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भारत का असली बॉस, JIO ने IPO का आकार घटाकर ₹30,000 करोड़ किया
JIO के इश्यू का आकार करीब ₹37,000 करोड़ से घटकर ₹30,000 करोड़ रह गया है, वैल्यूएशन ₹10.3 लाख करोड़ और ग्रे-मार्केट प्रीमियम ₹50 पर आ गया है. मस्क के चार दिनों तक चले हमले में रिलायंस ग्रुप के प्रमुख को ‘प्रधानमंत्री अंबानी’ कहे जाने के बाद, भारत का अब तक का सबसे बड़ा आईपीओ बनने की तैयारी में लगा यह इश्यू हुंडई से आगे निकलने के लिए संघर्ष कर रहा है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 hour ago
पलक शाह
एंकर निवेशक निभा रहे हैं अहम भूमिका, वैश्विक फंड छूट की मांग कर रहे हैं. भारत के सबसे बड़े सार्वजनिक निर्गम (IPO) का आकार घटा दिया गया है. हालांकि, इसकी कीमत अपने सबसे करीबी प्रतिद्वंद्वी से कम नहीं रखी जा रही है.
सौदे से परिचित लोगों के अनुसार, जियो प्लेटफॉर्म्स (JIO) 21 अक्टूबर को अपना इश्यू खुलने पर आम निवेशकों से करीब ₹26,000 करोड़ जुटाएगी. बैंकरों को ₹36,000-38,000 करोड़ जुटाए जाने की उम्मीद थी, जबकि पहले की रिपोर्टों में इश्यू का आकार ₹37,700 करोड़ बताया गया था. इस आकार के साथ यह भारत का अब तक का सबसे बड़ा IPO बन सकता था. इश्यू के आकार में ₹6,000 करोड़ से ₹7,000 करोड़ तक की कटौती की गई है, जो कुल इश्यू का करीब 20% है.
कर्मचारी और शेयरधारक कोटे को जोड़ने के बाद कुल राशि लगभग ₹30,200 करोड़ या करीब 3.1 अरब डॉलर बैठती है. यह आंकड़ा सोच-समझकर चुना गया है. इससे जियो यह दावा कर सकती है कि उसका इश्यू अक्टूबर 2024 में आए हुंडई मोटर इंडिया के ₹27,870 करोड़ के आईपीओ से थोड़ा बड़ा है, जिसे भारत का सबसे बड़ा आईपीओ बताया गया था.
हालांकि, डॉलर में तस्वीर अलग है. हुंडई ने करीब 3.3 अरब डॉलर जुटाए थे. डॉलर के मुकाबले रुपया करीब ₹97 पर होने के कारण जियो का तथाकथित रिकॉर्ड इससे कम रह जाता है. वैश्विक निवेशकों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले पैमाने पर भारत का सबसे बड़ा आईपीओ उस इश्यू से छोटा है, जिसे पीछे छोड़ने का वह दावा कर रहा है.
160 अरब डॉलर से घटकर ₹10.3 लाख करोड़ का वैल्यूएशन
जियो के शेयर का इश्यू प्राइस ₹1,119 तय किया गया है. इससे कंपनी का वैल्यूएशन करीब ₹10.3 लाख करोड़ या लगभग 106 अरब डॉलर बैठता है.
एक समय जियो का वैल्यूएशन 160 अरब डॉलर तक बताया जा रहा था. पिछले सप्ताह तक बाजार की रिपोर्टों में कहा जा रहा था कि जियो, भारती एयरटेल की तुलना में प्रीमियम वैल्यूएशन की मांग करेगी. लेकिन रोडशो से परिचित लोगों के अनुसार, वैश्विक फंडों ने एयरटेल की तुलना में करीब 30% की छूट की मांग की. उन्होंने बैंकरों से कहा कि वे जियो के लिए अधिक कीमत चुकाने के बजाय रिलायंस के शेयर खरीदना पसंद करेंगे. कारोबार शुरू होने से पहले ही वैल्यूएशन में करीब 54 अरब डॉलर की कमी आ चुकी है.
ग्रे मार्केट में भी उत्साह ठंडा पड़ गया है. पहले की रिपोर्टों में ग्रे-मार्केट प्रीमियम करीब ₹160 बताया गया था. अब यह लगभग ₹50 रह गया है, जो इश्यू प्राइस से 5% से भी कम अधिक है.
