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IMF ने बढ़ाया भारत की GDP ग्रोथ का अनुमान, FY27 और FY28 में 7% वृद्धि की उम्मीद
घरेलू मांग और सेवा क्षेत्र की मजबूती से भारत की अर्थव्यवस्था को सहारा मिलने का अनुमान है. IMF ने वित्त वर्ष 2027 के लिए ग्रोथ का अनुमान 6.4% से बढ़ाकर 7% किया, जबकि वैश्विक स्तर पर पश्चिम एशिया संघर्ष और महंगाई का जोखिम बरकरार है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 hour ago
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने भारत की आर्थिक वृद्धि को लेकर अपना अनुमान बढ़ा दिया है. ताजा वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2027 और 2028 में भारत की GDP ग्रोथ 7% रहने की उम्मीद है. पहले FY27 के लिए 6.4% और FY28 के लिए 6.7% वृद्धि का अनुमान था. IMF के इस आकलन को घरेलू मांग और सेवा क्षेत्र के बेहतर प्रदर्शन से समर्थन मिला है. इससे पहले भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अक्टूबर की मौद्रिक नीति समीक्षा में FY27 के लिए ग्रोथ अनुमान बढ़ाकर 7.1% किया था. विश्व बैंक ने भी पिछले सप्ताह इसी वित्त वर्ष के लिए 7.1% वृद्धि का अनुमान जताया था.
घरेलू मांग और सेवा क्षेत्र से सहारा
IMF के अनुसार, भारत की आर्थिक रफ्तार मजबूत बनी हुई है. बड़े घरेलू बाजार, अनुकूल जनसांख्यिकीय स्थिति और लगातार हो रहे संरचनात्मक सुधारों से भी विकास की संभावनाओं को बल मिल रहा है. घरेलू मांग और सेवा क्षेत्र की मजबूती आर्थिक गतिविधियों को सहारा दे सकती है.
वैश्विक ग्रोथ के अनुमान में मामूली बढ़ोतरी
IMF ने 2026 के लिए वैश्विक अर्थव्यवस्था की विकास दर का अनुमान 3% से बढ़ाकर 3.1% किया है. हालांकि, 2027 के लिए इसे 3.4% पर बरकरार रखा गया है. 2026 में विकसित अर्थव्यवस्थाओं की ग्रोथ 2.1% रहने का अनुमान है, जो पहले 1.7% था. इसके उलट, उभरती और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के लिए अनुमान 3.8% से घटाकर 3.7% कर दिया गया है.
देशों की बात करें तो जर्मनी की ग्रोथ का अनुमान 0.7% से बढ़ाकर 1.3% और ब्रिटेन का 1% से बढ़ाकर 1.3% किया गया है. चीन के लिए 2026 और 2027 के अनुमान क्रमशः 4.5% और 4% हैं. वहीं, 2026 में ब्राजील की अर्थव्यवस्था 2.2% और रूस की 0.9% बढ़ने का अनुमान है.
पश्चिम एशिया संघर्ष से महंगाई का खतरा
IMF ने चेताया है कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष से ऊर्जा उत्पादन और आपूर्ति प्रभावित हो सकती है. तनाव लंबा खिंचने पर महंगाई बढ़ने और वैश्विक आर्थिक विकास धीमा पड़ने का जोखिम है.
रिपोर्ट के मुताबिक, बहरीन, इराक, कुवैत और कतर की अर्थव्यवस्थाओं पर ऊर्जा उत्पादन और ढुलाई में रुकावटों का गंभीर असर पड़ सकता है. इन देशों में 2026 के दौरान आर्थिक संकुचन का अनुमान है. सऊदी अरब की अर्थव्यवस्था के लिए भी अनुमान कमजोर हुआ है. जुलाई में 1.7% वृद्धि की उम्मीद के मुकाबले अब 3.3% गिरावट का अनुमान जताया गया है.
IMF की मुख्य अर्थशास्त्री सिलवाना टेनरेरो के अनुसार, पश्चिम एशिया में तनाव लंबा चलने से महंगाई बढ़ सकती है और ग्रोथ पर दबाव पड़ सकता है. सरकारों की कमजोर वित्तीय स्थिति, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से मिलने वाले संभावित लाभ को लेकर अनिश्चितता और गंभीर मौसमी घटनाएं भी वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए जोखिम हैं.
नीति-निर्माताओं के सामने दोहरी चुनौती
IMF के मुताबिक, संकट का असर देशों पर उनकी ऊर्जा निर्भरता और संघर्ष से दूरी के आधार पर अलग-अलग हो सकता है. ऐसे में सरकारों को महंगाई, कर्ज और वित्तीय जोखिमों से निपटने के साथ बुनियादी ढांचे, कौशल विकास और प्रतिस्पर्धा को मजबूत करने पर भी ध्यान देना होगा.
भारत के लिए बढ़ा हुआ ग्रोथ अनुमान घरेलू अर्थव्यवस्था की मजबूती का संकेत है, लेकिन वैश्विक ऊर्जा संकट और भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं आगे भी आर्थिक प्रदर्शन को प्रभावित कर सकती हैं.
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