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चीन के 300 अरब डॉलर के सर्विस बाजार पर भारत की नजर, कारोबार की बाधाओं का होगा आकलन
वाणिज्य विभाग ने कंपनियों से वीजा, डेटा ट्रांसफर, लाइसेंस, टैक्स और भुगतान से जुड़ी समस्याओं का ब्योरा मांगा है. इसका मकसद चीन के बड़े सर्विस बाजार में भारत की हिस्सेदारी बढ़ाने और निर्यातकों के सामने आने वाली चुनौतियों की पहचान करना है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 hours ago
भारत सरकार चीन के साथ व्यापारिक संबंधों में सेवाओं के निर्यात को बढ़ावा देने की संभावनाएं तलाश रही है. इसके लिए वाणिज्य विभाग उन नियमों और प्रक्रियाओं की जानकारी जुटा रहा है, जिनसे भारतीय कंपनियों को चीन में कारोबार करने में परेशानी होती है. इस पहल के तहत लाइसेंस और रजिस्ट्रेशन की शर्तों से लेकर डेटा सुरक्षा और पेशेवर कर्मचारियों की आवाजाही तक के मुद्दों पर जानकारी मांगी गई है.
300 अरब डॉलर के बाजार में भारत की हिस्सेदारी कितनी?
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, चीन सेवाओं के बड़े वैश्विक आयातकों में शामिल है. उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2024 में चीन को भारत का सेवा निर्यात 8.95 अरब डॉलर रहा. करीब 300 अरब डॉलर के चीनी सेवा आयात बाजार को देखते हुए भारतीय कंपनियों के लिए विस्तार की संभावनाएं मौजूद हैं. भारत की मजबूत मौजूदगी सूचना प्रौद्योगिकी (IT), आईटी आधारित सेवाओं और डिजिटल समाधानों जैसे क्षेत्रों में है. हालांकि, चीन के नियामकीय नियम और बाजार में प्रवेश से जुड़ी शर्तें भारतीय कंपनियों के लिए कारोबार बढ़ाने में चुनौती बन सकती हैं.
वीजा से लेकर डेटा ट्रांसफर तक की चुनौतियां
वाणिज्य विभाग ने उद्योग जगत से चीन में लागू डेटा लोकलाइजेशन, साइबर सुरक्षा और सीमा पार डेटा ट्रांसफर के नियमों से जुड़ी समस्याओं की जानकारी मांगी है. इसके अलावा वीजा मिलने में देरी, वर्क परमिट की शर्तें और भारतीय पेशेवरों की योग्यताओं को मान्यता देने जैसे मुद्दे भी शामिल हैं.
कंपनियों को टैक्स, भुगतान प्राप्त करने, रकम दूसरे देश में भेजने और कॉन्ट्रैक्ट हासिल करने की प्रक्रिया में आने वाली दिक्कतों का ब्योरा भी देना है. सरकार इन जानकारियों के आधार पर उन बाधाओं की पहचान करना चाहती है, जो भारतीय सेवा निर्यातकों की प्रतिस्पर्धा और कारोबार के विस्तार को प्रभावित करती हैं.
चीन में किस तरह कारोबार करती हैं भारतीय कंपनियां?
उद्योग जगत के प्रतिनिधियों के मुताबिक, भारतीय कंपनियां चीन में काम तो कर रही हैं, लेकिन कई मामलों में वे अंतिम ग्राहकों को सीधे सेवाएं देने के बजाय मध्यस्थ संस्थाओं के जरिए कारोबार करती हैं. इससे उनकी बाजार तक सीधी पहुंच सीमित हो सकती है.
वाणिज्य विभाग ने कंपनियों से सीमा पार डिजिटल माध्यमों से सेवाएं देने, चीन में व्यावसायिक मौजूदगी, मालिकाना हक, स्थानीय साझेदारी और परिचालन संबंधी जरूरतों की जानकारी भी मांगी है. इससे यह समझने में मदद मिल सकती है कि भारतीय कंपनियां चीन में किस तरह काम कर रही हैं और उन्हें सीधे कारोबार करने में किन बाधाओं का सामना करना पड़ता है.
वैश्विक सेवा निर्यात में भारत की बढ़ती हिस्सेदारी
वैश्विक सेवा निर्यात में भारत की हिस्सेदारी पिछले एक दशक में बढ़ी है. उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, विश्व के सेवा निर्यात में भारत की हिस्सेदारी 2014 में करीब 3 फीसदी थी, जो 2024 में बढ़कर 4.3 फीसदी हो गई. इसी अवधि में चीन की हिस्सेदारी 4.2 फीसदी से बढ़कर 5.1 फीसदी हो गई.
भारत में सेवा निर्यात की वृद्धि को आईटी, डिजिटल सेवाओं और अन्य पेशेवर सेवाओं की वैश्विक मांग से समर्थन मिला है. ऐसे में चीन जैसे बड़े बाजार में कारोबार की बाधाओं को समझना भारतीय कंपनियों के लिए नए अवसर तलाशने की दिशा में अहम कदम हो सकता है. हालांकि, चीन में भारतीय सेवा निर्यातकों की वास्तविक संभावनाएं वहां के नियमों, बाजार तक पहुंच और स्थानीय प्रतिस्पर्धा पर भी निर्भर करेंगी. सरकार की ओर से जुटाई जा रही जानकारी इन चुनौतियों का आकलन करने और आगे की व्यापार रणनीति तय करने में उपयोगी हो सकती है.
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