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EICI ने ECCS को नए कस्टम्स सिस्टम में शामिल करने हेतु जारी किया श्वेत पत्र

EICI द्वारा जारी यह श्वेत पत्र भारत के कस्टम्स इंटीग्रेटेड सिस्टम (CIS) में मौजूदा एक्सप्रेस कार्गो क्लीयरेंस सिस्टम (ECCS) को सुचारु और प्रभावी रूप से एकीकृत करने की एक ठोस पहल है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago

भारत में अग्रणी अंतरराष्ट्रीय और घरेलू एक्सप्रेस कंपनियों का प्रतिनिधित्व करने वाली शीर्ष संस्था एक्सप्रेस इंडस्ट्री काउंसिल ऑफ इंडिया (EICI) ने बीआरआईईएफ (Bureau of Research on Industry and Economic Fundamentals) के सहयोग से एक महत्वपूर्ण श्वेत पत्र (White Paper) जारी किया है. यह श्वेत पत्र ‘भारत में एक्सप्रेस कार्गो क्लीयरेंस का भविष्य,  नए कस्टम्स इंटीग्रेटेड सिस्टम में ईसीसीएस’ शीर्षक के अंतर्गत प्रस्तुत किया गया है.

इस श्वेत पत्र का उद्देश्य नियामक संस्थाओं, विशेष रूप से केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) को मौजूदा एक्सप्रेस कार्गो क्लीयरेंस सिस्टम (ECCS) की प्रमुख विशेषताओं और उद्योग की आगामी प्रणाली CIS (Customs Integrated System) से अपेक्षाओं के बारे में अवगत कराना है. इसे नई दिल्ली में आयोजित एक विचार-विमर्श सत्र के दौरान औपचारिक रूप से CBIC को सौंपा गया, जिसमें योगेन्द्र गर्ग, सदस्य (आईटी व करदाता सेवाएं), DG Systems के अधिकारी, और लॉजिस्टिक्स व एक्सप्रेस उद्योग के वरिष्ठ प्रतिनिधि उपस्थित रहे.

श्वेत पत्र में उद्योग की वर्तमान परिस्थितियों के आधार पर संचालन को सुव्यवस्थित करने, दोहराव को समाप्त करने और भारत की व्यापार सुविधा संरचना को मजबूत करने के लिए सिफारिशें दी गई हैं. एक्सप्रेस कार्गो उद्योग को ई-कॉमर्स को गति देने और एमएसएमई को वैश्विक व्यापार से जोड़ने वाला महत्वपूर्ण आधार बताया गया है. 2024 में यह उद्योग ₹70,000 करोड़ से अधिक का आंकड़ा छू चुका है और पिछले 7 वर्षों में 15% से 18% की वार्षिक वृद्धि दर से बढ़ा है, जिसमें 30 लाख से अधिक लोग कार्यरत हैं.

भारत का CEP (Courier, Express और Parcel) बाजार 2025 में \$8.62 बिलियन से बढ़कर 2030 तक लगभग \$15 बिलियन तक पहुंचने की संभावना है, जिससे प्रभावी लॉजिस्टिक्स प्रणाली की आवश्यकता और भी अधिक हो गई है. एक रिपोर्ट के अनुसार, ECCS के तहत कूरियर बिल ऑफ एंट्री (CBEs) और कूरियर शिपिंग बिल्स (CSBs) की बल्क फाइलिंग, बारकोड स्कैनिंग, रीयल-टाइम ट्रैकिंग, और आटोमेटेड अप्रूवल जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं, जो समय-संवेदनशील शिपमेंट्स की तेजी से प्रोसेसिंग को सुनिश्चित करती हैं. वर्तमान में यह सिस्टम देशभर के प्रमुख एक्सप्रेस टर्मिनलों पर प्रतिदिन लगभग 50,000 शिपमेंट्स को संभालता है.

वित्त वर्ष 2020 से 2024 के बीच, ECCS में आयात और निर्यात फाइलिंग की संख्या 4.6 मिलियन से बढ़कर 19.5 मिलियन हो गई, जो 320 प्रतिशत की वृद्धि है. इस दौरान CBIC का ECCS से प्राप्त राजस्व ₹5,816 करोड़ से बढ़कर ₹7,851 करोड़ हो गया, जो 35 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है.

EICI ने चिंता जताई है कि अगर ECCS को एकीकृत CIS के तहत सामान्य कार्गो प्रक्रियाओं में मिला दिया गया, तो इसकी विशिष्टता और गति प्रभावित हो सकती है. संगठन का सुझाव है कि नई प्रणाली में एक्सप्रेस, एयर, सी, लैंड और पोस्टल कार्गो के लिए अलग-अलग क्लीयरेंस मॉड्यूल होने चाहिए.

