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बेटी को खोने वालीं मां की चिट्ठी पर आया EY इंडिया के चेयरमैन का जवाब
EY इंडिया के चेयरमैन राजीव मेमानी का कहना है कि कंपनी अपने कर्मचारियों के कल्याण को सर्वोपरि मानती है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
हाल ही में एक खबर आई थी कि EY इंडिया की एक युवा कर्मचारी की मौत के लिए उनकी मां ने कंपनी की नीतियों को कुसूरवार ठहराया था. 26 वर्षीय अन्ना सेबेस्टियन पेरयिल की मौत के बाद उनकी मां ने EY इंडिया के चेयरमैन राजीव मेमानी को एक पत्र भी लिखा था. पत्र में उन्होंने कंपनी की कार्य संस्कृति पर सवाल उठाते हुए कहा था कि उनकी बेटी की मौत ज्यादा काम के बोझ के कारण हुई.
हाल ही में हुआ था निधन
अन्ना की मां के पत्र पर अब EY इंडिया के चेयरमैन राजीव मेमानी के बयान आया है. मेमानी का कहना है कि उन्हें अन्ना की मौत का गहरा दुख है. एक पिता होने के नाते वह समझ सकते हैं कि उनके परिवार पर क्या बीत रही होगी. अन्ना सेबेस्टियन ने मार्च में EY इंडिया का पुणे कार्यालय ज्वाइन किया था. इसके कुछ महीने बाद ही उनका निधन हो गया. उनकी मां अनीता ने अपनी बेटी की मौत के लिए कंपनी की नीतियों को कुसूरवार ठहराया.
देर रात तक काम
अन्ना की मां ने अपने पत्र में लिखा कि अन्ना EY से जुड़कर बेहद खुश थी, लेकिन कंपनी में काम का बोझ इतना ज्यादा था कि वह रोज रात 1 बजे तक काम करती रहती थी. अन्ना को सीने में जकड़न की शिकायत भी थी. बावजूद उसे देर तक काम करना पड़ता था. अनीता ने पत्र में यह भी लिखा कि अन्ना के अंतिम संस्कार में EY का कोई भी व्यक्ति शामिल नहीं हुआ, इससे उन्हें बहुत दुख हुआ.
आगे ऐसा नहीं होगा
पीड़ित मां के पत्र पर कंपनी के चेयरमैन का बयान आया है. राजीव मेमानी का कहना है कि वह अन्ना के परिवार के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करते हैं. उन्हें इस बात का बहुत दुख है कि अन्ना के अंतिम संस्कार में EY इंडिया का कोई सदस्य शामिल नहीं हुआ. उन्होंने कहा कि यह हमारी संस्कृति के बिल्कुल विपरीत है. ऐसा पहले कभी नहीं हुआ और आगे कभी नहीं होगा.
मैं चैन से नहीं बैठूंगा
मेनन ने आगे कहा कि कंपनी अपने कर्मचारियों के कल्याण को सर्वोपरि मानती है. मैं यह स्पष्ट करना चाहता हूं कि हमारे कर्मचारियों की भलाई हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है. मैं व्यक्तिगत रूप से एक सौहार्दपूर्ण कार्यस्थल बनाने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध हूं. जब तक यह उद्देश्य पूरा नहीं हो जाता, तब तक मैं चैन से नहीं बैठूंगा. बता दें कि इस घटना के बाद से काम के घंटे और कर्मचारियों के मानसिक स्वास्थ्य पर बहस शुरू हो गई है.
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