एंकर निवेशकों के भरोसे आईपीओ
₹26,000 करोड़ के इश्यू में से करीब ₹8,000 करोड़, यानी लगभग एक-तिहाई हिस्सा, सार्वजनिक निर्गम खुलने से पहले एंकर निवेशकों को आवंटित किया जाएगा. संस्थागत निवेशकों से बाकी बुक में केवल करीब ₹5,000 करोड़ की राशि है.
पहले दिन से ही करीब एक-तिहाई राशि के लिए प्रतिबद्धता मिलने के कारण सब्सक्रिप्शन के आंकड़े अच्छे दिखाई देंगे, चाहे खुदरा निवेशक कैसी भी प्रतिक्रिया दें. शेयरधारक कोटे के तहत रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरधारकों के लिए आरक्षित हिस्सेदारी से भी इश्यू को खरीदारों का एक अतिरिक्त समूह मिल जाता है.
2020 के निवेशकों को फिर नुकसान
2020 में जियो में 20.3 अरब डॉलर का निवेश करने वाले 13 वैश्विक निवेशकों को कम कीमत के कारण एक बार फिर सबसे अधिक नुकसान हो रहा है. इनमें मेटा, गूगल, सऊदी अरब का पीआईएफ, केकेआर, सिल्वर लेक, विस्टा, मुबाडाला, एडीआईए, टीपीजी, जनरल अटलांटिक, एल कैटरटन, इंटेल कैपिटल और क्वालकॉम शामिल हैं.
जियो के ड्राफ्ट प्रॉस्पेक्टस में दिए गए आवंटन के विश्लेषण के अनुसार, ₹1,119 प्रति शेयर की कीमत पर उनकी हिस्सेदारी का मूल्य करीब 34 अरब डॉलर है. छह वर्षों में यह उनके निवेश का 1.67 गुना है, यानी डॉलर में सालाना करीब 8.7% का रिटर्न.
केकेआर, पीआईएफ, सिल्वर लेक और विस्टा जैसे फंडों ने ₹549 प्रति शेयर की कीमत पर निवेश किया था. उनके लिए सालाना रिटर्न करीब 7.6% है. रुपये में ₹549 का निवेश लगभग दोगुना होकर ₹1,119 हो गया है. लेकिन डॉलर के मुकाबले रुपया करीब ₹75 से गिरकर ₹97 पर आ गया है, जिससे उनके डॉलर में मिलने वाले रिटर्न में करीब 10 अरब डॉलर की कमी आई है. वहीं, ₹488 प्रति शेयर की कीमत पर निवेश करने वाले मेटा और गूगल का सालाना रिटर्न करीब 9.5-10% है.
रिलायंस की स्थिति इससे बिल्कुल अलग है. उसके अधिकांश शेयर ₹10 की कीमत पर हासिल किए गए थे. कम की गई कीमत पर भी उसकी हिस्सेदारी का मूल्य करीब ₹6.6 लाख करोड़ या लगभग 69 अरब डॉलर है.
जन्मदिन के करीब इश्यू बंद, बुधवार को होगी लिस्टिंग
यह इश्यू बुधवार, 21 अक्टूबर से शुक्रवार, 23 अक्टूबर तक खुला रहेगा. इश्यू बंद होने का दिन मुकेश अंबानी के जुड़वां बच्चों आकाश और ईशा का 35वां जन्मदिन है. आकाश रिलायंस जियो इन्फोकॉम के चेयरमैन हैं. शेयरों की लिस्टिंग बुधवार, 28 अक्टूबर को होने की संभावना है.
उस समय तक ऑर्डर बुक की स्थिति कैसी रहती है, इसी पर निर्भर करेगा कि जश्न मनाने की कोई वजह होगी या नहीं.
मस्क का चार दिनों तक हमला
इश्यू के आकार में कटौती ऐसे समय हुई है, जब जियो का रोडशो जारी रहने के दौरान एलन मस्क ने लगातार चार दिनों तक एक्स पर मुकेश अंबानी को निशाना बनाया.
7 अक्टूबर को मस्क ने लिखा कि स्टारलिंक को “कुछ उद्योगपतियों द्वारा भारतीय लोगों पर अपनी एकाधिकारवादी पकड़ बनाए रखने के लिए रोका जा रहा है.” उन्होंने इसे “भारत के लोगों के खिलाफ अपराध” बताया. अगले दिन उन्होंने उस व्यक्ति का नाम लिया, जिसका वह जिक्र कर रहे थे. उन्होंने पूछा, “क्या अंबानी भारत के असली बॉस हैं?”
