपत्ति?

वहीं, मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना की पत्नी के पास कुल 700 ग्राम सोना और 5 किलो चांदी है. इसके अलावा उनके पास कुछ हीरे के गहने, मोती और माणिक की मालाएं भी मौजूद हैं. निवेश की बात करें तो उनके पास एफडी और बैंक खातों में कुल 23,87,000 लाख रुपये की राशि है. पीपीएफ खाते में 64,51,000 लाख रुपये है, जो वर्ष 1991 में खोला गया था. वहीं शेयर और म्युचुअल फंड में उनका कुल निवेश 1,39,16,000 करोड़ रुपये है. 

अब सभी जजों की संपत्ति होगी सार्वजनिक

फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के 33 में से 21 न्यायाधीशों की संपत्ति की जानकारी वेबसाइट पर अपलोड कर दी गई है. बाकी जजों की संपत्ति की जानकारी भी जल्द ही सार्वजनिक की जाएगी. यह कदम न केवल न्यायपालिका की पारदर्शिता को बढ़ावा देगा, बल्कि जनता के विश्वास को भी मजबूत करेगा.


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