ये हैं मुख्य सिफारिशें 

1.  एक्सप्रेस क्लीयरेंस को CIS के भीतर अलग और स्वतंत्र रूप से डिज़ाइन किया गया मॉड्यूल होना चाहिए, जो विश्व कस्टम्स संगठन (WCO) की Immediate Release Guidelines के अनुरूप हो.

2.  CIS को मॉड्यूलर आर्किटेक्चर के साथ विकसित किया जाए, ताकि एक्सप्रेस, समुद्री, हवाई, भूमि व डाक कार्गो को अलग-अलग संभाला जा सके और एक क्षेत्र की समस्या अन्य पर असर न डाले.

3.  एक्सप्रेस उद्योग के साथ निरंतर परामर्श और सहभागिता आवश्यक है, विशेष रूप से CIS के विकास और कार्यान्वयन के सभी चरणों में.

4.  ECCS की रीयल-टाइम अपडेट्स, बल्क फाइलिंग, ऑटोमेटेड OOC/LEO जैसी प्रमुख क्षमताओं को नए सिस्टम में अनिवार्य रूप से बनाए रखा जाए.

5. ICEGATE की सभी मौजूदा कार्यप्रणालियों को एक्सप्रेस मॉड्यूल में शामिल किया जाए, ताकि संचालन में किसी प्रकार की बाधा न हो और ड्वेल टाइम घटे.

6.  एक्सप्रेस मॉड्यूल को API-सक्षम बनाया जाए, ताकि प्रणाली आपस में सहजता से जुड़ सके और स्केलेबल व अनुकूलनीय बनी रहे.

7. रिफाइंड रिस्क मैनेजमेंट सिस्टम अपनाया जाए, जिसमें सख्त नियंत्रण और सहायक प्रक्रियाओं में संतुलन हो, विशेष रूप से एक्सप्रेस कार्गो के लिए.

8.  जांच प्रक्रिया प्रणाली-आधारित होनी चाहिए, ताकि मैन्युअल हस्तक्षेप कम हो और समय-संवेदनशील शिपमेंट्स में देरी न हो.

9. एक समर्पित हेल्प डेस्क की स्थापना की जाए जो विशेष रूप से एक्सप्रेस उद्योग उपयोगकर्ताओं के लिए हो.

10. सिस्टम का डाउनटाइम सीमित और पहले से निर्धारित समय पर हो, जिससे न्यूनतम व्यवधान हो.

11. जीएसटी और बैंकिंग जैसी सरकारी प्रणालियों से जुड़ी जानकारी CIS में ऑटो-इंटीग्रेटेड हो, जिससे बार-बार डेटा एंट्री की आवश्यकता न हो.

EICI के सीईओ विजय कुमार ने कहा "एक्सप्रेस कार्गो उद्योग लॉजिस्टिक्स इकोसिस्टम का एक अभिन्न हिस्सा है, जो ई-कॉमर्स को गति देने के साथ-साथ भारत की 'ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस' और वैश्विक व्यापार एकीकरण की दिशा को समर्थन देता है. CIS के माध्यम से भारत की वैश्विक स्थिति को सुदृढ़ करने के लिए यह श्वेत पत्र एक महत्वपूर्ण प्रयास है. ECCS की सफलता CBIC के साथ हमारी भागीदारी का प्रमाण है और अब यह अगला कदम नीति-निर्माण में उद्योग की आवाज को शामिल करने की दिशा में है".

BRIEF के निदेशक आफाक हुसैन ने कहा "यह श्वेत पत्र एक्सप्रेस उद्योग और सरकार के बीच साझा दृष्टिकोण को दर्शाता है, जो संचालन को सरकार की विकास नीति के अनुरूप संरेखित करता है. हम सरकार की भागीदारों से संवाद की प्रतिबद्धता की सराहना करते हैं".

जैसे-जैसे भारत विकसित भारत मिशन के तहत \$30 ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ रहा है, यह जरूरी है कि पारंपरिक और एक्सप्रेस कार्गो दोनों को समान रूप से मज़बूती दी जाए. प्रस्तावित सुधार न केवल एक्सप्रेस क्षेत्र की दक्षता की रक्षा करते हैं, बल्कि पूरे कार्गो इकोसिस्टम की लचीलापन और विस्तार क्षमता को भी मजबूत करते हैं. इससे भारत वैश्विक लॉजिस्टिक्स, ई-कॉमर्स और क्रॉस-बॉर्डर ट्रेड में अपनी नेतृत्वकारी भूमिका को सुनिश्चित कर सकेगा.

 

 


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