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$100 मिलियन के फाइटर जेट से 20-30 गुना सस्ता हो सकता है Flying Wedge का AI विमान, Lite वेरिएंट में 90% स्वदेशी सामग्री
Flying Wedge Defence के फाउंडर और CEO सुहास तेजस्कंदा ने बिजनेसवर्ल्ड से बातचीत में बताया कि 3-5 मिलियन डॉलर की लागत वाले AI-पावर्ड एयरक्राफ्ट से हवाई युद्ध की लागत घटाने में मदद मिल सकती है. कंपनी की योजना मानवरहित विमानों को एक समूह के रूप में संचालित करने की तकनीक विकसित करने की है.
रितु राणा 1 hour ago
भारत की रक्षा और एयरोस्पेस इंडस्ट्री में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित लड़ाकू विमानों की दिशा में एक नई पहल सामने आई है. Flying Wedge Defence & Aerospace (FWDA) ने 13 अक्टूबर को नई दिल्ली में अपने AI-पायलटेड फाइटर एयरक्राफ्ट प्रोग्राम FWD Supreme का पूर्ण आकार का स्थिर प्रोटोटाइप पेश किया. कंपनी का दावा है कि इस तरह के स्वायत्त विमान भविष्य में हवाई युद्ध की रणनीति के साथ-साथ रक्षा अभियानों की लागत को भी बदल सकते हैं.
बिजनेसवर्ल्ड से बातचीत में Flying Wedge के फाउंडर और CEO सुहास तेजस्कंदा ने कहा कि मौजूदा रक्षा बाजार में महंगे लड़ाकू विमानों और छोटे, किफायती ड्रोन के बीच एक बड़ा अंतर है. कंपनी अपने AI-पावर्ड विमानों के जरिए इसी अंतर को भरने की कोशिश कर रही है. उनके मुताबिक, जहां पारंपरिक फाइटर जेट की कीमत करीब 100 मिलियन डॉलर तक हो सकती है, वहीं कंपनी 3-4 मिलियन डॉलर की लागत वाले प्लेटफॉर्म विकसित करने पर काम कर रही है.
महंगे फाइटर जेट और छोटे ड्रोन के बीच की खाई भरने का लक्ष्य
सुहास तेजस्कंदा ने कहा कि भारत में बड़ी संख्या में ड्रोन निर्माता अच्छा काम कर रहे हैं और इस इंडस्ट्री में नए प्लेयर्स भी आ रहे हैं. हालांकि, बड़े रक्षा प्लेटफॉर्म की बात करें तो करीब 100 मिलियन डॉलर की कीमत वाले फाइटर जेट खरीदे जा रहे हैं. ऐसे में महंगे लड़ाकू विमानों और छोटे, किफायती प्लेटफॉर्म के बीच एक बड़ा अंतर मौजूद है.
उन्होंने कहा कि टैक्टिकल फाइटर एयरक्राफ्ट इस अंतर को भर सकते हैं. युद्ध के दौरान किसी महंगे लड़ाकू विमान का नुकसान किसी भी देश के लिए काफी महंगा साबित हो सकता है. पश्चिम एशिया में हुए संघर्षों का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि महंगे सैन्य विमान और ड्रोन फोर्स मल्टीप्लायर के रूप में काम कर सकते हैं. भविष्य में इन्हें कोलैबोरेटिव कॉम्बैट एयरक्राफ्ट के तौर पर भी इस्तेमाल किया जा सकता है.
कंपनी का लक्ष्य ऐसे प्लेटफॉर्म विकसित करना है, जिन्हें अपेक्षाकृत कम लागत पर तैयार किया जा सके और जरूरत के मुताबिक बड़ी संख्या में तैनात किया जा सके. इससे महंगे विमानों पर पूरी तरह निर्भर रहने के बजाय अलग-अलग क्षमताओं वाले विमानों का एक समन्वित बेड़ा तैयार करने का विकल्प मिल सकता है.
पायलट के बिना काम करने के लिए AI तकनीक
सुहास तेजस्कंदा के मुताबिक, इस AI-पावर्ड विमान की एक प्रमुख विशेषता यह है कि इसे उड़ाने के लिए विमान में पायलट की जरूरत नहीं होती. इसके अलावा, इसे ग्राउंड कंट्रोल स्टेशन से कोई व्यक्ति लगातार नियंत्रित करे, इसकी भी आवश्यकता नहीं होती. विमान में मौजूद कंप्यूटर सिस्टम परिस्थितियों का आकलन करके स्वायत्त रूप से निर्णय लेने के लिए विकसित किया जा रहा है.
इस तकनीक का उद्देश्य विमान को बदलती परिस्थितियों को समझने और उनके अनुसार काम करने में सक्षम बनाना है. इससे सैन्य अभियानों में मानवीय जोखिम कम करने और ऑपरेशन की लागत घटाने में मदद मिल सकती है. हालांकि, ऐसे स्वायत्त विमानों की वास्तविक परिचालन क्षमता, निर्णय लेने की सीमाएं और सुरक्षा संबंधी आवश्यकताएं परीक्षण तथा तकनीकी सत्यापन के बाद ही स्पष्ट होंगी.
'मोबिंग डॉक्ट्रिन' से एक साथ काम करेंगे कई मानवरहित विमान
Flying Wedge ने अपने विमानों के संचालन के लिए 'मोबिंग डॉक्ट्रिन' की अवधारणा विकसित की है. इसके तहत कई मानवरहित एयरक्राफ्ट एक मानव-संचालित विमान के साथ मिलकर काम कर सकते हैं. सुहास तेजस्कंदा के मुताबिक, 15 से 20 मानवरहित एयरक्राफ्ट एक मानव-संचालित विमान को रणनीतिक सहयोग और सुरक्षा देने के लिए इस्तेमाल किए जा सकते हैं.
