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Exclusive: 'अच्छे लोगों' के बैंक में सबकुछ नहीं चल रहा अच्छा, मैनेजमेंट पर गंभीर आरोप

सेबी के बाद एक सरकारी बैंक के टॉप मैनेजमेंट पर गंभीर आरोप लगे हैं. बैंक यूनियन का कहना है कि प्रबंधन लगातार कर्मचारियों की अनदेखी कर रहा है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago

सरकारी संस्थानों में कामकाज का माहौल बेहद तनावपूर्ण होता जा रहा है. हाल ही में बाजार नियामक सेबी के कर्मचारियों ने प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाये थे. नाराज़ कर्मचारियों का कहना था कि  सेबी नेतृत्व टॉक्सिक वर्क कल्चर को बढ़ावा दे रहा है. अब ऐसे ही आरोप यूनियन बैंक ऑफ इंडिया (Union Bank Of India) के प्रबंधन पर लगे हैं. इस सरकारी बैंक से जुड़ी यूनियन का कहना है कि बैंक का नेतृत्व स्वस्थ और सहयोगी कार्य वातावरण को बढ़ावा देने के बजाय, डराने-धमकाने और नीतिगत उल्लंघनों पर केंद्रित है.

एक दिन की हड़ताल का ऐलान
यूनियन बैंक ऑफ इंडिया में दो बहुसंख्यक मान्यता प्राप्त ट्रेड यूनियन - ऑल इंडिया यूनियन बैंक ऑफिसर्स फेडरेशन (AIUBOF) और ऑल इंडिया यूनियन बैंक एम्प्लॉइज एसोसिएशन (AIUBEA) ने संयुक्त रूप से बैंक के शीर्ष प्रबंधन, जिसमें MD, CEO और कार्यकारी निदेशक (HR) शामिल हैं, के गैर-जिम्मेदार और शत्रुतापूर्ण रवैये की निंदा की है. बैंक के प्रबंधन की कार्यप्रणाली से नाराज यूनियन ने 27 सितंबर को एक दिन की हड़ताल का भी ऐलान किया है.

लगातार उपेक्षा का आरोप
AIUBOF और AIUBEA का कहना है कि बैंक का टॉप मैनेजमेंट अधिकारियों और कर्मचारियों की वैध चिंताओं की लगातार उपेक्षा करके टॉक्सिक वर्क कल्चर को बढ़ावा दे रहा है. उनका आरोप है कि बैंक अधिकारियों को ऐसे लक्ष्य दिए जा रहे हैं जिन्हें पूरा करना संभव नहीं. उन्हें ट्रांसफर और अनुशासनात्मक कार्रवाई का डर दिखाया जा रहा है. यहां तक कि प्रबंधन अनैतिक प्रथाओं को भी प्रोत्साहित कर रहा है. इससे आंतरिक धोखाधड़ी की आशंका बढ़ी है और पब्लिक फंड गंभीर जोखिम में आ गया है.

चिंताओं को किया खारिज 
यूनियन का कहना है कि बैंक प्रबंधन ने बाहरी HR सलाहकारों की गलत सलाह पर भरोसा करते हुए जानबूझकर भर्ती प्रक्रिया को रोका हुआ है. जबकि AIUBOF और AIUBEA द्वारा उठाई गई चिंताओं को खारिज कर दिया है. उन्होंने आरोप लगाया कि बिना किसी तैयारी के एकतरफा फैसले और खराब नीतियां लागू की गई हैं, जिसके परिणामस्वरूप बार-बार विफलताएं हुई हैं, जो बैंक के संचालन और प्रदर्शन को कमजोर करती हैं. यूनियन का यह भी आरोप है कि टॉप मैनेजमेंट कस्टमर्स को जबरन डिजिटल प्लेटफॉर्म की ओर धकेल रहा है, जबकि ये प्लेटफॉर्म अभी तक ग्राहक-अनुकूल बने भी नहीं हैं.

कोई विकल्प नहीं बचा
AIUBOF और AIUBEA का कहना है कि लगातार की जा रही अनदेखी के बाद बैंक प्रबंधन ने 17-18 सितंबर को यूनियनों द्वारा प्रस्तुत 20-सूत्रीय एजेंडे पर चर्चा करने के लिए एक संयुक्त बैठक बुलाई थी, लेकिन कार्यकारी निदेशक (मानव संसाधन) संजय रुद्र ने जानबूझकर और मनमाने ढंग से सहमति वाले बिंदुओं को कमजोर करने की कोशिश की.  लिहाजा, अब यूनियन के पास टॉप मैनेजमेंट की नीतियों के खिलाफ हड़ताल के अलावा कोई और विकल्प नहीं बचा है. इसी के मद्देनजर AIUBOF और AIUBEA के संयुक्त तत्वाधान में 27 सितंबर, 2024 को एक दिवसीय हड़ताल करने का निर्णय लिया है.

अब सरकार से है उम्मीद 
यूनियन का कहना है कि इस हड़ताल की पूरी जिम्मेदारी यूनियन बैंक के टॉप मैनेजमेंट की है.  AIUBOF के जनरल सेक्रेटरी PM बालाचंद्र और  AIUBEA के जनरल सेक्रेटरी एन शंकर ने कहा कि हमें उम्मीद है कि हड़ताल वित्तीय सेवा विभाग (DFS), भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और वित्त मंत्रालय सहित प्रमुख हितधारकों का ध्यान आकर्षित करेगी. साथ ही वे यूनियन बैंक के नेतृत्व द्वारा लिए जा रहे विनाशकारी फैसलों पर गौर करेंगे और इस महत्वपूर्ण सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक के भविष्य की सुरक्षा के लिए तत्काल कदम उठाएंगे.


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