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NTPC की को-जेनरेशन परियोजनाओं में 26% हिस्सेदारी का मौका, औद्योगिक कंपनियों से मांगी रुचि
कंपनी इन परियोजनाओं में 26 फीसदी इक्विटी हिस्सेदारी की पेशकश कर रही है. इसका उद्देश्य उद्योगों को भरोसेमंद और किफायती ऊर्जा उपलब्ध कराने के साथ अपने ऊर्जा समाधान कारोबार का विस्तार करना है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 hour ago
देश की प्रमुख बिजली उत्पादक कंपनी NTPC लिमिटेड को-जेनरेशन परियोजनाओं के जरिए औद्योगिक ऊर्जा क्षेत्र में अपनी मौजूदगी बढ़ाने की तैयारी कर रही है. इन परियोजनाओं में बिजली के साथ भाप जैसी तापीय ऊर्जा का उत्पादन किया जाएगा. कंपनी कोयला, नवीकरणीय ऊर्जा और बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम को मिलाकर एकीकृत बिजली आपूर्ति समाधान विकसित करने पर भी विचार कर रही है.
क्या है को-जेनरेशन तकनीक?
को-जेनरेशन को कंबाइंड हीट एंड पावर (CHP) भी कहा जाता है. इसमें एक ही ईंधन स्रोत से बिजली और तापीय ऊर्जा का उत्पादन किया जाता है. पारंपरिक बिजली उत्पादन के दौरान निकलने वाली गर्मी का उपयोग करने से ऊर्जा दक्षता बढ़ाने में मदद मिलती है.
विनिर्माण क्षेत्र की कई इकाइयों को मशीनों के संचालन और उत्पादन प्रक्रिया के लिए बिजली के साथ भाप की भी जरूरत होती है. को-जेनरेशन प्रणाली इन दोनों जरूरतों को एक साथ पूरा कर सकती है, जिससे ऊर्जा की बर्बादी और परिचालन लागत कम करने में मदद मिल सकती है.
दीर्घकालिक ऊर्जा आपूर्ति पर जोर
NTPC के मुताबिक, प्रस्तावित परियोजनाओं के जरिए उद्योगों को दीर्घकालिक व्यवस्था के तहत ऊर्जा उपलब्ध कराने की योजना है. इससे कंपनियों को अपनी ऊर्जा जरूरतों, लागत और आपूर्ति की बेहतर योजना बनाने में मदद मिल सकती है.
कंपनी अपनी बिजली उत्पादन संबंधी विशेषज्ञता के आधार पर अलग-अलग उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप आपूर्ति मॉडल विकसित करना चाहती है. औद्योगिक साझेदारों की भागीदारी से NTPC को अपने ऊर्जा समाधान कारोबार का विस्तार करने का अवसर मिलेगा.
2032 तक 149 गीगावाट क्षमता का लक्ष्य
NTPC की स्थापित बिजली उत्पादन क्षमता 91 गीगावाट से अधिक है, जबकि 35 गीगावाट से ज्यादा क्षमता की परियोजनाएं निर्माणाधीन हैं. कंपनी ने 2032 तक अपनी कुल क्षमता बढ़ाकर 149 गीगावाट करने का लक्ष्य रखा है. इसमें 60 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों से हासिल करने की योजना है.
कंपनी की विस्तार रणनीति में तापीय, जलविद्युत, सौर और पवन ऊर्जा के अलावा ऊर्जा भंडारण, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, वेस्ट-टू-एनर्जी, परमाणु ऊर्जा और ग्रीन हाइड्रोजन जैसे क्षेत्र भी शामिल हैं. को-जेनरेशन परियोजनाओं के लिए औद्योगिक साझेदारों को आमंत्रित करना इसी रणनीति का हिस्सा है.
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