इस अवधारणा में विमान अलग-अलग काम करने के बजाय एक समन्वित समूह के रूप में काम करेंगे. वे मिशन की जरूरत के मुताबिक जानकारी साझा कर सकते हैं और अलग-अलग भूमिकाएं निभा सकते हैं. इससे कम लागत वाले कई विमानों को एक साथ तैनात करके सैन्य अभियानों की क्षमता बढ़ाने की संभावना बनती है.
कंपनी की ओर से पेश की गई इस अवधारणा का उद्देश्य केवल एक विमान की क्षमता बढ़ाना नहीं, बल्कि कई विमानों को एक साथ काम करने वाले नेटवर्क के रूप में विकसित करना है.
पारंपरिक फाइटर जेट से 20-30 गुना कम हो सकती है लागत
रक्षा खर्च पर संभावित असर के बारे में बात करते हुए सुहास तेजस्कंदा ने कहा कि करीब 100 मिलियन डॉलर के पारंपरिक फाइटर जेट की तुलना में 3 मिलियन डॉलर की लागत वाला विमान काफी किफायती हो सकता है.
उन्होंने कहा कि यदि ऐसे विमान में महंगे हथियार और अत्याधुनिक सेंसर भी शामिल किए जाएं, तब भी इसकी लागत 5 मिलियन डॉलर से अधिक नहीं होनी चाहिए. इस अनुमान के आधार पर ऐसे प्लेटफॉर्म की लागत पारंपरिक महंगे लड़ाकू विमान की तुलना में लगभग 20 से 30 गुना तक कम हो सकती है.
कंपनी के इस अनुमान के मुताबिक, कम लागत वाले विमानों को बड़ी संख्या में तैनात करने से भारत को सीमित रक्षा बजट में अपनी हवाई युद्ध क्षमता बढ़ाने का विकल्प मिल सकता है. हालांकि, वास्तविक लागत का आकलन विमान के अंतिम डिजाइन, हथियारों, सेंसर, रखरखाव और उत्पादन की संख्या के आधार पर करना होगा.
लाइट वेरिएंट में 90% तक स्वदेशी सामग्री
मेक इन इंडिया और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के बारे में सुहास तेजस्कंदा ने कहा कि स्वदेशी तकनीक विकसित करना और देश में ही निर्माण करना इस क्षेत्र के लिए बेहद अहम है.
उन्होंने बताया कि कंपनी के लाइट वेरिएंट में करीब 90% स्वदेशी सामग्री का इस्तेमाल किया जा रहा है. वहीं, 1.5 टन क्षमता वाले हेवी वेरिएंट में फिलहाल लगभग 65% स्वदेशी सामग्री है. उनके मुताबिक, इसमें स्वदेशी इंजन शामिल किए जाने के बाद घरेलू सामग्री की हिस्सेदारी बढ़कर करीब 85% तक पहुंच सकती है.
इससे भारत की रक्षा विनिर्माण क्षमता को मजबूत करने और विदेशी तकनीक पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है. हालांकि, स्वदेशी सामग्री की हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए इंजन, इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य महत्वपूर्ण प्रणालियों का घरेलू स्तर पर विकास अहम होगा.
FWD Supreme के अगले चरण में परीक्षण और तकनीकी विकास
FWD Supreme के अनावरण के दौरान कंपनी ने बताया कि कार्यक्रम के अगले चरण में तकनीक के विकास, परीक्षण और विभिन्न प्रणालियों के एकीकरण पर ध्यान दिया जाएगा. इसके साथ ही Supreme परिवार के अन्य विमानों को विकसित करने की योजना भी है.
कंपनी के मुताबिक, FWD Supreme Heavy एक टन श्रेणी का विमान है, जिसे स्वायत्त लड़ाकू अभियानों के लिए विकसित किया जा रहा है. इसे खुफिया जानकारी जुटाने, निगरानी और टोही (ISR), हमले तथा अन्य विमानों के साथ मिलकर काम करने वाले अभियानों के लिए कॉन्फिगर करने की योजना है.
FWDA के CEO सुहास तेजस्कंदा ने कहा कि FWD Supreme भारतीय डिजाइन, इंजीनियरिंग और विनिर्माण के माध्यम से उन्नत रक्षा क्षमताएं विकसित करने की कंपनी की प्रतिबद्धता को दर्शाता है. उन्होंने यह भी बताया कि FWD Supreme Lite टैक्सी ट्रायल पूरा कर चुका है और अपनी पहली उड़ान की तैयारी कर रहा है.
कंपनी 'ऑपरेशन ट्रिपल सेवन' के तहत अंतरराष्ट्रीय एयरोस्पेस और विनिर्माण साझेदारियां विकसित करने की भी योजना बना रही है. इसका उद्देश्य भारत के नेतृत्व में उन्नत लड़ाकू विमानन के विकास और निर्माण का इकोसिस्टम तैयार करना है.
कुल मिलाकर, FWD Supreme कार्यक्रम का फोकस AI आधारित स्वायत्त विमान, कम लागत वाले रक्षा प्लेटफॉर्म और एक साथ काम करने वाले मानवरहित विमानों की अवधारणा पर है. इसकी व्यावहारिक सफलता आने वाले समय में परीक्षण, तकनीकी प्रदर्शन, उत्पादन लागत और रक्षा अभियानों में इसके वास्तविक उपयोग पर निर्भर करेगी.
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