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फेक फाइनेंशियल इनफ्लूएंसर्स की अब खैर नहीं, SEBI तय किए नए नियम
फिन इंफ्लुएंसर्स का मतलब साफ है कि वो लोग जो फाइनेंस से जुड़ी जानकारी आसान शब्दों में देते है. अब उनके लिए नए नियम आ गए हैं.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
सोशल मीडिया यानि यूट्यूब और फेबसबुक पर ऐसे इंफ्लुएंसर्स की संख्या तेजी से बढ़ रही है, जिनका स्टॉक मार्केट से कोई मतलब नहीं है, लेकिन ये स्टॉक पर सलाह देते हैं. इनकी सलाह मानकर और गलत डेटा शेयर करके ये लोगों को नुकसान करा रहे हैं. ये फिनफ्लुएंसर्स जवाबदेही से बचने का एक खास तरीका निकालते हैं. हर ट्वीट में, वीडियो में पोस्ट में ये डिस्क्लेमर डाल देत हैं कि वो सेबी से रजिस्टर्ड नहीं हैं और सोचते हैं कि अब वो जवाबदेही से बच जाएंगे, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा. सेबी ने साफ किया है कि ऐसा करने मात्र से आपकी जिम्मेदारी पूरी नहीं हो जाएगी.
फाइनेंशियल इनफ्लूएंसर्स पर कसेगा शिकंजा
शेयर बाजार के रेग्यूलेटर सेबी (SEBI) ने फाइनेंशियल इनफ्लूएंसर्स पर शिंकजा कसने के लिए बड़ा फैसला किया है. सेबी बोर्ड ने गैर-रजिस्टर्ड फाइनेंशियल फ्लूएंसर (Financial Fluencers) को रेग्यूलेट करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है. अनरजिस्टर्ड फिनफ्लुएंसर्स का सलाह देना गैरकानूनी है. इसकम मतलब साफ कि बिना रिजस्ट्रेशन अगर कोई शेयर और म्युचूअल फंड पर सलाह देता है तो उस पर कानून कार्रवाई होगी. इन फाइनेंशियल इन्फ्लूएंसर को सेबी के पास अपना रजिस्ट्रेशन कराना होगा, और तय नियमों का पालन भी करना होगा. इसके अलावा इनके म्यूचुअल फंड और शेयर ब्रोकरों के साथ साझेदारी करने पर भी प्रतिबंध लगाने दिया है.
माधबी पुरी बुच ने दी जानकारी
सेबी के चेयरपर्सन माधबी पुरी बुच ने प्रेस कॉफ्रेंस में इस फैसले की जानकारी देते हुए कहा, जिन लोगों को हम रेग्यूलेट नहीं करते उनपर हमारा नियंत्रण नहीं है. उन्होंने कहा कि रेग्यूलेटेड एनटिटी का अन-रजिस्टर्ड एनटिटी के साथ कोई एसोसिएशन नहीं हो सकता है और अगर ऐसा करते हैं तो वे कानून को तोड़ रहे हैं. उन्होंने कहा कि रेग्यूलेटेड एडवाइजर और अनरजिस्टर्ड एनटिटी में अंतर समझने के लिए हमने सुरक्षित स्पेस तैयार किया है. और निवेशकों को पता है कि वो रजिस्टर्ड इकाईयों के साथ डील कर रहे हैं. इसके अलावा सेबी ने वॉलंटरी डीलिस्टिंग नियमों में भी कुछ छूट का ऐलान किया गया है. डीलिस्टिंग के लिए फिक्स्ड प्राइस प्रोसेस को मंजूरी मिल गई है.
अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड्स को लेकर भी बड़ी राहत दी
इतना ही नहीं सेबी ने इस बोर्ड मीटिंग में अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड्स (AIFs) को लेकर भी बड़ी राहत दी है. अब कैटेगरी-1 और कैटेगरी-2 के AIFs को 30 दिन के लिए उधार लेने की अनुमति होगी. मतलब इन्वेस्टर्स के पैसे निकालने पर फंड की कमी की स्थिति में AIFs उधार ले सकेंगे.
डेरिवेटिव सेगमेंट में एंट्री और एग्जिट के लिए नियमों में भी बदलाव
सेबी ने मीटिंग में शेयरों के डेरिवेटिव सेगमेंट में एंट्री और एग्जिट के लिए नियमों में भी बदलाव का ऐलान किया है. डेरिवेटिव सेगमेंट में एंट्री के नियमों में पिछला बदलाव 2018 में हुआ था. सेबी रजिस्टर्ड एडवाइजर्स और एनालिस्ट्स को पेमेंट के लिए एक ऑप्शनल मैकेनिज्म को बनाने के प्रस्ताव को भी मंजूरी मिल गई है.
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