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रुपये को सहारा देने वाले RBI के नए नियमों पर बैंकों को राहत की मांग, 20% कैश जमा की जगह शुल्क लगाने का प्रस्ताव
विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव सौदों पर 20% नकद जमा की अनिवार्यता और 20 लाख डॉलर की सीमा को लेकर बैंकों ने RBI से नियमों में बदलाव की मांग की है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 hour ago
भारतीय बैंकों ने विदेशी मुद्रा से जुड़े नए नियमों में राहत के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) का रुख किया है. रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, बैंकों ने कुछ करेंसी डेरिवेटिव सौदों पर 20% नकद जमा करने की अनिवार्यता के बदले वैकल्पिक व्यवस्था लागू करने का प्रस्ताव दिया है. इसके साथ ही उन्होंने 20 लाख डॉलर की सीमा हटाने और विदेशी मुद्रा में लिए गए कर्ज के ब्याज भुगतान की हेजिंग पर नियमों की स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है.
RBI ने 10 अक्टूबर को रुपये पर दबाव कम करने के उद्देश्य से ये उपाय घोषित किए थे. ऊंची तेल कीमतों और विदेशी पूंजी की निकासी के बीच कंपनियों की ओर से भविष्य में डॉलर खरीदने की बढ़ती मांग रुपये पर दबाव डाल रही थी.
20% कैश जमा के बदले सीधे शुल्क का प्रस्ताव
नए नियमों के तहत बैंकों को चालू खाते से जुड़े जोखिमों की हेजिंग के लिए किए जाने वाले कुछ विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव सौदों के अनुमानित मूल मूल्य (नॉशनल वैल्यू) का 20% नकद जमा के रूप में अलग रखना होगा.
बैंकों ने उद्योग संगठन फॉरेन एक्सचेंज डीलर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (FEDAI) के माध्यम से इस व्यवस्था में बदलाव का प्रस्ताव दिया है. वे चाहते हैं कि नकद जमा की अनिवार्यता के बजाय कंपनियों से एक निश्चित शुल्क लिया जाए, जो फॉरवर्ड डॉलर या अन्य डेरिवेटिव के जरिए हेजिंग करती हैं.
बैंकों का तर्क है कि सीधे शुल्क से हेजिंग की लागत तो बढ़ेगी, लेकिन उनकी ट्रेजरी गतिविधियों में नकदी नहीं फंसेगी. इस अतिरिक्त लागत का बोझ कंपनियों पर भी पड़ सकता है, क्योंकि बैंक इसे अपने कॉरपोरेट ग्राहकों से वसूल सकते हैं.
20 लाख डॉलर की सीमा हटाने की मांग
बैंकों ने 20 लाख डॉलर की उस सीमा को हटाने की भी मांग की है, जिसके ऊपर संबंधित सौदों पर नकद जमा की शर्त लागू होती है. उनका कहना है कि कंपनियां बड़े हेजिंग सौदों को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर इस सीमा से बचने की कोशिश कर सकती हैं.
ऐसे मामलों की निगरानी करना बैंकों के लिए मुश्किल हो सकता है. रॉयटर्स के मुताबिक, बैंक अधिकारियों ने कहा कि कई छोटे सौदों के जरिए नियमों से बचने की कोशिश की पहचान करना आसान नहीं होगा. इसलिए बैंक इस सीमा को लागू करने के तरीके पर भी स्पष्टता चाहते हैं.
विदेशी मुद्रा कर्ज के ब्याज भुगतान पर भी स्पष्टीकरण मांगा
बैंकों ने RBI से यह भी स्पष्ट करने को कहा है कि विदेशी मुद्रा में लिए गए कर्ज पर ब्याज भुगतान के जोखिम से बचाव के लिए किए गए हेजिंग सौदे भी नए नियमों के दायरे में आएंगे या नहीं.
नियमों में विदेशी कर्ज के मूलधन के भुगतान से जुड़ी हेजिंग को शामिल नहीं किया गया है. हालांकि, ब्याज भुगतान के लिए की जाने वाली हेजिंग पर स्थिति स्पष्ट नहीं होने के कारण बैंक केंद्रीय बैंक से मार्गदर्शन चाहते हैं.
रुपये को स्थिर करने के लिए RBI के कदम
RBI के नए उपायों का उद्देश्य कुछ प्रकार की करेंसी हेजिंग को महंगा बनाकर कंपनियों की फॉरवर्ड डॉलर की मांग कम करना और रुपये पर दबाव घटाना है. केंद्रीय बैंक की घोषणा के बाद सोमवार को रुपये में करीब 1% की मजबूती दर्ज की गई.
इसके अलावा, RBI ने तीन सरकारी तेल विपणन कंपनियों को केंद्रीय बैंक के जरिए सीधे डॉलर खरीदने की सुविधा देने के लिए एक विशेष व्यवस्था भी शुरू की है. इससे इन कंपनियों की डॉलर खरीद का कुछ हिस्सा हाजिर विदेशी मुद्रा बाजार से हटाया जा सकेगा. बैंकों की मांग पर RBI का फैसला अहम होगा, क्योंकि इससे कंपनियों के लिए मुद्रा जोखिम से बचाव की लागत और बैंकों की नकदी प्रबंधन व्यवस्था प्रभावित हो सकती है.
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