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दुनिया के टॉप 25 ग्लोबल बैंकों की कमाई 2024 में 9.4% बढ़ी, लेकिन मुनाफे पर रहा दबाव
टॉप 25 बैंकों में से ज़्यादातर ने अपनी कमाई में साल दर साल बढ़त दिखाई. Sberbank Rossii ने 54%, BBVA ने 30.3% और UBS Group ने 22.3% की ग्रोथ दर्ज की.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
दुनिया के टॉप 25 ग्लोबल बैंकों ने 2024 में साल दर साल (YoY) 9.4% की रेवेन्यू बढ़त दर्ज की, भले ही वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव रहा. Sberbank Rossii, BBVA और UBS Group इस दौरान सबसे अच्छे प्रदर्शन करने वाले बैंक रहे. हालांकि, मुनाफा (profit) में मिला-जुला असर देखने को मिला क्योंकि कई बैंकों को ज्यादा खर्च, सख्त नियम और भूराजनीतिक अनिश्चितता का सामना करना पड़ा. इससे यह बात साफ होती है कि रेवेन्यू बढ़ने के बावजूद बैंकों की कुल वित्तीय सेहत में उतनी मजबूती नहीं आई.
टॉप 25 बैंकों में से ज़्यादातर ने अपनी कमाई में साल दर साल बढ़त दिखाई. Sberbank Rossii ने 54%, BBVA ने 30.3% और UBS Group ने 22.3% की ग्रोथ दर्ज की. यह रिपोर्ट GlobalData नाम की एक प्रमुख डेटा और एनालिटिक्स कंपनी ने दी है.
GlobalData के कंपनी प्रोफाइल विश्लेषक मूर्ति ग्रांधी ने कहा कि “Sberbank Rossii ने कठिन भूराजनीतिक और आर्थिक हालात के बावजूद सबसे अच्छा रेवेन्यू प्रदर्शन किया. बैंक की कमाई में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई, जिसका कारण था रूस की घरेलू अर्थव्यवस्था में सुधार, महंगाई में स्थिरता और ऊंचे ब्याज से मिलने वाला फायदा, लेकिन इसके बावजूद, बैंक का शुद्ध मुनाफा (net income) बहुत नीचे गिर गया और नुकसान में चला गया। इसकी वजह रही आर्थिक अस्थिरता, करेंसी की गिरावट और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के कारण बढ़ती दिक्कतें.”
इसी तरह, BBVA बैंक ने भी 28.9% ब्याज आय में बढ़ोतरी दर्ज की. यह बढ़त मुख्य रूप से मैक्सिको और तुर्की जैसे देशों में बैंक की मज़बूत मौजूदगी की वजह से हुई, जहां ब्याज का मार्जिन काफी बढ़ गया.
UBS Group ने भी शानदार प्रदर्शन किया, जिसमें इसकी कमाई (रेवेन्यू) में 22.3% की सालाना बढ़त और पिछले 5 सालों में 17.4% की औसत सालाना ग्रोथ (CAGR) रही. इसकी बड़ी वजह थी Credit Suisse का अधिग्रहण (खरीदना). लेकिन इस अधिग्रहण से जुड़े खर्चों और जोखिमों की वजह से UBS का मुनाफा 80% से ज्यादा गिर गया, जिससे पता चलता है कि इस डील का शुरुआती असर भारी पड़ा.
चीन के टॉप बैंक ICBC, China Construction Bank, Agricultural Bank of China और Bank of China ने हल्की-फुल्की कमाई और मुनाफे में बढ़त दिखाई. ICBC की 2024 की कमाई थोड़ा घटी (0.6% की गिरावट). Agricultural Bank of China ने अपने जैसे अन्य चीनी बैंकों में सबसे तेज 5 साल की एसेट ग्रोथ (8.8% CAGR) दिखाई. हालांकि सरकार की नीतियों के कारण ब्याज दरों की सीमा (rate cap) और धीमी घरेलू अर्थव्यवस्था की वजह से इन बैंकों के प्रॉफिट मार्जिन पर असर पड़ा, फिर भी इन बैंकों की कुल संपत्तियाँ लगातार बढ़ रही हैं. यह दर्शाता है कि ये बैंक देश में मजबूत पकड़ और सरकारी समर्थन के चलते स्थिर बने हुए हैं.
JPMorgan Chase ने 2024 में सबसे ज़्यादा कमाई (रेवेन्यू) की $278.9 बिलियन, जो 16.5% सालाना बढ़त और पिछले 5 सालों की भी 16.5% औसत ग्रोथ (CAGR) है. इसकी कमाई में बढ़त की बड़ी वजह थी: ऊंचे ब्याज दरों की वजह से ज्यादा ब्याज आय (net interest income) और मज़बूत ट्रेडिंग प्रदर्शन. बैंक का शुद्ध मुनाफा (net income) रहा $58.5 बिलियन (18% सालाना बढ़त), जबकि एसेट्स (संपत्तियाँ) में बढ़त सिर्फ 3.3% रही. इसका मतलब है कि बैंक ने नियमों के चलते अपने बैलेंस शीट को संतुलित रखा.
Bank of America और Citigroup को भी ऊंची ब्याज दरों के दौर से फायदा हुआ. Citigroup ने $170.8 बिलियन की कमाई की 2024 में और 13.96% की 5 साल की CAGR दिखाई. हालांकि, Citigroup की संपत्तियाँ 2.4% घटी, क्योंकि कंपनी ने कमजोर प्रदर्शन वाले क्षेत्रों में अपने कामकाज को छोटा किया और कुछ हिस्सों को बेच दिया (restructuring और divestment).
यूरोप के बैंक, जो लंबे समय से नकारात्मक ब्याज दरों और बंटे हुए बाज़ारों की समस्या से जूझ रहे थे, अब तेजी से सुधार दिखा रहे हैं. BNP Paribas और HSBC ने अच्छी 5 साल की कमाई ग्रोथ (CAGR) दिखाई — क्रमशः 13.1% और 14%, जो इनकी दुनियाभर की फैली हुई सेवाओं और खर्चों को कम करने की रणनीति का नतीजा है. Societe Generale और Credit Agricole ने तो 17% से ज्यादा की CAGR और 60% से ज्यादा की सालाना मुनाफा बढ़त दिखाई. हालांकि यह बढ़त कम आधार (low base) से शुरू हुई थी, फिर भी यह इनके सफल रणनीतिक बदलाव और यूरोज़ोन में बढ़ती ब्याज दरों का संकेत देती है.
GlobalData के कंपनी प्रोफाइल विश्लेषक मूर्ति ग्रांधी ने निष्कर्ष निकालते हुए कहा कि “आगे चलकर, ग्लोबल बैंकों के सामने मिला-जुला माहौल रहेगा. कम होती महंगाई (inflation) के कारण अमेरिका और यूरोप में ब्याज दरें घट सकती हैं, जिससे बैंकों की कमाई (net interest margin) पर असर पड़ेगा. लेकिन लोन की मांग बढ़ने और पूंजी लागत घटने से इसकी भरपाई हो सकती है. अमेरिका और चीन में कड़े नियम मुनाफे पर दबाव डाल सकते हैं. वहीं, जो बैंक emerging markets (विकासशील देशों) में काम कर रहे हैं, उन्हें मुद्रा अस्थिरता (currency volatility) और राजनीतिक अनिश्चितता से निपटना होगा.”
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