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आर्थिक अनिश्चितता और बढ़ते टैरिफ से अमेरिका में लोगों का भरोसा हुआ कमजोर: GlobalData
GlobalData के सर्वे में पता चला है कि 55% ग्राहक अब यह ज़्यादा ध्यान देने लगे हैं कि जो चीज़ वे खरीदते हैं वह किस देश की बनी है, क्योंकि अभी की राजनीतिक घटनाएँ उनका ध्यान इस ओर खींच रही हैं.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
GlobalData नाम की एक डेटा और एनालिटिक्स कंपनी की एक रिपोर्ट के अनुसार, बढ़ते ट्रेड टेंशन (व्यापारिक तनाव) और अलग-अलग देशों द्वारा लगाए गए टैक्स (टैरिफ) के असर से कंपनियों और आम लोगों पर दबाव बढ़ रहा है. ये आर्थिक परेशानियाँ अब लोगों की सोच और रोज़मर्रा की खुशी को भी प्रभावित कर रही हैं. हैप्पीनेस इंडेक्स (खुशी का स्तर बताने वाला सूचकांक) बहुत सारे सामाजिक और आर्थिक पहलुओं को मापता है. लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार चल रही आर्थिक अनिश्चितता अब अमेरिकी परिवारों पर साफ असर दिखाने लगी है.
GlobalData की सीनियर कंज्यूमर एनालिस्ट प्रेरणा मनराल ने कहा, "टैरिफ अब सिर्फ एक नीतिगत बहस नहीं है, ये अब कंपनियों की लागत को सीधे बढ़ा रहे हैं. खासकर वे एफएमसीजी (FMCG) कंपनियाँ जिनकी सप्लाई चेन दुनियाभर में फैली है, अब दो मुश्किल विकल्पों के बीच फँसी हैं – या तो अपने प्रॉफिट में कटौती सहें, या फिर दाम बढ़ाकर लागत ग्राहक से वसूलें, जिससे मांग (demand) कम हो सकती है."
The Guardian की रिपोर्ट के मुताबिक, बड़ी उपभोक्ता वस्तु कंपनियाँ जैसे Procter & Gamble, Nestlé और Unilever ने बताया है कि टैरिफ की वजह से उनकी लागत बहुत बढ़ गई है, जिसके कारण उन्होंने रोज़ की ज़रूरत की चीज़ों के दाम भी बढ़ा दिए हैं. उदाहरण के लिए, Kraft Heinz ने अपने वित्तीय अनुमान (financial outlook) को कम किया है और कहा है कि टैरिफ और महंगाई की वजह से व्यापार की स्थिति बहुत अस्थिर हो गई है. PepsiCo और Procter & Gamble ने भी अपने मुनाफे के अनुमान घटा दिए हैं, क्योंकि टैरिफ से महंगाई बढ़ी है और लोग ज़रूरी चीज़ें भी कम खरीद रहे हैं.
कुल मिलाकर आर्थिक स्थिति की कमजोर हालत अब साफ नजर आने लगी है. अप्रैल में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने अमेरिका की 2025 की आर्थिक विकास दर का अनुमान घटा दिया — जनवरी में यह 2.7% था, अब इसे 1.8% कर दिया गया है. यह बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में सबसे ज्यादा गिरावट है. आम लोग भी इस दबाव को महसूस कर रहे हैं. AP-NORC की ताज़ा रिसर्च के मुताबिक, तीन में से चार अमेरिकी मानते हैं कि टैरिफ (आयात टैक्स) से चीज़ों के दाम और बढ़ेंगे. कई लोग यह भी मानते हैं कि मंदी (recession) का खतरा बढ़ रहा है.
प्रेरणा मनराल ने बताया, “अमेरिका में 56% लोग कहते हैं कि वे व्यापार युद्ध (trade wars) और आयात टैक्स (import tariffs) के कारण चीज़ों की कीमतों को लेकर बहुत ज़्यादा या काफी चिंतित हैं.” इसी वजह से Michigan Consumer Sentiment Index (जो बताता है कि लोग भविष्य की अर्थव्यवस्था को लेकर कैसा महसूस कर रहे हैं) 2022 के बाद से सबसे निचले स्तर पर आ गया है.
लोग अब बढ़ती महंगाई और आर्थिक परेशानियों के लिए तैयार हो रहे हैं. लगातार बढ़ती महंगाई, जो टैरिफ की वजह से और भी ज़्यादा हो रही है, लोगों में चिंता बढ़ा रही है. इससे वे ज़रूरत से ज़्यादा खर्च करने से बच रहे हैं, हर चीज़ की कीमत पर ज़्यादा ध्यान दे रहे हैं, और यह भी देख रहे हैं कि चीज़ किस देश में बनी है.
टैरिफ का असर सिर्फ कीमत पर ही नहीं, बल्कि खरीदने की सोच पर भी पड़ रहा है. GlobalData की एक सर्वे में यह सामने आया कि अब 55% ग्राहक यह देखने लगे हैं कि जो चीज़ें वे खरीद रहे हैं, वो किस देश की बनी हुई हैं, क्योंकि राजनीति और नीतियाँ उनके फैसलों को प्रभावित कर रही हैं. इसे Political Consumerism कहा जाता है – यानी अब लोग सिर्फ दाम देखकर नहीं, बल्कि देश, विचारधारा और नीति देखकर भी खरीददारी कर रहे हैं.
प्रेरणा ने अंत में कहा, “टैरिफ (आयात टैक्स) सिर्फ कंपनियों की लागत नहीं बढ़ा रहे, बल्कि ग्राहकों की उम्मीदें, भरोसा और खरीदने का तरीका भी बदल रहे हैं. अमेरिका में लोगों की खुशी के स्तर में गिरावट कई कारणों से है, लेकिन इसका सीधा संबंध आर्थिक हालात से है — खासकर उन नीतियों से जो व्यापार और टैरिफ से जुड़ी हैं. जब ग्राहक ऊंचे दाम चुकाते हैं और कंपनियाँ बढ़ी हुई लागत और अनिश्चितता का सामना करती हैं, तो इसका असर लोगों की सामूहिक भलाई और खुशी पर पड़ता है.”
उन्होंने आगे कहा, “ऐसे माहौल में FMCG कंपनियों को नीतियों में बार-बार आने वाले बदलावों के लिए तैयार रहना होगा और ऐसी रणनीति बनानी होगी जो ग्राहकों के आर्थिक और भावनात्मक दोनों पहलुओं को समझे. इसमें स्थिर और समझदारी से बनाए गए दाम, स्थानीय स्तर पर माल जुटाना, और खुलकर ग्राहकों से संवाद करना शामिल है — ताकि लोगों का भरोसा और वफादारी बनी रहे, खासकर जब समय अनिश्चित हो.”
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