शुक्रवार को उन्होंने ‘प्रधानमंत्री अंबानी’ के नाम एक काल्पनिक खुला पत्र पोस्ट किया. इसमें लिखा था, “यह न समझ पाने के लिए कृपया मेरी विनम्र माफी स्वीकार करें कि आप ही भारत के असली बॉस हैं.” उन्होंने अंबानी पर “भारत के महान लोगों का एकाधिकारवादी शोषण जारी रखने” को प्राथमिकता देने का आरोप लगाया. इसके बाद उन्होंने पूछा, “क्या फिर भी आप स्टारलिंक को प्रतिस्पर्धा करने की अनुमति देने पर विचार करेंगे?”
शनिवार को उन्होंने किफायती कीमतों का वादा किया और कहा, “अंबानी का मुनाफा कम होगा, लेकिन उनका कारोबार बंद नहीं होने वाला.” जब कांग्रेस नेता राहुल गांधी भी इस बहस में शामिल हुए, तो मस्क ने जवाब दिया, “यह वाकई चिंताजनक है.”
सरकार ने इन आरोपों को खारिज कर दिया है. संचार मंत्रालय ने अपने सैटेलाइट नियमों को “निष्पक्ष और गैर-भेदभावपूर्ण” बताया और आरोपों को “निराधार और गलत धारणा पर आधारित” करार दिया. मंत्रालय ने कहा कि जियो के अपने सैटेलाइट कारोबार सहित लाइसेंस प्राप्त तीनों ऑपरेटर एक ही सुरक्षा मंजूरी का इंतजार कर रहे हैं. दूरसंचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि भारत “किसी भी क्षेत्र में एकाधिकार की अनुमति नहीं देता.” रिलायंस ने इस मामले पर कोई टिप्पणी नहीं की है.
किसी भी निवेशक ने यह नहीं कहा है कि इन पोस्ट से उनका निवेश संबंधी फैसला बदला है. लेकिन लगातार चार दिनों तक, जब जियो के बैंकर वैश्विक फंडों से कंपनी के बाजार में दबदबे के लिए अधिक कीमत चुकाने को कह रहे थे, तब दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति एक्स पर सवाल उठा रहे थे कि यह दबदबा हासिल कैसे किया गया.
इसका क्या मतलब है
जियो के आईपीओ की योजना एक बड़े बयान के रूप में बनाई गई थी: भारत की सबसे बड़ी कंपनी, देश के सबसे बड़े आईपीओ के साथ और ऐसा वैल्यूएशन जो वैश्विक टेक कंपनियों को टक्कर दे सके. लेकिन अब बाजार में जो इश्यू आ रहा है, उसका आकार छोटा है, कीमत कम है, ग्रे-मार्केट प्रीमियम सीमित है और बुक को बड़े पैमाने पर एंकर निवेशकों का समर्थन मिला हुआ है.
जियो रुपये के लिहाज से सबसे बड़े आईपीओ का रिकॉर्ड बनाने का दावा अब भी कर सकती है. लेकिन जिन वैश्विक निवेशकों से उसके वैल्यूएशन को मान्यता मिलने की उम्मीद थी, उन्होंने इसके बजाय वैल्यूएशन को नीचे धकेल दिया है.
नोट: रिटर्न शुल्क और करों से पहले के सकल रिटर्न हैं. इनकी गणना जियो प्लेटफॉर्म्स के ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (19 जून, 2026) और ईसीबी की डॉलर/रुपया विनिमय दरों के आधार पर की गई है. डॉलर से जुड़े आंकड़ों के लिए ₹96.73 प्रति डॉलर की दर का इस्तेमाल किया गया है.
पलक शाह, BW रिपोर्टर्स
(पलक शाह एक अनुभवी खोजी पत्रकार हैं और The Market Mafia: Chronicle of India’s High-Tech Stock Market Scandal & The Cabal That Went Scot-Free के लेखक हैं. लगभग दो दशकों के अनुभव के साथ, उन्होंने मुंबई में जमीनी रिपोर्टिंग करते हुए पैसे, ताकत और नियमों के गठजोड़ को उजागर किया है. उनके लेख The Economic Times, Business Standard, The Financial Express और The Hindu Business Line जैसे प्रमुख प्रकाशनों में प्रकाशित हुए हैं. 19 साल की उम्र में अपराध पत्रकारिता से शुरुआत करने वाले पलक ने जल्द ही समझ लिया कि 1980 के दशक के गैंगवार अब कॉरपोरेट अपराध में बदल चुके हैं. इसी ने उन्हें वित्तीय पत्रकारिता की ओर मोड़ा, जहां उन्होंने बाजार हेरफेर और सिस्टम की खामियों को उजागर किया.)
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